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तेज हवा और धूल उड़ी और आसमान गरजा, आम की फसल प्रभावित
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अमरोहा। मौसम के मिजाज में गुरुवार की शाम को बदलाव आया। तेज हवा के साथ धूल भरी आंधी शुरू हो गई। हल्की बूंदाबांदी भी हुई, जिससे तपिश से लोगों को राहत महसूस हुई। वहीं आसमान में गरज होने से आम उत्पादक चिंतित हो गए। विशेषज्ञों का दावा है कि आम अभी छोटे आकार है। इसके चलते तेज हवा से नुकसान नहीं हुआ है।
जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश चंद्र ने बताया कि जिले में 6,000 हेक्टेयर में आम के बाग है। लगभग 1.20 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होगा। हालांकि अभी मई का शुरुआती सप्ताह है। इसमें पेड़ों पर आम छोटे हैं। गुरुवार की शाम लगभग सात बजे मौसम ने यू टर्न लिया। आसमान में बादल छा गए। कुछ देर के बाद धूल भरी हवा चलने लगी। रास्ते से गुजर रहे लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंचें। तेज हवा से कुछ खास नुकसान नहीं होगा। दो से तीन प्रतिशत छोटे आम झड़ते हैं। इसके अलावा खराब आम गिर जाते हैं। एक तरफ से देखा जाए तो फायदे ही हैं पत्तियों की सफाई हो जाती है। गिरने के बाद आम को बाजार में बेच सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभी डंठल मजबूत है इसके चलते नुकसान कम है। उन्होंने बताया कि आम के फसलों का उत्पादन वैज्ञानिक तकनीक से हो रहा है। उत्पादकों ने तकनीक अपनाई है।
तेज हवा से नुकसान हुआ है। फिलहाल आम का आकार छोटा है। हवा तेज चली है। पत्तों और फसल को नुकसान हो सकता है। नदीम अहमद, आम निर्यातक
हवा चलने के साथ बिजली गुल, इफ्तार की तैैयारियों में दिक्कत
अमरोहा। धूल भरी तेज हवा चलने के साथ बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके चलते इफ्तार में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दरअसल जब हवा चलनी शुरू हुई घरों में इफ्तार की तैयारियों में लोग मशगूल थे। आनन फानन में घरों की खिड़कियों के दरवाजे बंद किए। हालांकि तब तक धूल कमरों में आ चुकी थी। काफी देर तक बिजली आपूर्ति नहीं बहाल हुई।
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जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश चंद्र ने बताया कि जिले में 6,000 हेक्टेयर में आम के बाग है। लगभग 1.20 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होगा। हालांकि अभी मई का शुरुआती सप्ताह है। इसमें पेड़ों पर आम छोटे हैं। गुरुवार की शाम लगभग सात बजे मौसम ने यू टर्न लिया। आसमान में बादल छा गए। कुछ देर के बाद धूल भरी हवा चलने लगी। रास्ते से गुजर रहे लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंचें। तेज हवा से कुछ खास नुकसान नहीं होगा। दो से तीन प्रतिशत छोटे आम झड़ते हैं। इसके अलावा खराब आम गिर जाते हैं। एक तरफ से देखा जाए तो फायदे ही हैं पत्तियों की सफाई हो जाती है। गिरने के बाद आम को बाजार में बेच सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभी डंठल मजबूत है इसके चलते नुकसान कम है। उन्होंने बताया कि आम के फसलों का उत्पादन वैज्ञानिक तकनीक से हो रहा है। उत्पादकों ने तकनीक अपनाई है।
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तेज हवा से नुकसान हुआ है। फिलहाल आम का आकार छोटा है। हवा तेज चली है। पत्तों और फसल को नुकसान हो सकता है। नदीम अहमद, आम निर्यातक
हवा चलने के साथ बिजली गुल, इफ्तार की तैैयारियों में दिक्कत
अमरोहा। धूल भरी तेज हवा चलने के साथ बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके चलते इफ्तार में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दरअसल जब हवा चलनी शुरू हुई घरों में इफ्तार की तैयारियों में लोग मशगूल थे। आनन फानन में घरों की खिड़कियों के दरवाजे बंद किए। हालांकि तब तक धूल कमरों में आ चुकी थी। काफी देर तक बिजली आपूर्ति नहीं बहाल हुई।
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