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रकम दोगुनी करने के नाम पर एक करोड़ की हुई थी धोखाधड़ी
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जोया (अमरोहा)। चिटफंट कंपनी के निदेशक ने फंदा लगाकर कर खुदकुशी कर ली। निदेशक द्वारा चिटफंड कंपनी खोलकर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर क्षेत्र व आसपास के लोगों के लगभग एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। अपनी मेहनत की कमाई जाती देखकर उपभोक्ताओं ने कई बार हंगामा किया था। धोखाधड़ी का आरोप लगाया। अफसरों से शिकायत की थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई थी। करीब एक साल तक उपभोक्ताओं ने रुपये वापस लेने के संघर्ष किया। लेकिन पैसा नहीं मिला। इसके बाद पीड़ितों ने न्यायालय की शरण ली थी। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
इंस्पेक्टर शरद मलिक ने बताया कि मुबारकपुर निवासी चरनसिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2015 में एंपलीफाई रियल स्टेट चिटफंड कंपनी खोली थी। तीन साल में कंपनी कर्मचारियों ने क्षेत्र और पास-पड़ोस के हजारों मजदूर और गरीब लोगों के एक करोड़ से अधिक रुपये दोगुने करने का झांसा देकर हड़प लिए। जब उपभोक्ताओं को अपनी मेहनत की कमाई डूबने का अहसास हुआ तो हंगामा खड़ा हो गया। वर्ष 2018 में उपभोक्ताओं ने कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने शुरू कर दिए। पुलिस और प्रशासनिक अफसर से शिकायत की। लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद सितंबर 2019 में उपभोक्ताओं ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर चरन सिंह सहित पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पहले तो कंपनी बंद हुई और फिर चरन सिंह को जेल जाना पड़ा।
जमीन में लगाया था पैसा, नोटबंदी में बिगड़ा खेल
अमरोहा। चरन सिंह और उनके साथियों ने चिटफंड कंपनी के जरिए लोगों से लिए पैसे को जमीन के कारोबार में लगाया था। प्रापर्टी बेचकर लोगों दोगुनी रकम देने लालच दिया था। लेकिन नोटबंदी में सारा खेल बिगड़ गया।
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छह सौ से अधिक मजदूरों ने जमा किए थे पैसे
अमरोहा। जोया और आसपास के करीब छह सौ से अधिक मजदूरों ने चरन सिंह की चिटफंड कंपनी में पैसे जमा किए थे। अपनी गाढ़ी कमाई से पैसे निकालकर रोजाना मजदूर कंपनी में जमा करते थे। मजदूरों को बदले में दोगुनी रकम की उम्मीद थी। लेकिन मजदूरों को निराशा हाथ लगी। हालांकि पुलिस के दबाव में कुछ मजदूरों के रकम भी लौटाए थे।
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इंस्पेक्टर शरद मलिक ने बताया कि मुबारकपुर निवासी चरनसिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2015 में एंपलीफाई रियल स्टेट चिटफंड कंपनी खोली थी। तीन साल में कंपनी कर्मचारियों ने क्षेत्र और पास-पड़ोस के हजारों मजदूर और गरीब लोगों के एक करोड़ से अधिक रुपये दोगुने करने का झांसा देकर हड़प लिए। जब उपभोक्ताओं को अपनी मेहनत की कमाई डूबने का अहसास हुआ तो हंगामा खड़ा हो गया। वर्ष 2018 में उपभोक्ताओं ने कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने शुरू कर दिए। पुलिस और प्रशासनिक अफसर से शिकायत की। लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद सितंबर 2019 में उपभोक्ताओं ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर चरन सिंह सहित पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पहले तो कंपनी बंद हुई और फिर चरन सिंह को जेल जाना पड़ा।
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जमीन में लगाया था पैसा, नोटबंदी में बिगड़ा खेल
अमरोहा। चरन सिंह और उनके साथियों ने चिटफंड कंपनी के जरिए लोगों से लिए पैसे को जमीन के कारोबार में लगाया था। प्रापर्टी बेचकर लोगों दोगुनी रकम देने लालच दिया था। लेकिन नोटबंदी में सारा खेल बिगड़ गया।
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छह सौ से अधिक मजदूरों ने जमा किए थे पैसे
अमरोहा। जोया और आसपास के करीब छह सौ से अधिक मजदूरों ने चरन सिंह की चिटफंड कंपनी में पैसे जमा किए थे। अपनी गाढ़ी कमाई से पैसे निकालकर रोजाना मजदूर कंपनी में जमा करते थे। मजदूरों को बदले में दोगुनी रकम की उम्मीद थी। लेकिन मजदूरों को निराशा हाथ लगी। हालांकि पुलिस के दबाव में कुछ मजदूरों के रकम भी लौटाए थे।