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अमरोहा के प्रत्याशियों की किस्मत लिखेगी तुर्क बिरादरी
राहुल शर्मा/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:04 AM IST
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : amar ujala
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जिले के समाजवादी परिवार में पैदा हुई गुटबाजी विधानसभा चुनाव में नया गुल खिलाएगी। सबसे ज्यादा चर्चित अमरोहा विस सीट रहेगी, जिस पर हर शख्स की निगाहें होंगी।
कैबिनेट मंत्री महबूब अली के किले में पड़ी दरार का फायदा कौन सी पार्टी उठाएगी, इस सवाल का जवाब यूं तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन तुर्क बिरादरी प्रत्याशियों की किस्मत लिखेगी, ये सच्चाई है। इसलिए प्रत्येक राजनैतिक दल ने बिरादरी की एकजुटता देखते हुए उस पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को शौकत पाशा के तीजे पर हुई पंचायत के फैसलों से लगा कि अबकी बार तुर्क आपसी तालमेल बैठाकर प्रत्याशी का चयन कर वोट करेगी।
कोई माने या न माने, लेकिन हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की हत्या ने जनपद ही नहीं बल्कि सूबे तक में खलबली मचा है। देेश की राजधानी दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक में कैबिनेट मंत्री महबूब अली सुर्खियों में छाए हैं। तुर्क बिरादरी भी सियासत के गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी है। बने भी क्यों ना, महबूब अली व उनके रिश्तेदारों पर जहां बिरादरी शौकत की हत्या का आरोप लगा रही है, वहीं उसकी नाराजगी से विस चुनाव में बड़े झटके की उम्मीद भी सपा को लग रही है।
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यह बिरादरी कैबिनेट मंत्री के गढ़ का हिस्सा है, जिसके वोटर उनकी जीत तय करते हैं। लेकिन इस दफा पाशा की हत्या से पूरी बिरादरी खिलाफ खड़ी है। रिपोर्ट दर्ज कर उनको गिरफ्तार करने व पद से बर्खास्त करने की मांग कर रही है। रही सही कसर समाजवादी पार्टी परिवार में अंदरखाने चल रही गुटबाजी के खुलने से पूरी हो गई है। अपने ही पराए की भूमिका में दिख रहे हैं। साथ देने की बजाय बिरादरी के संग खड़े होकर उनके खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक रहे हैं।
कुछ खामोशी के साथ बिरादरी का समर्थन कर रहे हैं। इससे है कि आगामी विस चुनाव में अमरोहा सीट का नजारा अन्य से जुदा होगा। तुर्क वोट ही प्रत्याशी की हार-जीत का फैसला करेंगे। इसलिए पाशा के तीजे में आज प्रत्येक पार्टी के नेताओं ने हिस्सा लिया। बिरादरी के लोगों के सुर में सुर मिलाए। यहां बता दें कि अमरोहा विस क्षेत्र में तुर्क बिरादरी के 35 से 40 हजार के बीच वोट हैं। जिन्हें अपनी ओर खींचने के लिए प्रत्येक दल जुट गया है।
कैबिनेट मंत्री महबूब अली के किले में पड़ी दरार का फायदा कौन सी पार्टी उठाएगी, इस सवाल का जवाब यूं तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन तुर्क बिरादरी प्रत्याशियों की किस्मत लिखेगी, ये सच्चाई है। इसलिए प्रत्येक राजनैतिक दल ने बिरादरी की एकजुटता देखते हुए उस पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को शौकत पाशा के तीजे पर हुई पंचायत के फैसलों से लगा कि अबकी बार तुर्क आपसी तालमेल बैठाकर प्रत्याशी का चयन कर वोट करेगी।
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कोई माने या न माने, लेकिन हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की हत्या ने जनपद ही नहीं बल्कि सूबे तक में खलबली मचा है। देेश की राजधानी दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक में कैबिनेट मंत्री महबूब अली सुर्खियों में छाए हैं। तुर्क बिरादरी भी सियासत के गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी है। बने भी क्यों ना, महबूब अली व उनके रिश्तेदारों पर जहां बिरादरी शौकत की हत्या का आरोप लगा रही है, वहीं उसकी नाराजगी से विस चुनाव में बड़े झटके की उम्मीद भी सपा को लग रही है।
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यह बिरादरी कैबिनेट मंत्री के गढ़ का हिस्सा है, जिसके वोटर उनकी जीत तय करते हैं। लेकिन इस दफा पाशा की हत्या से पूरी बिरादरी खिलाफ खड़ी है। रिपोर्ट दर्ज कर उनको गिरफ्तार करने व पद से बर्खास्त करने की मांग कर रही है। रही सही कसर समाजवादी पार्टी परिवार में अंदरखाने चल रही गुटबाजी के खुलने से पूरी हो गई है। अपने ही पराए की भूमिका में दिख रहे हैं। साथ देने की बजाय बिरादरी के संग खड़े होकर उनके खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक रहे हैं।
कुछ खामोशी के साथ बिरादरी का समर्थन कर रहे हैं। इससे है कि आगामी विस चुनाव में अमरोहा सीट का नजारा अन्य से जुदा होगा। तुर्क वोट ही प्रत्याशी की हार-जीत का फैसला करेंगे। इसलिए पाशा के तीजे में आज प्रत्येक पार्टी के नेताओं ने हिस्सा लिया। बिरादरी के लोगों के सुर में सुर मिलाए। यहां बता दें कि अमरोहा विस क्षेत्र में तुर्क बिरादरी के 35 से 40 हजार के बीच वोट हैं। जिन्हें अपनी ओर खींचने के लिए प्रत्येक दल जुट गया है।