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Amroha News: बरसती है स्कूलों की छतें, कभी टपकता पानी तो कभी मलबा
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गजरौला। परिषदीय विद्यालयों का गजरौला ब्लॉक में भी हाल बदहाल है। यहां के स्कलों की स्थिति भी वैसी ही है, जैसी जिले के दूसरे स्थानों पर है। स्कूलों के भवनों की स्थिति ठीक नही है। कई भवन समय से पहले ही खस्ताहाल हो चुके हैं तो कई स्कूलों में फर्नीचर के अभाव में नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूलों के शौचालयों की स्थिति बेहद अच्छी नहीं है। साफ-सफाई के अभाव में बच्चे व शिक्षक इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। स्कूली मैदानों में कीचड़ भर जाने के कारण बच्चों को खेलने की सुविधा भी नहीं मिल पाती। परिषदीय स्कूलों की बुनियादी शिक्षा को भले ही विभाग बेहतर बनाने के दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी कोसो दूर है। शुक्रवार को की गई पड़ताल में स्कूलों यह हालत देखने को मिली। इन स्कूलों पर जनप्रतिनिधियों के साथ ही विभाग के अफसरों का ध्यान नहीं है। --
संविलियन कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में 323 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां पर इंचार्ज अध्यापिका अनीता पाल समेत 10 शिक्षिकाओं का स्टाफ है। एक शिक्षामित्र भी है। विद्यालय में नौ कमरे हैं। जिनमें दो जर्जर हो चले हैं। बच्चों के खेलने के लिए जो मैदान है, उसमें हलकी बारिश में भी पानी भर जाता है। बैठने के लिए पर्याप्त बैंच नहीं होने के कारण कुछ बच्चे नीचे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापिका का कहना है कि बैंच कम हैं। इस बारे में विभाग के अफसरों को अवगत करा दिया गया है। लेकिन अभी तक फर्नीचर उपलब्ध नहीं हो सका है।
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केस-2
भंडार गृह की छत से टपक रहा पानी, किताब बचाने को लगाई पॉलिथीन
संविलियन विद्यालय गजरौला में 21 कमरे बने हैं। यहां पर 453 बच्चों का नामांकन है। स्कूल में राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित प्रधानाध्यापिका रेखा रानी समेत 19 का स्टाफ है, जिनमें चार महिला शिक्षामित्र और दो पुरुष शिक्षक शामिल हैं। विद्यालय के आठ कमरे जर्जर हालत में हैं। इसी विद्यालय के एक कमरे में जिले का पुस्तक भंडार गृह भी है, जिसमें जिले के विद्यालयों को वितरण होने वाली पुस्तके रखी जाती हैं। बारिश में भंडार गृहकी छत टपकती है। दीवारों में भी सीलन साफ दिखाई देने लगी है। यहां किताबों को भीगने से बचाने के लिए दीवारों पर पॉलिथीन लगा रखी है। किताब भी पॉलिथीन से ढकी हैं। खेलने के मैदान में पानी भर जाने से बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि मैदान में मिट्टी का भराव डालने, टाइल्स बिछाने के लिए पालिका को कई बार लिखा गया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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केस-3
संकरे कमरे में नीचे बैठने को मजबूर छात्र
संविलियन विद्यालय तिगरिया खादर में इंचार्ज अध्यापक डॉ. पृथी सिंह समेत नौ का स्टाफ है। यहां पर छह महिला शिक्षिकाएं, एक महिला शिक्षामित्र और एक पुरुष शिक्षामित्र का स्टाफ है। यहां पर छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सात कमरे हैं। जो छात्र संख्या के हिसाब से काफी कम हैं। मजबूरी में कुछ बच्चे बेहद संकरे और गलियारा जैसे कमरे में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। जिसमें चार या पांच बैंच भी नहीं आ सकतीं। इसके अलावा कक्षा 1 व 2 के बच्चे नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। स्कूल में कमरों की संख्या कितनी कम है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि जगह कम होने के कारण कुछ बैंच जर्जर कमरे में रखनी पड़ी हैं। डॉ.पृथी सिंह का कहना है कि बैंच के लायक स्थान नहीं है। शौचालय का दरवाजा भी ठीक नही है। साथ ही उनमें गंदगी भी पसरी हुई है। शिक्षकों के अनुसार गांव के लोग छत कूद कर अंदर आ जाते हैं। जिनके कारण शौचालयों में गंदगी रहती है।
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केस-4
सुल्तानठेर के विद्यालय के कमरों की छत से टपकता है पानी
प्रधानाध्यापक संजीव कुमार की आत्महत्या के बाद चर्चा में आया संविलियन विद्यालय सुल्तानठेर में 404 छात्र संख्या है। आत्महत्या के बाद कोई भी यहां का चार्ज लेना नहीं चाहता था। साथ ही ग्रामीण भी अपने बच्चों को भेजने से कतराने लगे थे। बीते साल प्रदीप कुमार को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक बनाया गया था। उनका तबादला होने के बाद ज्योति चौधरी प्रधानाध्यापिका हैं। उनके समेत 11 का स्टाफ है। स्कूल में 18 कमरे हैं। लेकिन बरसात के मौसम में सभी की छत से पानी टपकता है। बारिश में बच्चों और खुद को भीगने से बचाने में स्टाफ के पसीने छूट जाते हैं। गांव का पानी भी स्कूल के परिसर में भर जाता है। इसके अलावा स्कूल की दीवार भी ढह गई। बैठने के लिए बैंच पर्याप्त नहीं होने के कारण कक्षा-3, 4 और 5 के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापिका ज्योति चौधरी का कहना है कि घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों काे स्कूल में भेजने के लिए राजी किया। यहां पर बिजली की समस्या है। 15 दिन पहले काटा गया कनेक्शन अभी तक नहीं जोड़ा जा सका है।
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कुछ स्कूलों में भवन जर्जर हैं। उनको ध्वस्त कराकर नया निर्माण कराया जाएगा। जिनमें जगह कम है, उनको दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए जमीन तलाश की जाएगी। बैठने के लिए बैंच मंगाई जाएंगी।- आरती गुप्ता, बीईओ, गजरौला
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संविलियन कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में 323 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां पर इंचार्ज अध्यापिका अनीता पाल समेत 10 शिक्षिकाओं का स्टाफ है। एक शिक्षामित्र भी है। विद्यालय में नौ कमरे हैं। जिनमें दो जर्जर हो चले हैं। बच्चों के खेलने के लिए जो मैदान है, उसमें हलकी बारिश में भी पानी भर जाता है। बैठने के लिए पर्याप्त बैंच नहीं होने के कारण कुछ बच्चे नीचे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापिका का कहना है कि बैंच कम हैं। इस बारे में विभाग के अफसरों को अवगत करा दिया गया है। लेकिन अभी तक फर्नीचर उपलब्ध नहीं हो सका है।
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केस-2
भंडार गृह की छत से टपक रहा पानी, किताब बचाने को लगाई पॉलिथीन
संविलियन विद्यालय गजरौला में 21 कमरे बने हैं। यहां पर 453 बच्चों का नामांकन है। स्कूल में राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित प्रधानाध्यापिका रेखा रानी समेत 19 का स्टाफ है, जिनमें चार महिला शिक्षामित्र और दो पुरुष शिक्षक शामिल हैं। विद्यालय के आठ कमरे जर्जर हालत में हैं। इसी विद्यालय के एक कमरे में जिले का पुस्तक भंडार गृह भी है, जिसमें जिले के विद्यालयों को वितरण होने वाली पुस्तके रखी जाती हैं। बारिश में भंडार गृहकी छत टपकती है। दीवारों में भी सीलन साफ दिखाई देने लगी है। यहां किताबों को भीगने से बचाने के लिए दीवारों पर पॉलिथीन लगा रखी है। किताब भी पॉलिथीन से ढकी हैं। खेलने के मैदान में पानी भर जाने से बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि मैदान में मिट्टी का भराव डालने, टाइल्स बिछाने के लिए पालिका को कई बार लिखा गया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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केस-3
संकरे कमरे में नीचे बैठने को मजबूर छात्र
संविलियन विद्यालय तिगरिया खादर में इंचार्ज अध्यापक डॉ. पृथी सिंह समेत नौ का स्टाफ है। यहां पर छह महिला शिक्षिकाएं, एक महिला शिक्षामित्र और एक पुरुष शिक्षामित्र का स्टाफ है। यहां पर छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सात कमरे हैं। जो छात्र संख्या के हिसाब से काफी कम हैं। मजबूरी में कुछ बच्चे बेहद संकरे और गलियारा जैसे कमरे में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। जिसमें चार या पांच बैंच भी नहीं आ सकतीं। इसके अलावा कक्षा 1 व 2 के बच्चे नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। स्कूल में कमरों की संख्या कितनी कम है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि जगह कम होने के कारण कुछ बैंच जर्जर कमरे में रखनी पड़ी हैं। डॉ.पृथी सिंह का कहना है कि बैंच के लायक स्थान नहीं है। शौचालय का दरवाजा भी ठीक नही है। साथ ही उनमें गंदगी भी पसरी हुई है। शिक्षकों के अनुसार गांव के लोग छत कूद कर अंदर आ जाते हैं। जिनके कारण शौचालयों में गंदगी रहती है।
केस-4
सुल्तानठेर के विद्यालय के कमरों की छत से टपकता है पानी
प्रधानाध्यापक संजीव कुमार की आत्महत्या के बाद चर्चा में आया संविलियन विद्यालय सुल्तानठेर में 404 छात्र संख्या है। आत्महत्या के बाद कोई भी यहां का चार्ज लेना नहीं चाहता था। साथ ही ग्रामीण भी अपने बच्चों को भेजने से कतराने लगे थे। बीते साल प्रदीप कुमार को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक बनाया गया था। उनका तबादला होने के बाद ज्योति चौधरी प्रधानाध्यापिका हैं। उनके समेत 11 का स्टाफ है। स्कूल में 18 कमरे हैं। लेकिन बरसात के मौसम में सभी की छत से पानी टपकता है। बारिश में बच्चों और खुद को भीगने से बचाने में स्टाफ के पसीने छूट जाते हैं। गांव का पानी भी स्कूल के परिसर में भर जाता है। इसके अलावा स्कूल की दीवार भी ढह गई। बैठने के लिए बैंच पर्याप्त नहीं होने के कारण कक्षा-3, 4 और 5 के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापिका ज्योति चौधरी का कहना है कि घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों काे स्कूल में भेजने के लिए राजी किया। यहां पर बिजली की समस्या है। 15 दिन पहले काटा गया कनेक्शन अभी तक नहीं जोड़ा जा सका है।
कुछ स्कूलों में भवन जर्जर हैं। उनको ध्वस्त कराकर नया निर्माण कराया जाएगा। जिनमें जगह कम है, उनको दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए जमीन तलाश की जाएगी। बैठने के लिए बैंच मंगाई जाएंगी।- आरती गुप्ता, बीईओ, गजरौला