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Amroha News: हादसे में मिट गईं हाथों की रेखाएं तो मुंह से कलम थाम लिखी कामयाबी की इबारत

Thu, 22 Feb 2024 02:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 22 Feb 2024 02:23 AM IST
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The lines on the hands were erased in the accident and the words of success were written with the pen.
अमरोहा। हाथों की लकीरों पर मत जा ए गालिब, नसीब उनके भी होते हैं, जिनके हाथ नहीं होते। मशहूर शायर गालिब का यह शेर हसनपुर के रजोहा निवासी रेखा पर सटीक बैठता है। बचपन में एक हादसे के दौरान दोनों हाथ खोने के बाद भी रेखा ने हिम्मत नहीं हारी। विपरीत परिस्थितियों में भी रेखा ने पढ़ने की जिद नहीं छोड़ी और मुंह में कलम थाम कर अपनी किस्मत को बुलंद करने ठान ली। बीएड योग्यताधारी रेखा अब बच्चों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनी हुई हैं।
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हसनपुर के रजोहा गांव निवासी जयपाल सिंह के घर हुए हादसे में उनको तोड़कर रख दिया। पांच भाई बहनों में चौथे नंबर की उनकी छह वर्षीय बेटी रेखा चौहान के दोनों हाथ चारा काटने की मशीन में आ गए। जिसमें रेखा को दोनों हाथ गंवाने पड़े। रेखा ने बताया कि एक बारगी लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। हिम्मत जवाब दे रही थी। लेकिन जीवन में कुछ कर गुजरने की ललक उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दे रही थी। पढ़ाई को जारी रखने की जिद के आगे परिजनों ने रेखा का दाखिला गांव के ही प्राइमरी स्कूल में करा दिया। शुरुआत में काफी परेशानी हुई। लेकिन रेखा की जिद उसको और मजबूत बना रही थी। शुरू में रेखा ने पैर से लिखने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी।
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इसके बाद भी उन्हाेंने हार नहीं मानी। बाद में रेखा ने मुंह में कलम को थाम कर लिखने का अभ्यास शुरू किया। लगातार अभ्यास के बाद रेखा मुंह से लिखने में अभ्यस्त हो गईं। साल 2006 में सदरपुर स्थित मदनपाल इंटर कॉलेज से 10वीं और 2008 में 12वीं की परीक्षा भी पास कर ली। इसके बाद कोराल डिग्री कॉलेज से स्नातक की उपाधि भी ले ली। लेकिन पढ़ने और पढ़ाने का जुनून अभी भी कम नहीं हुआ था। इसके बाद रेखा ने लखनऊ के डाॅ. शकुंतला विश्वविद्यालय से 2016 में बीएड की डिग्री ले ली। शिक्षिका बनने का सपना आंखों में संजोए रेखा ने फिलहाल सी-टेट की परीक्षा पास कर ली है। इससे पहले उसने एक स्कूल में अध्यापन भी किया। फिलहाल वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च चला रहीं हैं। रेखा कहती हैं कि उनको दिव्यांग कहलाना पसंद नहीं हैं। हौसला और इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो इंसान के लिए कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है।
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रेखा का कहना है कि उनको किसी पर निर्भर रहना पसंद नहीं है। वह अपने सभी घरेलू कार्य खुद ही करती हैं। खाना बनाने से लेकर कपड़े धोने के काम में भी किसी की मदद नहीं लेती हैं। उनका कहना है कि दोनों हाथ गंवाने के बाद उनको उम्मीद नहीं थी, कि वह सामान्य जी सकेंगी।
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