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जिला अस्पताल में 32 डॉक्टरों की कमी, कैसे मिले इलाज
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एक तरफ सरकार लोगों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर उपचार देने का दावा कर रही है। वहीं जिला अस्पताल में ने तो कार्डियोलॉजिस्ट है और न चेस्ट फिजिशियन तैनात हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों समेत 32 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में दिल और सीने की बीमारी के मरीजों को रेफर किया जाता है। दिल, बीपी और शुगर के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 52 पदों के सापेक्ष केवल 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं दुरुस्त करने की कवायद चल रही है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय में शासन से डॉक्टरों के 52 पद स्वीकृत हैं लेकिन महज 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं जैसे-तैसे रेंग रही है। जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता की बात करें तो अस्पताल बनने के बाद आज तक यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न ही चेस्ट फिजीशियन की तैनाती हुई। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के सात में से छह पद शुरुआत से अब तक खाली पड़े हैं। ऐसे में दिल, बीपी, शुगर के मरीजों की परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है।
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ये है अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
फिजीशियन के 2 पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है। चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ दोनों पद भरे हैं। एनेस्थेटिक्स के 2 पदों में एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के 2 पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के 2 पदों में एक ही डॉक्टर हैं जबकि 1 पद खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ में स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पर भरे हुए हैं, अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है। जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तैनात हैं।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय में शासन से डॉक्टरों के 52 पद स्वीकृत हैं लेकिन महज 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं जैसे-तैसे रेंग रही है। जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता की बात करें तो अस्पताल बनने के बाद आज तक यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न ही चेस्ट फिजीशियन की तैनाती हुई। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के सात में से छह पद शुरुआत से अब तक खाली पड़े हैं। ऐसे में दिल, बीपी, शुगर के मरीजों की परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है।
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ये है अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
फिजीशियन के 2 पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है। चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ दोनों पद भरे हैं। एनेस्थेटिक्स के 2 पदों में एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के 2 पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के 2 पदों में एक ही डॉक्टर हैं जबकि 1 पद खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ में स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पर भरे हुए हैं, अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है। जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तैनात हैं।