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Auraiya News: बीहड़ में प्राकृतिक खेती से जुड़े 3000 किसान

Thu, 24 Jul 2025 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Thu, 24 Jul 2025 12:14 AM IST
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3000 farmers involved in natural farming in the ravines
औरैया। जनपद में औरैया व अजीतमल ब्लॉक क्षेत्र में यमुना का बीहड़ सालों पहले डाकुओं की पनाहगार था। अब बीहड़ का इलाका प्राकृतिक खेती के लिए जाना-पहचाना जाएगा।
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प्रशिक्षण के बाद जनपद के तीन हजार किसानों को इससे जोड़ा गया है। अब खरीफ सीजन से बीहड़ में प्राकृतिक खेती के जरिये पैदा होने वाली फसलें लहलहाएंगी।
शासन का प्राकृतिक खेती पर जोर है। रासायनिक उर्वरकों में गिरावट लाने के लिए जिला प्रशासन ने बीहड़ का चयन कर प्राकृतिक खेती का नवाचार करीब छह माह पूर्व तैयार किया था। इसे अमली जामा पहनाने के लिए 125 एकड़ का क्लस्टर तैयार किया गया है। इसमें 24 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में दो कृषि सखियां प्रशिक्षित की गईं।
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वहीं खेती बाड़ी के इस नवाचार में बीहड़ के तीन हजार किसान भी चयनित हुए, जिन्हें कृषि सखियों ने प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण के बाद अब प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को तैयार किया गया है।
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चयनित किसानों ने खरीफ सीजन से बीहड़ के 24 क्लस्टरों में प्राकृतिक खेती शुरुआत भी कर दी है। साथ ही जिला प्रशासन ने प्राकृतिक खेती से निकलने वाली उपज को बाजार मुहैया कराने का काम भी शुरू कर दिया है।
इसे लेकर पहली कड़ी में उपज के सर्टिफिकेशन पर काम होगा। देश-विदेश में इस उपज की बिक्री कर किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।

प्रति एकड़ मिलेगा चार हजार रुपये का अनुदान
प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए कृषि विभाग ने पहले दो साल के लिए चार-चार हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान निर्धारित किया है। इस अनुदान राशि से किसान जरूरी संसाधन भी जुटा सकेंगे। सब्जी से लेकर अनाज को बाजार में ज्यादा भाव दिलाने के लिए सर्टिफिकेशन की व्यवस्था रहेगी।

प्राकृतिक खेती को लेकर प्रशिक्षण का चरण पूरा हो गया है। तीन हजार किसानों को इसी खरीफ सीजन से इस नवाचार से जोड़ा जा रहा है। इसे लेकर प्रत्येक क्लस्टरों में खेतों का अवलोकन शुरू हो गया है।
-शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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