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Amroha News: बेजुबानों के दर्द को अपना दर्द समझती हैं रोहिनी
Fri, 09 Oct 2026 12:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:18 AM IST
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अमरोहा। किसी बेजुबान के शरीर से खून बहता देख जहां लोग नजरें फेर लेते हैं, वहीं बड़ा बाजार निवासी रोहिनी टंडन उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ती हैं। घायल कुत्ता हो या सड़क पर पड़ा घोड़ा, बंदर, गाय अथवा कोई पक्षी, सूचना मिलते ही वह पुलिस-प्रशासन की मदद से उसका रेस्क्यू कराती हैं और जरूरत पड़ने पर अपने खर्च पर उपचार के लिए मुरादाबाद, बरेली और अलीगढ़ तक भेजती हैं। अब तक वह करीब 250 घायल पशु-पक्षियों का इलाज कराकर उनकी जान बचा चुकी हैं।
रोहिनी को बेजुबानों की सेवा की सीख अपने पिता विमल किशोर टंडन से मिली। माता-पिता बचपन से पहली रोटी गाय और दूसरी कुत्ते को खिलाने की सीख देते थे। यही संस्कार आगे चलकर उनकी जिंदगी का उद्देश्य बन गए। शादी के बाद पति विक्रांत किशोर भी उनके इस सेवा कार्य में पूरा सहयोग देते हैं। करीब पांच साल पहले मुरादाबाद में सड़क किनारे घायल घोड़ा पड़ा मिला। रोहिनी उसे अपने खर्च पर बरेली ले गईं और अस्पताल में भर्ती कराया। इसी घटना के बाद पीपुल फॉर एनिमल की अध्यक्ष करुणा शर्मा ने उन्हें संस्था से जोड़ा। रोहिनी बताती हैं कि शुरुआत में लोग उन्हें ताने देते और मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने परवाह नहीं की। करीब 80 कुत्ते, 38 गाय, 15 बंदर और आठ कबूतर समेत लगभग 250 पशु-पक्षियों का उपचार करा चुकी हैं। एक बार आंबेडकर पार्क के पास वाहन की चपेट में आए कुत्ते को मालिक जंगल में छोड़ आए। रोहिनी ने पुलिस की मदद लेने की चेतावनी दी तो मालिक उसे वापस लाए और फिर उसका इलाज कराया गया।
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रोहिनी को बेजुबानों की सेवा की सीख अपने पिता विमल किशोर टंडन से मिली। माता-पिता बचपन से पहली रोटी गाय और दूसरी कुत्ते को खिलाने की सीख देते थे। यही संस्कार आगे चलकर उनकी जिंदगी का उद्देश्य बन गए। शादी के बाद पति विक्रांत किशोर भी उनके इस सेवा कार्य में पूरा सहयोग देते हैं। करीब पांच साल पहले मुरादाबाद में सड़क किनारे घायल घोड़ा पड़ा मिला। रोहिनी उसे अपने खर्च पर बरेली ले गईं और अस्पताल में भर्ती कराया। इसी घटना के बाद पीपुल फॉर एनिमल की अध्यक्ष करुणा शर्मा ने उन्हें संस्था से जोड़ा। रोहिनी बताती हैं कि शुरुआत में लोग उन्हें ताने देते और मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने परवाह नहीं की। करीब 80 कुत्ते, 38 गाय, 15 बंदर और आठ कबूतर समेत लगभग 250 पशु-पक्षियों का उपचार करा चुकी हैं। एक बार आंबेडकर पार्क के पास वाहन की चपेट में आए कुत्ते को मालिक जंगल में छोड़ आए। रोहिनी ने पुलिस की मदद लेने की चेतावनी दी तो मालिक उसे वापस लाए और फिर उसका इलाज कराया गया।
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