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अहंकारी व्यक्ति कभी भी ब्रह्म को नहीं पा सकता है
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अजीतमल (औरैया)। अहंकारी व्यक्ति को प्रभु को पाने का लाख प्रयत्न करे पर भगवान उस पर कभी कृपा नहीं करते हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए मन और आत्मा का पवित्र होना जरूरी है।
आजाद नगर में प्राथमिक विद्यालय के सामने कथा में वृंदावन के डॉ. अनुरूद्ध महाराज ने बताया कि भगवान को पाने के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं है, वह तो भाव देखकर स्वयं ही दौड़े चले आते हैं। प्रभु को अहंकारी कभी प्राप्त नहीं कर सकता और अहंकार दूर करने के लिए प्रभु अनेक लीलायें करते हैं। बताया कि जब इंद्र को अभिमान हो गया तो भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्द्धन को अपनी उंगली पर धारण करके इंद्र का अभिमान दूर कर गोवर्द्धन का मान बढ़ाया।
जब रुक्मिणी ने सुंदरता के अभिमान सेे प्रभु को अपने वशीभूत समझ लिया तो भगवान ने लीला रचकर उनका अभिमान तोड़ा। हमें प्रकृति की, गो की, नारी शक्ति की और धरती की रक्षा करनी है। आयोजक संजय कुमार, चंद्रकुमार, एवं अखिलेश कुमार अग्रवाल ने लोगों से कथा का रसपान करने का आग्रह किया है। व्यवस्था नवीन गुप्ता, कुक्कू, रमन यादव, शैलेंद्र दुबे, पुनीत दीक्षित, बंटू गुप्ता, राघवेंद्र एवं राजू अग्रवाल आदि संभाल रहे हैं।
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-मन और आत्मा का पवित्र होना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
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आजाद नगर में प्राथमिक विद्यालय के सामने कथा में वृंदावन के डॉ. अनुरूद्ध महाराज ने बताया कि भगवान को पाने के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं है, वह तो भाव देखकर स्वयं ही दौड़े चले आते हैं। प्रभु को अहंकारी कभी प्राप्त नहीं कर सकता और अहंकार दूर करने के लिए प्रभु अनेक लीलायें करते हैं। बताया कि जब इंद्र को अभिमान हो गया तो भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्द्धन को अपनी उंगली पर धारण करके इंद्र का अभिमान दूर कर गोवर्द्धन का मान बढ़ाया।
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जब रुक्मिणी ने सुंदरता के अभिमान सेे प्रभु को अपने वशीभूत समझ लिया तो भगवान ने लीला रचकर उनका अभिमान तोड़ा। हमें प्रकृति की, गो की, नारी शक्ति की और धरती की रक्षा करनी है। आयोजक संजय कुमार, चंद्रकुमार, एवं अखिलेश कुमार अग्रवाल ने लोगों से कथा का रसपान करने का आग्रह किया है। व्यवस्था नवीन गुप्ता, कुक्कू, रमन यादव, शैलेंद्र दुबे, पुनीत दीक्षित, बंटू गुप्ता, राघवेंद्र एवं राजू अग्रवाल आदि संभाल रहे हैं।
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-मन और आत्मा का पवित्र होना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो