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खेतों से गूंज रही मादा तेंदुए की गुर्राहट
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:48 PM IST
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फाइल फोटो
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नौगावां सादात क्षेत्र के शहजादपुर गांव के जंगल में मिले तेंदुए के दोनों शावकों को वन विभाग की टीम अपने साथ ले आई, लेकिन आस पास खेतों में छिपी मादा तेंदुए को पकड़ने का प्रयास नहीं किया। खेतों से मादा तेंदुए के गुर्राने की आवाज लोगों में खौफ पैदा कर रही है। बच्चों के बिछड़ने से घातक मादा की दहशत के चलते लोग खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं। आग जलाकर फसलों की सिंचाई करते हैं।
शुक्रवार की अपराह्न साढ़े तीन बजे शहजादपुर के खेतों से तेंदुए के दो शावक मिले थे। ग्रामीण शावकों को गांव ले गए। वन विभाग के अफसरों और कर्मियों ने शावकों को पिंजड़े में बंद कर प्राणी उद्यान कानपुर भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अफसरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
शावकों को उनकी मां से मिलाने का प्रयास नहीं किया। अफसर और कर्मियों को शावक पिंजड़े में बंद कर वहीं पर रखने चाहिए थे, ताकि उसकी मां भी कब्जे में आ जाए। कुछ देर में मादा तेंदुआ शावकों से मिलने जरूर पहुंचती, लेकिन वन विभाग ने ऐसा नहीं किया।
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अब शावकों से बिछड़ने के बाद मादा तेंदुआ खतरनाक रूप ले सकती है। खेतों से उसके गुर्राने की बराबर आवाज आ रही है। बच्चों के बिछुड़ने से मादा तेंदुआ और भी घातक हो गई है। वह खेतों पर काम कर रहे किसानों को शिकार बना सकती है। खेतों से गुर्राने की आवाज सुन ग्रामीण दहशत में हैं। खेतों पर जाने से डर रहे हैं। खेतों में आग जलाकर रात को सिंचाई करते हैं।
शहजादपुर में शावक मिलने के बाद खेतों का कांबिंग की गई थी। सुबह भी कर्मचारियों को गांव में भेजा गया था, लेकिन कुछ मिला नहीं। खेतों से गन्ने की लगातार कटाई हो रही है, लगता है इसी कारण मादा तेंदुआ कहीं दूर निकल गई है। गांव में विभागीय मोबाइल नंबर दे दिए गए हैं। पिंजरा लगाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। जरूर पड़ेगी तो इसे भी लगाया जाएगा। नरेश जोशी, वन क्षेत्राधकारी
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शुक्रवार की अपराह्न साढ़े तीन बजे शहजादपुर के खेतों से तेंदुए के दो शावक मिले थे। ग्रामीण शावकों को गांव ले गए। वन विभाग के अफसरों और कर्मियों ने शावकों को पिंजड़े में बंद कर प्राणी उद्यान कानपुर भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अफसरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
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शावकों को उनकी मां से मिलाने का प्रयास नहीं किया। अफसर और कर्मियों को शावक पिंजड़े में बंद कर वहीं पर रखने चाहिए थे, ताकि उसकी मां भी कब्जे में आ जाए। कुछ देर में मादा तेंदुआ शावकों से मिलने जरूर पहुंचती, लेकिन वन विभाग ने ऐसा नहीं किया।
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अब शावकों से बिछड़ने के बाद मादा तेंदुआ खतरनाक रूप ले सकती है। खेतों से उसके गुर्राने की बराबर आवाज आ रही है। बच्चों के बिछुड़ने से मादा तेंदुआ और भी घातक हो गई है। वह खेतों पर काम कर रहे किसानों को शिकार बना सकती है। खेतों से गुर्राने की आवाज सुन ग्रामीण दहशत में हैं। खेतों पर जाने से डर रहे हैं। खेतों में आग जलाकर रात को सिंचाई करते हैं।
शहजादपुर में शावक मिलने के बाद खेतों का कांबिंग की गई थी। सुबह भी कर्मचारियों को गांव में भेजा गया था, लेकिन कुछ मिला नहीं। खेतों से गन्ने की लगातार कटाई हो रही है, लगता है इसी कारण मादा तेंदुआ कहीं दूर निकल गई है। गांव में विभागीय मोबाइल नंबर दे दिए गए हैं। पिंजरा लगाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। जरूर पड़ेगी तो इसे भी लगाया जाएगा। नरेश जोशी, वन क्षेत्राधकारी