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Amroha News: पाकिस्तान पर मिली विजय 52 साल बाद भी रोमांचित कर देती है
Sat, 16 Dec 2023 01:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 16 Dec 2023 01:18 AM IST
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मंडी धनौरा। सन 1971 में पाकिस्तान से हुई लड़ाई में लोंगोवाल सेक्टर में तैनात रहे कर्नल सूरज त्यागी आज भी उस लम्हे को याद कर रोमांचित हो उठते हैं। उनका कहना है कि 16 दिसंबर 1971 को युद्ध में पाकिस्तान की पराजय की जानकारी मिलते ही सभी सैनिक व फौजी अफसर खुशी में नाचने लगे थे। फोन पर युद्ध की घटना के बारे में बताते हुए सूरज त्यागी की आवाज बेहद कड़क नजर आ रही थी।
क्षेत्र के गांव चुचैला कलां निवासी सूरज त्यागी भारतीय फौज में सेकंड लेफ्टिनेंट बतौर भर्ती हुए थे। उनका सारा परिवार पढ़ा लिखा था और सूरज त्यागी का शुरू से ही फौजी अफसर बनने का सपना था। वर्ष 1998 में फौज से कर्नल के पद से रिटायर हुए सूरज त्यागी आजकल परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं। शुक्रवार को उनसे फोन पर सन 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध का जिक्र किया तो जोश में भर उठे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध होने की जानकारी फौजी अफसरों को हो चुकी थी। वह जाट रेजिमेंट थे और उनकी रेजिमेंट की पोस्टिंग लोंगोवाल सेक्टर में थी। उन्होेंने बताया कि इंडियन आर्मी के अफसरों को अनुमान था कि पाकिस्तानी फौज पंजाब की ओर से अटैक करेगी लेकिन उन्होंने तीन दिसंबर की रात को राजस्थान के जैसलमेर से अटैक शुरू किया। अनुमान के विपरीत पाकिस्तानी फौज के हमले से इंडियन आर्मी ने दूसरी रणनीति बनाई। चार दिसंबर की तड़के से ही भारतीय वायुसेना हरकत में आ गई थी। सेवानिवृत कर्नल सूरज त्यागी ने बताया कि भारतीय सैनिकों ने लोेंगोवाल सेक्टर में पाकिस्तान के 45 टैंक नष्ट कर दिए थे और तमाम बख्तरबंद वाहन नष्ट कर दिए थे। पाकिस्तानी फौज को इतने करारे जवाब की उम्मीद नहीं थी। चार दिसंबर को ही पाकिस्तान की बाड़मेर सेक्टर की पोस्ट पर कब्जा कर भारतीय सैनिक 10 किलोमीटर भीतर तक घुस गए थे। उन्होंने बताया कि हमारी रेजिमेंट ने काफी दूर तक पाकिस्तानी सैनिकों का पीछा किया लेकिन वे भागने में कामयाब रहे। कर्नल सूरज त्यागी बताते हैं कि इस युद्ध में इंडियन एयरफोर्स ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया। वह बताते हैं कि 16 दिसंबर को जब पाकिस्तानी सैनिकों के भारतीय जनरल अरोड़ा के समक्ष समर्पण की जानकारी मिली तो युद्ध के मोर्चे पर तैनात भारतीय सैनिक खुशी से झूम उठे और भारत माता की जय के नारे लगाए थे।
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क्षेत्र के गांव चुचैला कलां निवासी सूरज त्यागी भारतीय फौज में सेकंड लेफ्टिनेंट बतौर भर्ती हुए थे। उनका सारा परिवार पढ़ा लिखा था और सूरज त्यागी का शुरू से ही फौजी अफसर बनने का सपना था। वर्ष 1998 में फौज से कर्नल के पद से रिटायर हुए सूरज त्यागी आजकल परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं। शुक्रवार को उनसे फोन पर सन 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध का जिक्र किया तो जोश में भर उठे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध होने की जानकारी फौजी अफसरों को हो चुकी थी। वह जाट रेजिमेंट थे और उनकी रेजिमेंट की पोस्टिंग लोंगोवाल सेक्टर में थी। उन्होेंने बताया कि इंडियन आर्मी के अफसरों को अनुमान था कि पाकिस्तानी फौज पंजाब की ओर से अटैक करेगी लेकिन उन्होंने तीन दिसंबर की रात को राजस्थान के जैसलमेर से अटैक शुरू किया। अनुमान के विपरीत पाकिस्तानी फौज के हमले से इंडियन आर्मी ने दूसरी रणनीति बनाई। चार दिसंबर की तड़के से ही भारतीय वायुसेना हरकत में आ गई थी। सेवानिवृत कर्नल सूरज त्यागी ने बताया कि भारतीय सैनिकों ने लोेंगोवाल सेक्टर में पाकिस्तान के 45 टैंक नष्ट कर दिए थे और तमाम बख्तरबंद वाहन नष्ट कर दिए थे। पाकिस्तानी फौज को इतने करारे जवाब की उम्मीद नहीं थी। चार दिसंबर को ही पाकिस्तान की बाड़मेर सेक्टर की पोस्ट पर कब्जा कर भारतीय सैनिक 10 किलोमीटर भीतर तक घुस गए थे। उन्होंने बताया कि हमारी रेजिमेंट ने काफी दूर तक पाकिस्तानी सैनिकों का पीछा किया लेकिन वे भागने में कामयाब रहे। कर्नल सूरज त्यागी बताते हैं कि इस युद्ध में इंडियन एयरफोर्स ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया। वह बताते हैं कि 16 दिसंबर को जब पाकिस्तानी सैनिकों के भारतीय जनरल अरोड़ा के समक्ष समर्पण की जानकारी मिली तो युद्ध के मोर्चे पर तैनात भारतीय सैनिक खुशी से झूम उठे और भारत माता की जय के नारे लगाए थे।
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