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शाबाश बिटिया ! मुंह से पेन पकड़कर दिया टीईटी एग्जाम
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 20 Dec 2016 12:16 AM IST
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दिव्यांग रेखा का फाइल फोटो।
- फोटो : amar ujala
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मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है...। ये शेर उन दिव्यांगों पर सटीक बैठता है जिन्हें जन्म से ही विकलांगता का अभिशाप मिला था, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और इस अभिशाप को दरकिनार कर उसे अपनी ताकत बना लिया।
सभी में कोई न कोई ऐसा हुनर होता है, जिसे देखकर लोग चकित रह जाते हैं। सोमवार को जिले में संपन्न हुई टीईटी परीक्षा में रजौहा की रेखा और बरखेड़ा सादात के हरीश जैसे कई परीक्षार्थियों ने इस शेर को चरितार्थ करके दिखाया।
जिनके इरादे बुलंद हों, उनके सामने कोई रुकावट मायने नहीं रखती। रास्ते अपने अपने आप बनते चले जाते हैं। ऐसे ही बुलंद इरादे रखने वाली गांव रजौहा की रेखा के हौसले को सलाम है। दोनों हाथ कोहनी तक कटे हुए हैं, फिर भी हिम्मत नहीं हारती हैं। मुंह से पेन पकड़कर लिखती हैं।
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इसके बल पर वो बीएड तक की परीक्षा पास कर चुकी हैं। सोमवार को रेखा ने टीईटी की परीक्षा दी। शहर के राजकीय इंटर कालेज केंद्र पर टीईटी की परीक्षा देकर आई
रेखा ने बताया कि पेपर बहुत अच्छा आया है। सभी प्रश्न हल किए हैं। उम्मीद है सफलता अवश्य मिलेगी। उनका कहना है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके हौसलों में जान होती है।
सिर्फ पंखों से उड़ान नहीं भरी जाती, कुछ कर गुजरने का हौसला भी होना चाहिए। तभी हम अपने लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त कर सकते हैं। यदि हम कुछ कर गुजरने की ठान ले तो कोई भी बाधा हमें अपनी मंजिल को पाने से नहीं रोक सकती है। बता दें कि रेखा किसान परिवार हैं।
छोटी सी उम्र में ही उनके चारा काटने वाली मशीन में दोनों हाथ कोहनी तक कट गए थे। रेखा का नाम विकलांगता के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए भी भेजा जा चुका है।
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सभी में कोई न कोई ऐसा हुनर होता है, जिसे देखकर लोग चकित रह जाते हैं। सोमवार को जिले में संपन्न हुई टीईटी परीक्षा में रजौहा की रेखा और बरखेड़ा सादात के हरीश जैसे कई परीक्षार्थियों ने इस शेर को चरितार्थ करके दिखाया।
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जिनके इरादे बुलंद हों, उनके सामने कोई रुकावट मायने नहीं रखती। रास्ते अपने अपने आप बनते चले जाते हैं। ऐसे ही बुलंद इरादे रखने वाली गांव रजौहा की रेखा के हौसले को सलाम है। दोनों हाथ कोहनी तक कटे हुए हैं, फिर भी हिम्मत नहीं हारती हैं। मुंह से पेन पकड़कर लिखती हैं।
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इसके बल पर वो बीएड तक की परीक्षा पास कर चुकी हैं। सोमवार को रेखा ने टीईटी की परीक्षा दी। शहर के राजकीय इंटर कालेज केंद्र पर टीईटी की परीक्षा देकर आई
रेखा ने बताया कि पेपर बहुत अच्छा आया है। सभी प्रश्न हल किए हैं। उम्मीद है सफलता अवश्य मिलेगी। उनका कहना है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके हौसलों में जान होती है।
सिर्फ पंखों से उड़ान नहीं भरी जाती, कुछ कर गुजरने का हौसला भी होना चाहिए। तभी हम अपने लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त कर सकते हैं। यदि हम कुछ कर गुजरने की ठान ले तो कोई भी बाधा हमें अपनी मंजिल को पाने से नहीं रोक सकती है। बता दें कि रेखा किसान परिवार हैं।
छोटी सी उम्र में ही उनके चारा काटने वाली मशीन में दोनों हाथ कोहनी तक कट गए थे। रेखा का नाम विकलांगता के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए भी भेजा जा चुका है।