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Amroha News: रासायनिक खाद से कमजोर हो रही मिट्टी की सेहत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2026 01:20 AM IST
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Soil health is deteriorating due to chemical fertilizers
मनोज पंवार
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अमरोहा। रासायनिक खाद के उपयोग की वजह से धरती की सेहत कमजोर होती जा रही है। जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर दिखाई दे रहा है। मृदा की जांच में सामने आया कि जीवांश कार्बन की कमी है। जिसकी पूर्ति गोबर की खाद से की जा सकती है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है।

वर्ष 2025-26 में 12 हजार किसानों को मृदा कार्ड का वितरण है। यानि एक गांव से 100 नमूने लिए गए। जिनकी जांच की गई। इस जांच में निकलकर आया कि धीरे-धीरे जमीन में जीवांश कार्बन की कमी होती जा रही है। इन कार्डों का वितरण किसानों को किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि अपनी जमीन की जांच जरूर कराएं। इससे पता चलता है कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है और उसके लिए किया करना है। जांच में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के संबंध में पता चल जाता है। किसान फसलों में भी रसायन का भी उपयोग कर रहे हैं। जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। संवाद
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पीएच मान के अनुसार भूमि का वर्गीकरण पीएचमान मृदा वर्ग पोषक तत्वों की उपलब्धता

6.5 से कम अम्लीय मृदा अधिकांश पोषक तत्व की अनुपलब्धता

6.5 से 8.5 सामान्य मृदा पोषक तत्व उपलब्ध

8.5 से अधिक क्षारीय मृदा अधिकांश पोषक तत्वों की कमी

खेत से मृदा नमूना लेने की विधि

-जिस खेत से मृदा नमूना एकत्र करना है उसमें आठ से दस स्थानों पर 6 इंच गुणा 4 इंच गुणा 6 इंच गड्ढे खोद लें।
-खुर्फी से उस गडढे की दीवार से लगभग 2 .5 सेमी पर्त ऊपर से नीचे लें

-खेत के विभिन्न गड्ढों से प्राप्त मिट्ठी को साफ कपड़े, कागज या बर्तन में डालकर अच्छी तरह से मिला लें। अब मिट्टी का ढेर बना लें तथा उसके चार भाग कर लें। आमने सामने के दो भाग फेंक दें और भाग फिर अच्छी तरह से मिलाएं। एक बार फिर ढेर बनाकर इस प्रक्रिया को अपनाएं। यह प्रक्रिया तब तक करें जब मिट्टी आधा किलो रह जाए और फिर मिट्टी को साफ थैली में भर लें।
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-यदि मिट्टी गीली हो तो उसे छाया में सुखाकर थैली में भरना चाहिए और फिर जांच के लिए भेज दें।

जमीन में जीवांश कार्बन की कमी हो रही है। जिसकी पूर्ति के लिए गोबर की खाद का प्रयोग करें। फसल चक्र अपनाएं। एक ही फसल को लगातार न बोए। हरी खाद का भी प्रयोग अधिक करें। रसायन का उपयोग कम से कम करें। इससे फसलों को भी फायदा मिलेगा और उत्पादन बढ़ेगा। किसान खुद भी अपनी जमीन का नमूना ले सकता है। इंदू साक्षी, प्रभारी मृदा लैब
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