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बसों में यात्रियों की रेलमपेल-सोशल डिस्टेंसिंग हो रही फेल
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गजरौला में चौपला चौराहे पर मुरादाबाद की दिशा में जा रही रोडवेज की बस में सवार होती यात्रियों की भ?
- फोटो : GAJRAULA
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गजरौला। सरकार ने अनलॉक चार में रियायतें क्या दीं, लोग बेपरवाह हो गए। इस चित्र को ही देख लीजिए। रोडवेज की इस बस में सवार होने के लिए यात्रियों में किस कदर आपाधापी मची हुई है और वे सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं कर रहे हैं और हां, किसी के मुंह पर मास्क तक नहीं है।
बृहस्पतिवार को चौपला पर मुरादाबाद जा रही रोडवेज बस आकर रुकी। बस में 46 यात्री पहले से ही सवार थे। इनमें पांच-छह नीचे उतरे जबकि बीस से अधिक महिला, पुरुष और बच्चे फिर से इसी बस में सवार हो गए। आलम यह था कि बस में सवार होने के लिए यात्रियों में आपाधापी मची हुई थी। हैरानी वाली बात यह रही कि किसी भी यात्री ने मुंह पर मास्क नहीं लगाया हुआ था। सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इतना ही नहीं बस के चालक और परिचालक ने भी मास्क नहीं लगाए हुए थे। सैनिटाइजर का तो सवाल ही नहीं था। यह नजारा कोई एक बस का नहीं है बल्कि अधिकांश बसों में यही दृश्य देखने को मिल जाएंगे। इससे साफ जाहिर है कि लोगों को अपने जीवन की जरा भी परवाह नहीं है।
यह लापरवाही काफी भारी पड़ सकती है। इसकी रोकथाम बेहद आवश्यक है। शुरूआत में तो बसों को सैनिटाइज किया गया लेकिन अब कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यदि शीघ्र ही बसों में सफर की नियमावली नहीं बनाई गई तो परिणाम काफी घातक साबित होंगे।
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डा. योगेंद्र सिंह, सीएचसी अधीक्षक
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बृहस्पतिवार को चौपला पर मुरादाबाद जा रही रोडवेज बस आकर रुकी। बस में 46 यात्री पहले से ही सवार थे। इनमें पांच-छह नीचे उतरे जबकि बीस से अधिक महिला, पुरुष और बच्चे फिर से इसी बस में सवार हो गए। आलम यह था कि बस में सवार होने के लिए यात्रियों में आपाधापी मची हुई थी। हैरानी वाली बात यह रही कि किसी भी यात्री ने मुंह पर मास्क नहीं लगाया हुआ था। सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इतना ही नहीं बस के चालक और परिचालक ने भी मास्क नहीं लगाए हुए थे। सैनिटाइजर का तो सवाल ही नहीं था। यह नजारा कोई एक बस का नहीं है बल्कि अधिकांश बसों में यही दृश्य देखने को मिल जाएंगे। इससे साफ जाहिर है कि लोगों को अपने जीवन की जरा भी परवाह नहीं है।
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यह लापरवाही काफी भारी पड़ सकती है। इसकी रोकथाम बेहद आवश्यक है। शुरूआत में तो बसों को सैनिटाइज किया गया लेकिन अब कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यदि शीघ्र ही बसों में सफर की नियमावली नहीं बनाई गई तो परिणाम काफी घातक साबित होंगे।
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