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Amroha News: धोखाधड़ी में सीतापुर के दोषी को पांच साल की सजा
Sun, 15 Jun 2025 01:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 15 Jun 2025 01:59 AM IST
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अमरोहा। धोखाधड़ी के मामले में सीतापुर जनपद के घाटमपुर निवासी दोषी नीरज को न्यायालय ने पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। फिलहाल दोषी जमानत पर जेल से बाहर था।
यह मामला नौगांवा सादात थाने से जुड़ा है। थानाक्षेत्र के धनौरी मीर में किसान यासीन का परिवार रहता है। उनकी बेटी शबनम साल 2017 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। तभी उनके परिचित आबिद अली ने बताया कि लखनऊ से पार्टी का एक बड़ा आदमी आया है, जो नौकरी लगवाने के नाम पर पैसा जमा कर रहा है। आबिद अली ने शबनम को सीतापुर जनपद के घाटमपुर निवासी नीरज से मिलवाया। नीरज ने विश्वास दिलाया कि वह एक बड़े नेता का पीआरओ है और वह बीडीओ के पद पर नौकरी लगवा देगा। नौकरी लगवाने के एवज में उसने 15 लाख रुपये मांगे। इस दौरान नीरज ने ऑनलाइन भुगतान कर लेने से मना कर दिया और कहा कि यह पैसा पार्टी फंड में जमा होगा। इसलिए भुगतान कैश में ही लिया जाएगा।
शबनम ने दस लाख रुपये नकद और 2.70 लाख रुपये नीरज के खाते में जमा कर दिए। कुछ दिन बाद बीडीओ की भर्ती का रिजल्ट आया। जिसमें शबनम का नाम नहीं था। इसके बाद शबनम ने नीरज से बात की तो उसने समीक्षा अधिकारी के पद पर सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। जिसे लेकर नीरज और शबनम के बीच व्हाट्सएप पर चेटिंग भी हुई थी। बावजूद इसके न तो शबनम की नौकरी लगी और न पैसा वापस मिला। इस मामले में शबनम में नीरज के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने नीरज के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सोमवार को अपर सिविल जज प्रथम अभिषेक कुमार व्यास ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर आरोपी नीरज को दोषी करार दिया। साथ ही पांच साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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यह मामला नौगांवा सादात थाने से जुड़ा है। थानाक्षेत्र के धनौरी मीर में किसान यासीन का परिवार रहता है। उनकी बेटी शबनम साल 2017 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। तभी उनके परिचित आबिद अली ने बताया कि लखनऊ से पार्टी का एक बड़ा आदमी आया है, जो नौकरी लगवाने के नाम पर पैसा जमा कर रहा है। आबिद अली ने शबनम को सीतापुर जनपद के घाटमपुर निवासी नीरज से मिलवाया। नीरज ने विश्वास दिलाया कि वह एक बड़े नेता का पीआरओ है और वह बीडीओ के पद पर नौकरी लगवा देगा। नौकरी लगवाने के एवज में उसने 15 लाख रुपये मांगे। इस दौरान नीरज ने ऑनलाइन भुगतान कर लेने से मना कर दिया और कहा कि यह पैसा पार्टी फंड में जमा होगा। इसलिए भुगतान कैश में ही लिया जाएगा।
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शबनम ने दस लाख रुपये नकद और 2.70 लाख रुपये नीरज के खाते में जमा कर दिए। कुछ दिन बाद बीडीओ की भर्ती का रिजल्ट आया। जिसमें शबनम का नाम नहीं था। इसके बाद शबनम ने नीरज से बात की तो उसने समीक्षा अधिकारी के पद पर सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। जिसे लेकर नीरज और शबनम के बीच व्हाट्सएप पर चेटिंग भी हुई थी। बावजूद इसके न तो शबनम की नौकरी लगी और न पैसा वापस मिला। इस मामले में शबनम में नीरज के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने नीरज के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सोमवार को अपर सिविल जज प्रथम अभिषेक कुमार व्यास ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर आरोपी नीरज को दोषी करार दिया। साथ ही पांच साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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