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Auraiya News: चिरैयापुर में संदिग्ध हालात में 20 मवेशियों की मौत, अब जागे जिम्मेदार
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फोटो-32-बीमार भैंस के पास खड़े होकर जानकारी देते पशुपालक।संवाद
फफूंद। क्षेत्र के गांव चिरैयापुर में 15 दिन से हो रही मवेशियों की मौत से पशुपालकों में खलबली है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में 20 से अधिक भैंसें, एक बछड़े और पांच बकरियों की मौत हो चुकी है। ये मौत खुरपका, मुंहपका और घुड़का से हुईं हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन का दावा है कि मवेशियों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। पशु चिकित्साधिकारियों ने संक्रमित चारे से इंफेक्शन की आशंका जताई है।
गांव में अधिकांश लोग खेती के साथ ही पशुपालन करते हैं। बीते 15 दिनों से अचानक भैंस, बछड़े और बकरियां बीमार होने लगीं। ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी खुरपका, मुंहपका और घुड़का की बीमारी से पीड़ित थे। उनका यह भी आरोप है कि न तो बीते कई सालों में मवेशियों का टीकाकरण हुआ और न ही बीमार मवेशियों को उपचार मिल सका। पशुपालकों ने इसकी सूचना 1076 और आपातकालीन पशु चिकित्सा 1962 पर दी लेकिन कई बार फोन के बाद भी पशुपालन विभाग की टीम गांव पहुंची। इससे एक सप्ताह के अंदर उमेश की दो भैंस, मुकेश, विनोद, प्रमोद, गणेश, अजय, लक्ष्मण, रघुबीर, संजय, सर्वेश, राजेंद्र, भूरे, हरिशंकर, निकसन, गजेंद्र पाल, रमेश, बलवंत, अमर सिंह, राहुल और गजेंद्र की एक-एक भैंस की मौत हो चुकी है।
वहीं प्रमोद का एक बछड़ा, शेर सिंह की चार बकरी एवं बाबूराम पाल का एक बकरा भी बीमारी की चपेट में आकर मर गए। पशुपालकों ने बताया कि मरने वाली कई भैंसों की कीमत 80 हजार से एक लाख रुपये तक थी। इससे गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। गांव के अन्य पशुपालक नाथूराम कुशवाह, राजेंद्र, मुकेश, शिव बालक व रामप्रकाश सहित कई किसानों के पचास से अधिक पशु बीमार हैं। ग्रामीणों ने बीमार पशुओं का इलाज कराने, टीकाकरण कराने एवं मृत पशुओं के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
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बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर जब यह खबर वायरल हुई तो पशु चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर उपचार शुरू किया। पशु चिकित्साधिकारी भाग्यनगर डॉ. बृजभूषण सिंह ने बताया कि गांव में मवेशियों में बीमारी फैलने की किसी ग्रामीण ने जानकारी नहीं दी थी। अभी जानकारी हुई है और बीमार पशुओं के इलाज और टीकाकरण के लिए पशुधन प्रसार अधिकारी अहिवरन सिंह के साथ टीम भेजी जा रही है।
डीएम के आदेश पर पहुंचे सीडीओ और सीवीओ
मवेशियों की मौत की जानकारी होने पर डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के आदेश पर सीडीओ संत कुमार और सीवीओ डॉ. विशन सिंह विकल के साथ शाम चार बजे गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सक बीमार मवेशियों को उपचार दे रहे थे। टीकाकरण भी किया जा रहा था। पशु चिकित्सकों ने बताया कि किसी भी मवेशी में खुरपका, मुंहपका या घुड़का जैसे लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने संक्रमित चारे से इंफेक्शन होने की आशंका जताई है। सीडीओ ने लिखित बयान जारी कर गांव में 17 से 21 जनवरी के बीच कुल 15 मवेशियों की मौत की पुष्टि भी की है।
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गांव में अधिकांश लोग खेती के साथ ही पशुपालन करते हैं। बीते 15 दिनों से अचानक भैंस, बछड़े और बकरियां बीमार होने लगीं। ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी खुरपका, मुंहपका और घुड़का की बीमारी से पीड़ित थे। उनका यह भी आरोप है कि न तो बीते कई सालों में मवेशियों का टीकाकरण हुआ और न ही बीमार मवेशियों को उपचार मिल सका। पशुपालकों ने इसकी सूचना 1076 और आपातकालीन पशु चिकित्सा 1962 पर दी लेकिन कई बार फोन के बाद भी पशुपालन विभाग की टीम गांव पहुंची। इससे एक सप्ताह के अंदर उमेश की दो भैंस, मुकेश, विनोद, प्रमोद, गणेश, अजय, लक्ष्मण, रघुबीर, संजय, सर्वेश, राजेंद्र, भूरे, हरिशंकर, निकसन, गजेंद्र पाल, रमेश, बलवंत, अमर सिंह, राहुल और गजेंद्र की एक-एक भैंस की मौत हो चुकी है।
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वहीं प्रमोद का एक बछड़ा, शेर सिंह की चार बकरी एवं बाबूराम पाल का एक बकरा भी बीमारी की चपेट में आकर मर गए। पशुपालकों ने बताया कि मरने वाली कई भैंसों की कीमत 80 हजार से एक लाख रुपये तक थी। इससे गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। गांव के अन्य पशुपालक नाथूराम कुशवाह, राजेंद्र, मुकेश, शिव बालक व रामप्रकाश सहित कई किसानों के पचास से अधिक पशु बीमार हैं। ग्रामीणों ने बीमार पशुओं का इलाज कराने, टीकाकरण कराने एवं मृत पशुओं के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
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बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर जब यह खबर वायरल हुई तो पशु चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर उपचार शुरू किया। पशु चिकित्साधिकारी भाग्यनगर डॉ. बृजभूषण सिंह ने बताया कि गांव में मवेशियों में बीमारी फैलने की किसी ग्रामीण ने जानकारी नहीं दी थी। अभी जानकारी हुई है और बीमार पशुओं के इलाज और टीकाकरण के लिए पशुधन प्रसार अधिकारी अहिवरन सिंह के साथ टीम भेजी जा रही है।
डीएम के आदेश पर पहुंचे सीडीओ और सीवीओ
मवेशियों की मौत की जानकारी होने पर डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के आदेश पर सीडीओ संत कुमार और सीवीओ डॉ. विशन सिंह विकल के साथ शाम चार बजे गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सक बीमार मवेशियों को उपचार दे रहे थे। टीकाकरण भी किया जा रहा था। पशु चिकित्सकों ने बताया कि किसी भी मवेशी में खुरपका, मुंहपका या घुड़का जैसे लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने संक्रमित चारे से इंफेक्शन होने की आशंका जताई है। सीडीओ ने लिखित बयान जारी कर गांव में 17 से 21 जनवरी के बीच कुल 15 मवेशियों की मौत की पुष्टि भी की है।