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अंग्रेजी हुकूमत में रखी गई थी रामडोल जुलूस की नींव
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 20 Aug 2016 01:42 AM IST
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शोभायात्रा
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आज उत्तर भारत की प्रमुख शोभायात्रा में शुमार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद नवमी पर निकाली जाने वाली रामडोल शोभायात्रा का इतिहास काफी पुराना है। 110 वर्ष पहले मोहल्लों से डोले निकलते थे। सन 1952 में शोभायात्रा को व्यापक रूप दिया गया।
आज इसी शोभायात्रा के निकलने का समय 16 घंटे हो गया है और कई प्रदेशों की झांकियां शामिल होती हैं। इसमें शहर सहित आसपास के श्रद्धालुओं का समागम होता है। अंग्रेजी हुकूमत में रामडोल शोभायात्रा की नींव पड़ी थी। तब से अब तक भव्य रूप से शोभायात्रा निकाली जाती रही है।
रामडोल की परंपरा सन 1906 में पड़ी थी। उस वक्त मोहल्लों से डोले निकाले जाते थे, जो रिसायत वाले मंदिर पर जाकर समाप्त होते थे। सन 1952 में तत्कालीन एसडीएम सीएम निगम की पहल पर इसे शोभायात्रा का रूप देकर रामडोल का नाम दिया गया। शुरूआत में इसमें केवल डोले ही शामिल होते थे, लेकिन धीरे-धीरे आसपास के जनपदों की झांकियां भी आने लगी।
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आज शोभायात्रा में तमाम प्रदेशों की झांकियां शामिल होती है। कुछ घंटों में पूरी होने वाली शोभायात्रा को अब निकलने में 16 घंटे लगते हैं। कमेटी अध्यक्ष कपिल शर्मा बताते हैं कि 110 साल पहले जब इसकी शुरूआत हुई थी, तब इसका स्वरूप काफी छोटा हुआ करता था। शोभायात्रा में हर साल कुछ बदलाव हो रहा है, जिससे वह भव्य रूप ले रही है।
26 को निकाली जाएगी रामडोल शोभायात्रा
अमरोहा(ब्यूरो)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 25 अगस्त को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन यानी 26 अगस्त को शहर में भव्य रामडोल शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक दो दिन में गेट बनने शुरू हो जाएंगे। कमेटी पदाधिकारियों ने शोभायात्रा को भव्य रूप देने को कमर कस ली है। बाहर से कलाकार बुलाए गए हैं।
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आज इसी शोभायात्रा के निकलने का समय 16 घंटे हो गया है और कई प्रदेशों की झांकियां शामिल होती हैं। इसमें शहर सहित आसपास के श्रद्धालुओं का समागम होता है। अंग्रेजी हुकूमत में रामडोल शोभायात्रा की नींव पड़ी थी। तब से अब तक भव्य रूप से शोभायात्रा निकाली जाती रही है।
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रामडोल की परंपरा सन 1906 में पड़ी थी। उस वक्त मोहल्लों से डोले निकाले जाते थे, जो रिसायत वाले मंदिर पर जाकर समाप्त होते थे। सन 1952 में तत्कालीन एसडीएम सीएम निगम की पहल पर इसे शोभायात्रा का रूप देकर रामडोल का नाम दिया गया। शुरूआत में इसमें केवल डोले ही शामिल होते थे, लेकिन धीरे-धीरे आसपास के जनपदों की झांकियां भी आने लगी।
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आज शोभायात्रा में तमाम प्रदेशों की झांकियां शामिल होती है। कुछ घंटों में पूरी होने वाली शोभायात्रा को अब निकलने में 16 घंटे लगते हैं। कमेटी अध्यक्ष कपिल शर्मा बताते हैं कि 110 साल पहले जब इसकी शुरूआत हुई थी, तब इसका स्वरूप काफी छोटा हुआ करता था। शोभायात्रा में हर साल कुछ बदलाव हो रहा है, जिससे वह भव्य रूप ले रही है।
26 को निकाली जाएगी रामडोल शोभायात्रा
अमरोहा(ब्यूरो)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 25 अगस्त को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन यानी 26 अगस्त को शहर में भव्य रामडोल शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक दो दिन में गेट बनने शुरू हो जाएंगे। कमेटी पदाधिकारियों ने शोभायात्रा को भव्य रूप देने को कमर कस ली है। बाहर से कलाकार बुलाए गए हैं।