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Amroha News: आंधी ले उड़ी बागवानों के सपने...आम के ढेर जमीं पर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 02:08 AM IST
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The storm swept away the dreams of the gardeners...piles of mangoes lying on the ground
- इस सीजन में अब तक आ चुकीं छह आंधियों से 40 प्रतिशत उपज बर्बाद
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अनिल चौहान



अमरोहा। इस गर्मी में मौसम का बार-बार बदलता रुख आम लोगों को भले ही तपिश की लगातार मार से बचा रहा है लेकिन इस मौसमी बदलाव का कारण बन रहीं आंधियां आम की उपज पर भारी पड़ रही हैं। गर्मी की शुरुआत के बाद बुधवार तक अमरोहा जिले में व आसपास छह बार आंधी आ चुकी है। बाग स्वामियों और बाग के रखवालों ने इन आंधियों से अब तक जिले में आम की 40 फीसदी फसल को नुकसान होने का अनुमान जताया है। फल उद्यान और कृषि विभाग का कहना है कि इसकी गणना कराई जा रही है। बुधवार की सुबह हवा के साथ बूंदाबांदी से हुई। राम में आंधी भी आई। एक दिन पहले मंगलवार को जिले ने तेज आंधी का सामना किया। मंगलवार की आंधी में हवा की तेजी उम्मीद से ज्यादा थी। काली घटाओं के बीच आसमान से तेज बौछारें भी पड़ीं। इससे हरे-भरे बागान में पेड़ों से टपके आमों के ढेर जमीन पर लग गए।
बुधवार को जिले की कई मंडियों में कच्चे हरे आमों के ढेर नजर आए। तादाद ज्यादा होने से इन कच्चे आमों को मंडियों में माकूल कीमत नहीं मिली, जिसे बाग स्वामी ठीकठाक नुकसान बता रहे हैं। यह तात्कालिक नुकसान बड़े घाटे की शुरुआत इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि यही आम पकने के बाद अमरोहा की ब्रांडिंग के साथ देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंचते। बढ़िया कीमतें बाग के रखवालों से लेकर बाग स्वामियों तक की आमदनी का बड़ा जरिया बनतीं। बागवान बोले, अच्छी कमाई के सपने आंधियां उड़ा ले गईं। (संवाद)
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मौसम अनुकूल रहने से बंपर पैदावार की थी आस

बागवानों ने बताया कि मौसमी चक्र ठीक रहने और स्थानीय जलवायु अनुकूल होने से इस वर्ष पेड़ों पर समय से बौर छा गया था। कुछ समय बाद पहले अमिया और फिर कच्चे आम पेड़ों पर लदे नजर आ रहे थे। एकाएक आंधियों का दौर आने से पकने से पहले आम की बंपर फसल धराशायी होती नजर आ रही है।
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अब पकने के मुहाने पर है आम

बाग मालिक धर्मपाल सिंह का कहना है कि इन दिनों आम में मामूली गुठली पड़नी शुरू हो गई है। कुछ सप्ताह में आम की फसल पककर तैयार हो जाती लेकिन इससे पहले ही फसल का बड़ा हिस्सा आंधी की भेंट चढ़ गया। अब मंडियों में कच्चे आम के ढेर लग गए हैं, जिनके खरीदार नहीं हैं।

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भविष्य के मौसम से बची फसल की भी चिंता

आम कारोबारी महेश सिंह ने बताया कि गिरे हुए आम केवल सब्जी या चटनी के उपयोग में ही आ सकते हैं। आंधी में बेतादाद कच्चा आम टूटकर गिरने से मंडियों में ढेर ही ढेर नजर आ रहे हैं। कच्चे आम की सही कीमत नहीं मिल रही। पेड़ों पर बचे आमों को आने वाले दिनों की आंधियों से खतरा चिंता में डाले हुए है।

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जिले में 12 हजार हेक्टेयर में बाग



कार्यवाहक जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार के मुताबिक अमरोहा जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर आम के बाग हैं। बार-बार आंधी आने से आम की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इससे पिछले साल की तुलना में जिले में आम उत्पादन घट सकता है। बीते वर्ष जिले में एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा आम का उत्पादन हुआ था।



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हसनपुर समेत कई इलाकों में समृद्ध बागवानी

अमरोहा जिले में हसनपुर और आसपास का इलाका बागों की बेल्ट कहा जाता है। इसके अलावा सलेमपुर, कांकर सराय, अकबरपुर पट्टी, पचौकरा, भजनपुरी, नौगावां सादात, एबजाबाद, ड्योढ़ी वाजिदपुर समेत कुछ अन्य इलाकों में भी आम की बागवानी काफी समृद्ध है। इन इलाकों में पैदा होने वाला आम दूसरे देशों तक भी जाता है।

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दुबई से मिला है 20 टन आम का ऑर्डर



यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने बताया कि अमरोहा का आम कई देशों तक जाता है। सऊदी अरब, कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजाह, ओमान, सिंगापुर, मलयेशिया, अबुधाबी, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, इटली, स्पेन, जर्मनी, हॉलैंड और लंदन तक भारतीय आम का निर्यात होता है। सिद्दीकी के मुताबिक इस सीजन के लिए अब तक 250 टन आम का ऑर्डर दुबई से मिल चुका है।


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यही हाल रहा तो आम नहीं रहेगा आम

इस सीजन में बागों की रौनक देखकर अनुमान लगाया जा रहा था कि आम की अच्छी उपज आम घरों तक दशहरी, लंगड़ा आदि का स्वाद कम कीमत पर पहुंचाने में मददगार होगी। जल्दी-जल्दी आंधियों से आम की उपज को मिले झटके से अब पका हुआ आम बाजार में इफरात से नजर आने की उम्मीद घटी है। ऐसा हुआ तो आम इंसान के लिए आम महंगा पड़ेगा।



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