उस मनहूस सुबह से इंसाफ तक की दास्तां

दिनेश शर्मा/नोएडा Updated Tue, 26 Nov 2013 12:35 PM IST
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16 मई 2008 को सुबह साढ़े सात बजे एक फोन आया। पता चला कि एल-32 सेक्टर-25 में रहने वाले एक डॉक्टर के फ्लैट में उनकी बेटी का मर्डर हो गया है। सूचना मिलते ही यह संवाददाता मौके पर पहुंच गया। फ्लैट दूसरी मंजिल पर था। नीचे पुलिस का जमावड़ा था।
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आमतौर पर हर घटनास्थल पर क्राइम रिपोर्टर पहुंच कर सीन ऑफ क्राइम देखता है। पुलिस भी उसे नहीं रोकती है। लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ।
जब संवाददाता सीढ़ियों पर चढ़ कर फ्लैट की तरफ चलने लगा तो फर्स्ट फ्लोर पर मौजूद सिपाहियों ने रोक लिया। कहा कि एएसपी अखिलेश कुमार ने मीडिया को ऊपर जाने से मना किया है। इस बात पर अन्य अखबारों के रिपोर्टरों की भी बहस हुई।
घटनास्थल पर मौजूद एसपी सिटी महेश मिश्र ने भी मीडिया को रोकने का आदेश दिया। हंगामा हुआ तो बताया कि डॉक्टर की बेटी का कत्ल घर के ही नौकर हेमराज ने किया है। जो घटना के बाद से फरार है।

मोबाइल बंद आ रहा है। उसकी तलाश में एक टीम नेपाल भेजी जा रही है। एसपी सिटी ने आरुषि व कथित तौर पर फरार नौकर हेमराज की फाइल फोटो मीडिया को दे दी। इस दौरान सूचना पाकर मौके पर पहुंचे डॉ. तलवार के परिजन, परिचित व सेक्टर के अन्य लोग मीडिया को देख भड़कने लगे।

मीडिया को हटाने की कोशिशें जारी रहीं, लेकिन संवाददाता व अन्य अखबारों के रिपोर्टरों को पुलिस की सख्ती व परिजनों के रवैये और नौकरानी भारती का बयान सुन कर कुछ बातों को छुपाने की पुरजोर कोशिशें होने की शंका हुई।

शाम तक मीडिया का जमावड़ा लगा रहा और इस दौरान एएसपी अखिलेश कुमार ने घटनास्थल यानी आरुषि के कमरे की धुलाई करवा दी। गद्दे छत पर रखवा दिए। अचानक पता चला कि राजेश तलवार बेटी की चिता की राख लेकर हरिद्वार जा रहे हैं। चंद घंटे बाद ही चिता की राख लेकर हरिद्वार जाने की बात भी संवाददाता के गले नहीं उतरी।

पुलिस अधिकारियों से सवाल-जवाब शुरू हुए तो उन्होंने ऊपरी दबाव का दर्द बयां किया। पुलिस ने राजेश तलवार को रास्ते से लौट कर आने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं लौटे।

इसके बाद सुबह अचानक शहर के एक नामी आंखों के अस्पताल के मालिक के साथ रिटायर्ड डिप्टी एसपी के. के. गौतम आरुषि के फ्लैट पर पहुंचे और जांच पड़ताल करने के साथ सीढ़ियों पर खून के दाग देख कर छत के उस दरवाजे तक पहुंच गए, जिसके पीछे हेमराज का शव था।

दरवाजा खुलवाने के लिए रिटायर्ड डिप्टी एसपी ने पुलिस को बुलाया। थानाध्यक्ष ने डॉक्टर तलवार के परिजनों से चाबी मांगी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने ताला तोड़ कर दरवाजा खोला तो सामने कूलर में हेमराज की लाश देखी। इसके बाद केस का रुख ही बदल गया।

सामान्य हत्याकांड देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन गई। मीडिया ट्रायल शुरू हो गया। तलवार दंपति अपनी पहुंच के बल पर कानूनी दांवपेच का खेल खेलने लगे।

मीडिया पर भी बैन लगाने के लिए अदालत से गुहार लगाई, लेकिन उनकी हर रणनीति दम तोड़ती नजर आई और आज तलवार दंपति बेटी व नौकर की हत्या के दोषी करार दे दिए गए और सलाखों के पीछे पहुंच गए।

तलवार दंपति व उनके रसूखदार परिचितों ने सोचा था कि मीडिया चंद घंटे बाद घटनास्थल से हट जाएगा और रात के अंधेरे में हेमराज का शव ठिकाने लगा दिया जाएगा लेकिन पुलिस का सीन ऑफ क्राइम देखने के लिए मीडिया को फ्लैट के अंदर न जाने देना और आरुषि के परिजनों व परिचितों का व्यवहार खुद ब खुद तलवार दंपति के गले की फांस बन गया।

इस दौरान यह भी जानकारी मिली की घटना के बाद से केंद्र के एक बड़े अधिकारी का दबाव लगातार नोएडा पुलिस पर था। बाद में सीबीआई पर भी उस अधिकारी का दबाव रहा था।
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