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Amroha News: पराली जलाने वालों पर सैटेलाइट से रखी जाएगी नजर
Tue, 26 Sep 2023 01:34 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 26 Sep 2023 01:34 AM IST
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अमरोहा। धान की कटाई शुरू होने से पहले ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। किसान पराली खेतों में न जलाएं, इसके लिए तैयारी कर ली गई है। अब पराली का खाद बनाने के लिए कृषि विभाग जनपद में सात हजार वेस्ट डिकम्पोजर वितरित करेगा। पराली जलाने को लेकर सैटेलाइट के माध्यम से नजर रखी जाएगी। वहीं खेतों में पराली जलाने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार जनपद में लगभग 26 हजार हेक्टेयर धान का रकबा है। आने वाले दिनों जनपद में धान की कटाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में पराली नहीं जलाने के लिए चेताया है। खेतों में पराली जलाए जाने से वायु प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही खेतों की उर्वरता बढ़ाने में सहायक कीट पतंगे भी खेतों में ही जल जाते हैं। इससे बचने के लिए कृषि विभाग जनपद के किसानों को करीब सात हजार वेस्ट डिकम्पोजर वितरित करेगा। जिसके जरिए खेतों में ही पराली की खाद बनाई जा सकेगी।
डिकम्पोजर के इस्तेमाल से कम होगी फसल की लागत
कृषि विभाग का कहना है कि डिकम्पोजर के इस्तेमाल से खेत में ही पराली का खाद तैयार किया जाता है। जोकि खेत में पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति करता है। जिससे फसल में लागत भी कम आती है और उत्पादन अच्छा होता है। धान की पराली के साथ साथ गन्ने की पत्ती को खेतों में गलाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
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ऐसे तैयार होता है मिश्रण
वेस्ट डिकम्पोजर तैयार करने के लिए 200 लीटर पानी में दो किलो ग्राम गुड़ और दो किलो बेसन मिलाकर उसमें वेस्ट डिकम्पोजर डाला जाता है, जिसको मिलाकर अच्छे से मिश्रण तैयार किया जाता है। 48 घंटे के लिए इस मिश्रण को किसी छांव वाले स्थान पर रखा जाता है। बीच-बीच में इसको चलाते रहना चाहिए। 48 घंटे बाद इस मिश्रण का छिड़काव पराली अथवा गन्ने की पत्ती पर कर दिया जाता है, जिसके करीब एक सप्ताह के भीतर पराली अथवा गन्ने की पत्ती खाद के रूप में तब्दील हो जाती है।
खेतों में पराली जलाने के लिए सख्त मनाही है। हालांकि अधिकतर किसान पराली को चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन फिर भी पराली को जलाने के बजाय वेस्ट डिकम्पोजर का इस्तेमाल कर इसको खाद के रूप में इस्तेमाल करना किसानों के लिए लाभदायक होता है। राम प्रवेश, कृषि उपनिदेशक
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कृषि विभाग के अनुसार जनपद में लगभग 26 हजार हेक्टेयर धान का रकबा है। आने वाले दिनों जनपद में धान की कटाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में पराली नहीं जलाने के लिए चेताया है। खेतों में पराली जलाए जाने से वायु प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही खेतों की उर्वरता बढ़ाने में सहायक कीट पतंगे भी खेतों में ही जल जाते हैं। इससे बचने के लिए कृषि विभाग जनपद के किसानों को करीब सात हजार वेस्ट डिकम्पोजर वितरित करेगा। जिसके जरिए खेतों में ही पराली की खाद बनाई जा सकेगी।
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डिकम्पोजर के इस्तेमाल से कम होगी फसल की लागत
कृषि विभाग का कहना है कि डिकम्पोजर के इस्तेमाल से खेत में ही पराली का खाद तैयार किया जाता है। जोकि खेत में पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति करता है। जिससे फसल में लागत भी कम आती है और उत्पादन अच्छा होता है। धान की पराली के साथ साथ गन्ने की पत्ती को खेतों में गलाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
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ऐसे तैयार होता है मिश्रण
वेस्ट डिकम्पोजर तैयार करने के लिए 200 लीटर पानी में दो किलो ग्राम गुड़ और दो किलो बेसन मिलाकर उसमें वेस्ट डिकम्पोजर डाला जाता है, जिसको मिलाकर अच्छे से मिश्रण तैयार किया जाता है। 48 घंटे के लिए इस मिश्रण को किसी छांव वाले स्थान पर रखा जाता है। बीच-बीच में इसको चलाते रहना चाहिए। 48 घंटे बाद इस मिश्रण का छिड़काव पराली अथवा गन्ने की पत्ती पर कर दिया जाता है, जिसके करीब एक सप्ताह के भीतर पराली अथवा गन्ने की पत्ती खाद के रूप में तब्दील हो जाती है।
खेतों में पराली जलाने के लिए सख्त मनाही है। हालांकि अधिकतर किसान पराली को चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन फिर भी पराली को जलाने के बजाय वेस्ट डिकम्पोजर का इस्तेमाल कर इसको खाद के रूप में इस्तेमाल करना किसानों के लिए लाभदायक होता है। राम प्रवेश, कृषि उपनिदेशक