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Amroha News: इनके हाथों में मोबाइल है, इन्हें वक्त कहां...
Tue, 18 Feb 2025 02:26 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 18 Feb 2025 02:26 AM IST
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अमरोहा। अरबाबे दबिस्तान-ए-अमरोहा के संयोजन में मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक गजलें सुनाकर समां बांध दिया।
रविवार रात मोहल्ला बगला स्थित एवान-ए-अंदाज मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन गजलें सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद हासिल की। जुनैद अकरम फारूकी ने सुनाया, खून का जायका है दूध से बढ़कर, अब ये आस्तीनों से पिटारे में नहीं आएंगे। अनीस अमरोहवी ने पढ़ा, इनके हाथों में मोबाइल है इन्हें वक्त कहां, आज के बच्चे गुब्बारे में नहीं आएंगे। मुब्शशिर गौरी ने पढ़ा, मोहब्बत के खसारे में नहीं आएंगे, दिल में आएंगे तुम्हारे में नहीं आएंगे।
माइल आफंदी ने पढ़ा, और कुछ जीस्त के सफहात अता हों माइल, इतने गम एक शुमारे में नही आएंगे। नासिर अमरोहवी ने पढ़ा, गर रिसाले में तेरे जुल्म-ओ-सितम छापे हम, सब के सब एक शुमारे में नहीं आएंगे। मेहरबान अमरोहवी ने पढ़ा, छोड़ दूं दूर रहूं उनसे ताअल्लुक न रखूं, ये ख्याल आपके बारे में नहीं आएंगे। नाजिश मुस्तफा ने ऐसे पढ़ा, किसी मुल्ला, किसी पंडित को दिखा लो चाहे, इश्क के भूत उतारे में नही आएंगे। मुशायरे में इनके अलावा शीबान कादरी, नुदरत नवाज, नफीस अहमद, नीरज नवीद, शाह फजल आदि शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता जुनैद अकरम फारूकी ने तथा संचालन डाॅ.नासिर अमरोहवी ने किया। इस दौरान नफीस अहमद मौजूद रहे।
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रविवार रात मोहल्ला बगला स्थित एवान-ए-अंदाज मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन गजलें सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद हासिल की। जुनैद अकरम फारूकी ने सुनाया, खून का जायका है दूध से बढ़कर, अब ये आस्तीनों से पिटारे में नहीं आएंगे। अनीस अमरोहवी ने पढ़ा, इनके हाथों में मोबाइल है इन्हें वक्त कहां, आज के बच्चे गुब्बारे में नहीं आएंगे। मुब्शशिर गौरी ने पढ़ा, मोहब्बत के खसारे में नहीं आएंगे, दिल में आएंगे तुम्हारे में नहीं आएंगे।
माइल आफंदी ने पढ़ा, और कुछ जीस्त के सफहात अता हों माइल, इतने गम एक शुमारे में नही आएंगे। नासिर अमरोहवी ने पढ़ा, गर रिसाले में तेरे जुल्म-ओ-सितम छापे हम, सब के सब एक शुमारे में नहीं आएंगे। मेहरबान अमरोहवी ने पढ़ा, छोड़ दूं दूर रहूं उनसे ताअल्लुक न रखूं, ये ख्याल आपके बारे में नहीं आएंगे। नाजिश मुस्तफा ने ऐसे पढ़ा, किसी मुल्ला, किसी पंडित को दिखा लो चाहे, इश्क के भूत उतारे में नही आएंगे। मुशायरे में इनके अलावा शीबान कादरी, नुदरत नवाज, नफीस अहमद, नीरज नवीद, शाह फजल आदि शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता जुनैद अकरम फारूकी ने तथा संचालन डाॅ.नासिर अमरोहवी ने किया। इस दौरान नफीस अहमद मौजूद रहे।
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