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Amroha News: पत्नी करती रहीं मिन्नतें, गिड़गिड़ाते रहे मासूम बच्चे, नहीं पसीजे हमलावर
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अमरोहा के मोहल्ला नल नई बस्ती में घर के बाहर परिजनों के साथ बैठे मृतक के बच्चे। संवाद
अमरोहा। वो सात थे और चाचा (राशिद) अकेले...बाइक से कार छू जाने भर के बदले सातों ऐसे टूटे कि देखते-देखते राशिद बेसुध होकर जमीन पर गिर गए। उन्हें बचाने की कोशिशें कामयाब न होती देख चाची (रुखसार) उनके आगे हाथ जोड़कर मिन्नतें करने लगीं, मासूम बच्चे गिड़गिड़ाते रहे मगर बेरहम हमलावरों को न बच्चों पर तरस आया और न रुखसार की रुलाई उन्हें पिघला सकी। राशिद को गिरा-गिरा कर तब तक लात-घूंसे बरसाए, जब तक वह दम तोड़ने की नौबत तक नहीं पहुंच गए।
यह कहना है 22 वर्षीय सलमान का, जो वारदात के समय अपने चाचा न्यायिककर्मी राशिद हुसैन के साथ कार में सवार थे। राशिद की पत्नी रुखसार (35) और बेटी मायरा (04), बेटा आरिश (08) और अम्माद (02) भी सफर में उनके संग थे। सभी खुशी-खुशी रुखसार के चाचा के घर जाने के इरादे से निकले थे। वारदात के बाद से रुखसार के आंसू थम नहीं रहे हैं। अपनी आंखों के सामने पति की जान जाती देखने के बाद से रुखसार की आवाज नहीं निकल रही। सिर्फ रुलाई फूट रही है। सहारा दे रहीं महिलाएं कह रही थीं ...देखते-देखते रुखसार की दुनिया उजड़ गई।
पूरे वाकये के चश्मदीद राशिद के भतीजे सलमान (22) सदमे में हैं। रुंधे गले और लड़खड़ाती आवाज में पुलिस को बताया कि मामूली सी बात पर बाइक सवारों ने कार चला रहे राशिद को गर्दन पकड़कर ड्राइविंग सीट से बाहर खींच लिया। दोनों बाइक सवार और उनके साथ आए रिश्तेदार राशिद पर टूट पड़े। उन्हें बचाने की कोशिश नाकाम हुईं तो रुखसार ने सुहाग का हवाला दिया। हाथ जोड़कर शौहर को छोड़ने की गुहार लगाई लेकिन हमलावरों पर मानो खून सवार था। पत्नी व तीनों बच्चों की चीखें और मिन्नतें नजरअंदाज करके वे बेरहम हमले करते रहे। बेसुध होकर गिर जाने पर ही राशिद को छोड़ा। करीब आधे घंटे हमलावरों ने मनमानी की और फिर वे बेखौफ अंदाज से बाइकें दौड़ाकर चले गए।
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खुशी की खिलखिलाहट चीखों में तब्दील
सलमान ने बताया कि राशिद हुसैन पांच भाइयों में चौथे नंबर के थे। साल 2015 से अदालत में क्लर्क के रूप में उनकी नौकरी शुरू हुई थी। रिश्तेदारी में जाने के लिए सारे लोग खुशनुमा माहौल में कार से निकले थे। परिवार साथ होने से रास्ते में कार सवार बच्चों की चुलबुली बातों के बीच परिवार की खिलखिलाहट भी गूंज रही थी। किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि कुछ समय बाद खुशियों की गूंज चीखों में बदल जाएगी।
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छोड़ दो मेरे शौहर को...पर बेरहम नहीं माने
सलमान ने बताया कि हमलावरों के आगे हाथ जोड़कर मिन्नतें कर रहीं चाची बार-बार कह रही थीं कि मेरे शौहर को छोड़ दो...। उनकी चीखें-चिल्लाहट न हमलावरों का रुख बदल सकीं और न राशिद का बचाव हो सका। सब कुछ मिटाकर ही हमलावरों के वार रुके।-- -- -
अंकल पापा को छोड़ दो
जिस वक्त हमलावर राशिद को निशाना बनाकर लात-घूंसे बरसा रहे थे तो कार से निकलकर परिवार का हर सदस्य उन्हें बचाने के प्रयास कर रहा था। राशिद का छोटा बेटा अम्माद रुखसाना की गोद में था। सलमान ने बताया कि उस मासूम ने भी गुहार लगाई कि अंकल पापा को छोड़ दो...लेकिन वे नहीं माने।
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यह कहना है 22 वर्षीय सलमान का, जो वारदात के समय अपने चाचा न्यायिककर्मी राशिद हुसैन के साथ कार में सवार थे। राशिद की पत्नी रुखसार (35) और बेटी मायरा (04), बेटा आरिश (08) और अम्माद (02) भी सफर में उनके संग थे। सभी खुशी-खुशी रुखसार के चाचा के घर जाने के इरादे से निकले थे। वारदात के बाद से रुखसार के आंसू थम नहीं रहे हैं। अपनी आंखों के सामने पति की जान जाती देखने के बाद से रुखसार की आवाज नहीं निकल रही। सिर्फ रुलाई फूट रही है। सहारा दे रहीं महिलाएं कह रही थीं ...देखते-देखते रुखसार की दुनिया उजड़ गई।
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पूरे वाकये के चश्मदीद राशिद के भतीजे सलमान (22) सदमे में हैं। रुंधे गले और लड़खड़ाती आवाज में पुलिस को बताया कि मामूली सी बात पर बाइक सवारों ने कार चला रहे राशिद को गर्दन पकड़कर ड्राइविंग सीट से बाहर खींच लिया। दोनों बाइक सवार और उनके साथ आए रिश्तेदार राशिद पर टूट पड़े। उन्हें बचाने की कोशिश नाकाम हुईं तो रुखसार ने सुहाग का हवाला दिया। हाथ जोड़कर शौहर को छोड़ने की गुहार लगाई लेकिन हमलावरों पर मानो खून सवार था। पत्नी व तीनों बच्चों की चीखें और मिन्नतें नजरअंदाज करके वे बेरहम हमले करते रहे। बेसुध होकर गिर जाने पर ही राशिद को छोड़ा। करीब आधे घंटे हमलावरों ने मनमानी की और फिर वे बेखौफ अंदाज से बाइकें दौड़ाकर चले गए।
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खुशी की खिलखिलाहट चीखों में तब्दील
सलमान ने बताया कि राशिद हुसैन पांच भाइयों में चौथे नंबर के थे। साल 2015 से अदालत में क्लर्क के रूप में उनकी नौकरी शुरू हुई थी। रिश्तेदारी में जाने के लिए सारे लोग खुशनुमा माहौल में कार से निकले थे। परिवार साथ होने से रास्ते में कार सवार बच्चों की चुलबुली बातों के बीच परिवार की खिलखिलाहट भी गूंज रही थी। किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि कुछ समय बाद खुशियों की गूंज चीखों में बदल जाएगी।
छोड़ दो मेरे शौहर को...पर बेरहम नहीं माने
सलमान ने बताया कि हमलावरों के आगे हाथ जोड़कर मिन्नतें कर रहीं चाची बार-बार कह रही थीं कि मेरे शौहर को छोड़ दो...। उनकी चीखें-चिल्लाहट न हमलावरों का रुख बदल सकीं और न राशिद का बचाव हो सका। सब कुछ मिटाकर ही हमलावरों के वार रुके।
अंकल पापा को छोड़ दो
जिस वक्त हमलावर राशिद को निशाना बनाकर लात-घूंसे बरसा रहे थे तो कार से निकलकर परिवार का हर सदस्य उन्हें बचाने के प्रयास कर रहा था। राशिद का छोटा बेटा अम्माद रुखसाना की गोद में था। सलमान ने बताया कि उस मासूम ने भी गुहार लगाई कि अंकल पापा को छोड़ दो...लेकिन वे नहीं माने।

अमरोहा के मोहल्ला नल नई बस्ती में घर के बाहर परिजनों के साथ बैठे मृतक के बच्चे। संवाद