{"_id":"6272d2243a9b0a432a44b4d2","slug":"the-disposal-of-complaints-should-be-timely-and-quality-dm-jpnagar-news-mbd4269175151","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकायतों का निस्तारण समय से और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए: डीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिकायतों का निस्तारण समय से और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए: डीएम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिलाधिकारी बालकृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि जनमानस की आने वाले समस्याओं का निस्तारण समय से और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट होना चाहिए। जिन विभागों के अधिकारियों के संदर्भ लंबित हैं और डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं, उनका वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश दिए।
वह बुधवार को एंटी-भू माफिया, पीजी पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाईन एल-1, मुख्यमंत्री हेल्पलाईन एल-2, समाधान दिवस में आईजीआरएस के लंबित शिकायतों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने जनपद के विभागवार लंबित संदर्भों को देखा। गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं होने, अधिकतर शिकायत लंबित और डिफाल्टर की श्रेणी में होने के कारण असंतोष व्यक्त किया। निर्देश दिए कि जिन-जिन विभागों के अधिकारियों के शिकायतें लंबित हैं और डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं, उनका तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों वेतन रोका जाएगा। सुधार नहीं हुआ तो प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने पाया कि मई महीने के अभी मात्र 3 दिन बीते हैं और 142 शिकायत डिफॉल्टर हुए। जिसमें 80 शिकायत तो डिफॉल्टर बुधवार को प्रदर्शित हो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि डिफाल्टर संदर्भ एवं जनसुनवाई में पर्याप्त रुचि अधिकारियों द्वारा नहीं ली जा रही है। शासन इसकी लगातार समीक्षा कर रहा है। जिससे जिले की छवि भी धूमिल हो रही है। कहा कि शिकायतों का समय गुणवत्तापूर्ण निस्तारण होना चाहिए। यदि शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट नहीं है, तो निस्तारण नहीं माना जाएगा। प्रभारी अधिकारी आईजीआरएस, अपर उप जिलाधिकारी अनिल श्रीवास्तव ने बताया विभागवार लंबित शिकायतों के बारे में प्रतिदिन अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाता है। लेकिन कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है। अधिकारियों द्वारा देखा ही नहीं जाता है। समीक्षा के दौरान जनपद के अलग-अलग विभागों अधिकारी-कर्मचारी डिफाल्टर पाये गए, उन्हें सख्त निर्देश दिए है कि आने वाली शिकायतों का निस्तारण समय पर हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लारवाही क्षम्य नहीं होगी। कहा कि आने वाली शिकायतों को नियमित देखे। जिससे जिले की छवि प्रदेश में खराब न हो।
विज्ञापन
वह बुधवार को एंटी-भू माफिया, पीजी पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाईन एल-1, मुख्यमंत्री हेल्पलाईन एल-2, समाधान दिवस में आईजीआरएस के लंबित शिकायतों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने जनपद के विभागवार लंबित संदर्भों को देखा। गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं होने, अधिकतर शिकायत लंबित और डिफाल्टर की श्रेणी में होने के कारण असंतोष व्यक्त किया। निर्देश दिए कि जिन-जिन विभागों के अधिकारियों के शिकायतें लंबित हैं और डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं, उनका तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों वेतन रोका जाएगा। सुधार नहीं हुआ तो प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने पाया कि मई महीने के अभी मात्र 3 दिन बीते हैं और 142 शिकायत डिफॉल्टर हुए। जिसमें 80 शिकायत तो डिफॉल्टर बुधवार को प्रदर्शित हो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि डिफाल्टर संदर्भ एवं जनसुनवाई में पर्याप्त रुचि अधिकारियों द्वारा नहीं ली जा रही है। शासन इसकी लगातार समीक्षा कर रहा है। जिससे जिले की छवि भी धूमिल हो रही है। कहा कि शिकायतों का समय गुणवत्तापूर्ण निस्तारण होना चाहिए। यदि शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट नहीं है, तो निस्तारण नहीं माना जाएगा। प्रभारी अधिकारी आईजीआरएस, अपर उप जिलाधिकारी अनिल श्रीवास्तव ने बताया विभागवार लंबित शिकायतों के बारे में प्रतिदिन अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाता है। लेकिन कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है। अधिकारियों द्वारा देखा ही नहीं जाता है। समीक्षा के दौरान जनपद के अलग-अलग विभागों अधिकारी-कर्मचारी डिफाल्टर पाये गए, उन्हें सख्त निर्देश दिए है कि आने वाली शिकायतों का निस्तारण समय पर हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लारवाही क्षम्य नहीं होगी। कहा कि आने वाली शिकायतों को नियमित देखे। जिससे जिले की छवि प्रदेश में खराब न हो।
विज्ञापन