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हिचकोले खाती नावों से भाइयों को राखी बांधने पहुंची बहनें
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गजरौला। गंगा के टापू में बसे गांवों में आने और जाने को नाव के अलावा कोई मार्ग नहीं है। रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई में राखी बांधने को बहनें जान जोखिम में डालकर पहुंचीं। बीते कई दशकों से रक्षाबंधन और भैयादूज पर बहनों को हर साल यह जोखिम उठाना पड़ता है। वह जान को दांव पर लगाकर हिचकोले खाती नावों से पार होकर भाइयों की कलाई में राखी बांधने पहुंचती हैं।
रामगंगा पोषक नहर व गंगा के टापू में क्षेत्र केदारानगर, शीशोंवाली, भुड्डीवाली, टीकोंवाली गांव बसे हैं। जहां पर आने जाने के लिए नाव के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। लोगों ने रामगंगा पोषक नहर पार होने को चकनवाला और अलीनगर के सामने नाव लगा रखी हैं। जिनसे लोग रामगंगा पोषक नहर को पार होकर अपने गांवों में पहुंचते हैं। नावों को किनारे पर ले जाकर और उन पर लकड़ी के तख्ते आदि डालकर बाइक व अन्य हल्के वाहनों को चढ़ाया जाता है।
दारानगर गांव निवासी पुष्पा देवी का विवाह हसनपुर के सौहरका में हुआ है। वह हरसाल अपने भाइयों को राखी बांधने और भैया दूज पर अपने मायके आती है। पुष्पा देवी का कहना है कि नाव से पार होते समय डूब जाने या पलट जाने का डर लगा रहता है, लेकिन भाई की दीर्घायु को आना जरूर पड़ता है।
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उर्मिला कहती है कि उसकी शादी को कई साल बीत गए। टापू में बसे दारानगर में उसका मायका है, जबकि गजरौला इलाके के फिरोजपुर में उसकी ससुराल है। दारानगर आने जाने को नाव के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है। जिसके चलते रक्षाबंधन और भैया दूज पर वह साल नाव से ही पार होकर मायके पहुंचती है।
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रामगंगा पोषक नहर व गंगा के टापू में क्षेत्र केदारानगर, शीशोंवाली, भुड्डीवाली, टीकोंवाली गांव बसे हैं। जहां पर आने जाने के लिए नाव के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। लोगों ने रामगंगा पोषक नहर पार होने को चकनवाला और अलीनगर के सामने नाव लगा रखी हैं। जिनसे लोग रामगंगा पोषक नहर को पार होकर अपने गांवों में पहुंचते हैं। नावों को किनारे पर ले जाकर और उन पर लकड़ी के तख्ते आदि डालकर बाइक व अन्य हल्के वाहनों को चढ़ाया जाता है।
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दारानगर गांव निवासी पुष्पा देवी का विवाह हसनपुर के सौहरका में हुआ है। वह हरसाल अपने भाइयों को राखी बांधने और भैया दूज पर अपने मायके आती है। पुष्पा देवी का कहना है कि नाव से पार होते समय डूब जाने या पलट जाने का डर लगा रहता है, लेकिन भाई की दीर्घायु को आना जरूर पड़ता है।
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उर्मिला कहती है कि उसकी शादी को कई साल बीत गए। टापू में बसे दारानगर में उसका मायका है, जबकि गजरौला इलाके के फिरोजपुर में उसकी ससुराल है। दारानगर आने जाने को नाव के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है। जिसके चलते रक्षाबंधन और भैया दूज पर वह साल नाव से ही पार होकर मायके पहुंचती है।