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राष्ट्रीय एकता, भाषा, साहित्य और समाज पर चिंतन

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:45 AM IST
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thoughts exchange on language culture national integration issues
अमरोहा के जेएस हिंदू पीजी कालेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते वक्ता। - फोटो : JPNAGAR
अमरोहा। जेएस हिंदू पीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 21वीं सदी और साहित्यिक विमर्श का शुभारंभ शनिवार को मां सरस्वती वंदना के साथ हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ केपी सिंह ने राष्ट्रीय एकता, भाषा, साहित्य और समाज पर अपना चिंतन प्रस्तुत किया। भूमंडलीकरण के संदर्भ में तीसरी दुनिया के देशों विशेषकर भारत के संदर्भ में प्रकाश डाला।
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नागपुर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशीला टाकभौरे ने दलित, गैर दलितों और दलित लेखन से जुड़े लेखकों के विचारों में मतभेद होने पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने समाज की मुख्य धारा से कटे समाज के उद्धारक डॉ. बीआर आंबेडकर, ज्योतिबा फूले, सावित्री बाई फूले आदि को शोषित, वंचित समाज का उद्धारक और देवता बताया। साथ ही वर्तमान समय में शोषित समाज की समस्याओं को उजागर करने वाले साहित्य सृजन की आवश्यकता पर बल दिया। एसोसिएट प्रोफेसर एसएसबी कॉलेज हापुड़ के डॉ. तिलक सिंह ने वर्तमान साहित्य में समाज में कुली, वेंडर, मजदूर, कूड़ा-कचरा एकत्रित कर अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करते हुए बच्चों, अनाथालयों में जीवन गुजार रहे वृद्धों आदि की समस्याओं को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष बल दिया। उपनिदेशक केंद्रीय भाषा संस्था अहमदाबाद डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण तभी कहलाएगा, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं और कष्टों को प्रतिबंधित करने का प्रयास होगा। मुख्यातिथि कुलपति एमजेपीआरविवि बरेली के प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने संगोष्ठी में प्रस्तुत विविध विषयों दलित, स्त्री, आदिवासी, किसान, दिव्यांग, भारतीय संस्कृति, पत्रकारिता, विज्ञान, सूचना और प्रौद्योगिकी, प्रवासी और अप्रवासी विमर्श पर विस्तार से प्रकाश डाला। समाज को जोड़ने वाले साहित्यिक सृजन एवं शिक्षा में मौलिक चिंतन की अभिवृद्धि पर विशेष बल दिया। पूर्व निदेशक राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज प्रोफेसर बीएन सिंह ने नई आर्थिक नीति और दलितों के समक्ष चुनौतियों पर चिंता प्रकट की और मानववाद को सर्वोपरि माना। कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वो मनुष्य के लिए जीए और मरे। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफेसर बीएन सिंह ने की। इस दौरान डॉ बबलू सिंह, प्राचार्य डॉ. वीबी बरतरिया, डॉ. मनन कौशल, डॉ. संयुक्ता देवी, डॉ संजय शाही, डॉ अनिल रायपुरिया, डॉ निखिल दास, डॉ रमेश चंद, डॉ एसके सिंह, डॉ हिमांशू शर्मा, डॉ मन मोहन सिंह, डॉ अरविंद सिंह, डॉ संगीता धामा, डॉ रश्मि गुप्ता, डॉ वीर वीरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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