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Auraiya News: छह साल से 200 एकड़ जमीन पर भरा है पानी, बोआई नहीं कर पा रहे पांच सौ किसान
Thu, 21 Aug 2025 12:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 21 Aug 2025 12:56 AM IST
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फोटो-20एयूआरपी 24- दो फुट भरे पानी के बीच फसल के बजाय खेत में उगी बर्साती घास। संवाद
औरैया। दिबियापुर से सटे गांव घेरा, कैंझरी व जमुहां के 500 परिवार छह सालों से 200 एकड़ जमीन पर फसल नहीं उगा पा रहे। कभी यह जमीन खूब उपजाऊ थी।
यहां के काश्तकारों की गेहूं व धान की फसलें लहलहाती थी, लेकिन अब यहां साल के आठ महीने जलभराव ही रहता है। नाले पर कब्जे और सफाई न होने से समस्या चली आ रही है। दिबियापुर कस्बे से घेरा, जमुहां व कैंझरी गांव सटे हुए हैं। ये गांव पांच किमी. के दायरे में है। काफी कुछ हिस्सा दिबियापुर कस्बे को छूता है।
यहां के किसानों के मुताबिक साल 2019 से पहले इन गांवों का पानी मैनपूठ नाले से होकर दिबियापुर कस्बे से होता हुआ सेंगर नदी में जाता था, लेकिन इस नाले पर अवैध कब्जे व सफाई न होने की वजह से जलनिकासी अवरुद्ध है।
ऐसे में 200 एकड़ जमीन साल के आठ माह जलमग्न रहती है। दिबियापुर कस्बे से सटे हुए कई हिस्से इस जलभराव की चपेट में रहते हैं। जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारियों से इसे लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन छह सालों से ये समस्या बरकरार है।
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किसानों का आरोप है कि सफाई कराने के नाम पर कोरम पूरा किया जाता है। जलनिकासी न के बराबर हो पाती है, लेकिन समस्या दूर नहीं कराई जा सकी है। इससे किसान परेशान हो रहे हैं।
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यहां के काश्तकारों की गेहूं व धान की फसलें लहलहाती थी, लेकिन अब यहां साल के आठ महीने जलभराव ही रहता है। नाले पर कब्जे और सफाई न होने से समस्या चली आ रही है। दिबियापुर कस्बे से घेरा, जमुहां व कैंझरी गांव सटे हुए हैं। ये गांव पांच किमी. के दायरे में है। काफी कुछ हिस्सा दिबियापुर कस्बे को छूता है।
यहां के किसानों के मुताबिक साल 2019 से पहले इन गांवों का पानी मैनपूठ नाले से होकर दिबियापुर कस्बे से होता हुआ सेंगर नदी में जाता था, लेकिन इस नाले पर अवैध कब्जे व सफाई न होने की वजह से जलनिकासी अवरुद्ध है।
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ऐसे में 200 एकड़ जमीन साल के आठ माह जलमग्न रहती है। दिबियापुर कस्बे से सटे हुए कई हिस्से इस जलभराव की चपेट में रहते हैं। जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारियों से इसे लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन छह सालों से ये समस्या बरकरार है।
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किसानों का आरोप है कि सफाई कराने के नाम पर कोरम पूरा किया जाता है। जलनिकासी न के बराबर हो पाती है, लेकिन समस्या दूर नहीं कराई जा सकी है। इससे किसान परेशान हो रहे हैं।