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Amroha News: ठगी के लिए ही फर्म का राज्य कर विभाग में कराया गया था पंजीकरण
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अमरोहा। नौकरी और बेहतर करियर का सपना दिखाकर युवाओं को ठगी के जाल में फंसाने वाले गिरोह की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस अब गिरोह की फर्म भारत एसोसिएट के बैंक खातों, जीएसटी पंजीकरण, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। यह फॉर्म राज्य कर विभाग में पंजीकृत पाई गई है। मामले में साइबर अपराध के एंगल से भी पड़ताल शुरू कर दी गई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के सरगना संदीप कुमार ने अपने साथी अरुण के साथ मिलकर भारत एसोसिएट नाम से फर्म बनाई थी। फर्म का पंजीकरण कराने के बाद ऑनलाइन विज्ञापन देकर युवाओं से संपर्क किया जाता था।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब 17 और 18 जुलाई को किराये के दो मकानों से 15 युवक किसी तरह भाग निकले और पुलिस तक पहुंचे। उनकी शिकायत के बाद सामने आया कि करीब 30 युवकों को छह महीने तक शहर के पांच किराये के मकानों में बंधक बनाकर रखा गया था।
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अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदौरिया ने बताया कि मौके से बरामद स्टांप पेपर प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। पुलिस को एक ही सीरियल नंबर वाले 20 स्टांप पेपर मिले हैं, जिन पर अलग-अलग लोगों के नाम से नौकरी संबंधी अनुबंध तैयार किए गए थे। आशंका है कि एक मूल स्टांप पेपर खरीदकर उसकी रंगीन प्रतियां निकालकर फर्जी अनुबंध तैयार किए गए।
उपायुक्त राज्य कर महेश चंद ने बताया कि भारत एसोसिएट फर्म राज्यकर विभाग में पंजीकृत पाई गई है। फर्म के पंजीकरण, दस्तावेजों और गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के सरगना संदीप कुमार ने अपने साथी अरुण के साथ मिलकर भारत एसोसिएट नाम से फर्म बनाई थी। फर्म का पंजीकरण कराने के बाद ऑनलाइन विज्ञापन देकर युवाओं से संपर्क किया जाता था।
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पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब 17 और 18 जुलाई को किराये के दो मकानों से 15 युवक किसी तरह भाग निकले और पुलिस तक पहुंचे। उनकी शिकायत के बाद सामने आया कि करीब 30 युवकों को छह महीने तक शहर के पांच किराये के मकानों में बंधक बनाकर रखा गया था।
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अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदौरिया ने बताया कि मौके से बरामद स्टांप पेपर प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। पुलिस को एक ही सीरियल नंबर वाले 20 स्टांप पेपर मिले हैं, जिन पर अलग-अलग लोगों के नाम से नौकरी संबंधी अनुबंध तैयार किए गए थे। आशंका है कि एक मूल स्टांप पेपर खरीदकर उसकी रंगीन प्रतियां निकालकर फर्जी अनुबंध तैयार किए गए।
उपायुक्त राज्य कर महेश चंद ने बताया कि भारत एसोसिएट फर्म राज्यकर विभाग में पंजीकृत पाई गई है। फर्म के पंजीकरण, दस्तावेजों और गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है।