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आज है माफी की रात, गुनाहों से कर लें तौबा
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अमरोहा। शबे बरात 28 मार्च की रात को मनाई जाएगी। इस रात को अहमियत बहुत अधिक है। अल्लाह की रहमत बरसती है। उलमा ने इस रात में इबादत करने की अपील की है। पूरे साल का हिसाब किताब होता है। गुनाहों से माफी मांगने को कहा है। रविवार को मगरिब से सोमवार (29 मार्च) की फज्र के पहले तक इबादत बहुत अहमियत रहती है।
शाबान की 14वीं रात गुनाहों से माफी की रात है। रविवार 28 मार्च को सूर्यास्त (मगरिब) के बाद अल्लाह तआला इस रात को बहुत मेहरबान रहते हैं। बंदों की दुआओं को कबूल करते हैं। मौलाना अकरम कासमी ने बताया कि इस रात को अल्लाह तआला गुनाहगारों को गुनाहों से निजात देता है। यह रात जाग कर इबादत करने वाली रात है। इस रात में कुरआन की तिलावत अधिक से अधिक करने को कहा है। इसके अलावा तस्बीह और तहलीम के साथ जिक्र करें। सदका निकालें। इसी रात को साल भर के हिसाब किताब होते हैं। उलमा ने कहा है कि कब्रिस्तान में कब्र पर फातिहा पर पढ़ें। दुनिया से रुख्सत हो चुके लोगों के लिए मगफिरत के लिए दुआ करें।
उलेमा बोलें, पटाखे नहीं छुड़ाएं, बाइकों से नहीं घूमें
पटाखें और शोर शराबा से बचें।
दूसरे लोग को तकलीफ पहुंचें, उसे कत्तई नहीं करें।
पटाखा छुड़ाना और आतिशबाजी बिल्कुल गलत है। यह नहीं करें।
बाइक और वाहनों से नहीं निकलें। घरों मे रहें, इबादत में रात गुजारें
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शाबान की 14वीं रात गुनाहों से माफी की रात है। रविवार 28 मार्च को सूर्यास्त (मगरिब) के बाद अल्लाह तआला इस रात को बहुत मेहरबान रहते हैं। बंदों की दुआओं को कबूल करते हैं। मौलाना अकरम कासमी ने बताया कि इस रात को अल्लाह तआला गुनाहगारों को गुनाहों से निजात देता है। यह रात जाग कर इबादत करने वाली रात है। इस रात में कुरआन की तिलावत अधिक से अधिक करने को कहा है। इसके अलावा तस्बीह और तहलीम के साथ जिक्र करें। सदका निकालें। इसी रात को साल भर के हिसाब किताब होते हैं। उलमा ने कहा है कि कब्रिस्तान में कब्र पर फातिहा पर पढ़ें। दुनिया से रुख्सत हो चुके लोगों के लिए मगफिरत के लिए दुआ करें।
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उलेमा बोलें, पटाखे नहीं छुड़ाएं, बाइकों से नहीं घूमें
पटाखें और शोर शराबा से बचें।
दूसरे लोग को तकलीफ पहुंचें, उसे कत्तई नहीं करें।
पटाखा छुड़ाना और आतिशबाजी बिल्कुल गलत है। यह नहीं करें।
बाइक और वाहनों से नहीं निकलें। घरों मे रहें, इबादत में रात गुजारें