{"_id":"5ead98618ebc3e906700af35","slug":"40-foreigners-in-the-hope-of-8-homecoming-auraiya-news-knp5581362148","type":"story","status":"publish","title_hn":"परदेश में काम करने वाले स्वजनो की चिंता सताने लगी परिजनों को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परदेश में काम करने वाले स्वजनो की चिंता सताने लगी परिजनों को
विज्ञापन
फोटो 02 एयूआरपी 01-मोहारी गांव में चिंता में बैठे परदेस में काम करने वालो के परिजन
- फोटो : AURAIYA
फोटो 02 एयूआरपी 01-मोहारी गांव में चिंता में बैठे परदेस में काम करने वालों के परिजन।
घर वापसी की आस में 40 परदेसी
- परिजन परेशान, जिला प्रशासन से लगा रहे गुहार
- गुजरात के राजकोट में फंसे हैं मोहारी गांव के लोग
अजीतमल (औरैया)। क्षेत्र के मोहारी गांव के 40 लोग गुजरात के राजकोट शहर में लॉकडाउन के कारण फंसे हैं। यह लोग राजकोट में पेंट्स आदि का कार्य करते हैं। उनके स्वजनों ने घर वापसी के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।
मोहारी निवासी रामसिया, रामकुमारी, रामसिंह, राजेश्वरी, रूबी, सुरेंद्र, राजू, फूलन देवी, किताब श्री, बलवीर, छोटे, लालू, जुड़ावन सिंह, ब्रह्मा देवी, राममूर्ति, मीना देवी, कमला देवी, सोनी देवी, विद्यावती, रामलखन, श्याम सिंह, ओकार सिंह, विकास आदि ने बताया कि रोजगार की तलाश में गांव के लोगों को गुजरात जाना पड़ा। वहां पर अधिकांश लोग पेंट्स आदि का कार्य कर रहे है। लॉकडाउन हो जाने से काम मिलना बंद हो गया। थोड़ी बहुत जमा पूंजी ने कुछ दिन तक साथ दे दिया। अब भूखों रहने की नौबत है। घर लौटेंगे तो कम से कम पेट तो भरेगा। हम लोगों की चिंता भी दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
घर वापसी की आस में 40 परदेसी
- परिजन परेशान, जिला प्रशासन से लगा रहे गुहार
- गुजरात के राजकोट में फंसे हैं मोहारी गांव के लोग
अजीतमल (औरैया)। क्षेत्र के मोहारी गांव के 40 लोग गुजरात के राजकोट शहर में लॉकडाउन के कारण फंसे हैं। यह लोग राजकोट में पेंट्स आदि का कार्य करते हैं। उनके स्वजनों ने घर वापसी के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।
मोहारी निवासी रामसिया, रामकुमारी, रामसिंह, राजेश्वरी, रूबी, सुरेंद्र, राजू, फूलन देवी, किताब श्री, बलवीर, छोटे, लालू, जुड़ावन सिंह, ब्रह्मा देवी, राममूर्ति, मीना देवी, कमला देवी, सोनी देवी, विद्यावती, रामलखन, श्याम सिंह, ओकार सिंह, विकास आदि ने बताया कि रोजगार की तलाश में गांव के लोगों को गुजरात जाना पड़ा। वहां पर अधिकांश लोग पेंट्स आदि का कार्य कर रहे है। लॉकडाउन हो जाने से काम मिलना बंद हो गया। थोड़ी बहुत जमा पूंजी ने कुछ दिन तक साथ दे दिया। अब भूखों रहने की नौबत है। घर लौटेंगे तो कम से कम पेट तो भरेगा। हम लोगों की चिंता भी दूर हो जाएगी।
विज्ञापन