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वेतन को लगाई अर्जी तो महिला को भेजा रिटायरमेंट का नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 26 Sep 2016 02:20 AM IST
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इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से गांव में विकास कार्य ठप पड़ गया है।
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लापरवाही सामने आने के बाद अब बिजली विभाग के अफसर करतूत छिपाने के हथकंडे अपनाते नजर आ रहे हैं। जब महिलाकर्मी ने जुलाई का वेतन दिलाने के लिए महकमे में अर्जी लगाई तो आनन-फानन में अफसरों ने उसके घर रिटायरमेंट का नोटिस भिजवा दिया।
हैरानी की बात ये है कि जो नोटिस सेवानिवृत्ति से छह माह पहले मिलना था, वह डेढ़ साल बाद उसके घर अधिकारियों ने भिजवाया। वहीं एक माह का वेतन अधिकारियों ने रोक दिया है, जबकि जून तक का वेतन देने के साथ ही उसका पीएफ भी काटा गया है।
बिजली विभाग में कूली पद पर तैनात किश्वरी बेगम पत्नी छोटे खां की सेवानिवृत्ति की तारीख 30 जून 2015 थी, लेकिन अफसरों ने उससे 4 अगस्त 2016 तक नौकरी कराई। इसके बाद मौखिक तौर पर बता दिया गया कि उसका रिटायरमेंट 30 जून 2015 में हो चुका है।
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अचानक ये बात सुनकर वह सन्न रह गई, बगैर किसी नोटिस के अधिकारियों ने उसको यह खबर दी। 60 की बजाय 61 साल तक विभाग में नौकरी कराई। अब जब उसने जुलाई का वेतन दिलाने के लिए 16 अगस्त को विभाग में प्रार्थना पत्र दिया तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
वेतन दिलाने की बजाय अफसरों ने गर्दन को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया, लेकिन भूल गए कि गलती दर गलती हो रही है। अपने ही कारनामे में उलझते जा रहे हैं। जी हां, अधिकारियों ने 17 अगस्त को रजिस्टर्ड डाक से उसके घर पर सेवानिवृत्ति का नोटिस भेज दिया, जो उसको 19 अगस्त को प्राप्त हुआ, जिसमें महिला कर्मी को लिखित सूचना प्राप्त हुई कि वह 30 जून 2015 को सेवानिवृत्त हो गई है।
अब अफसरों से कोई पूछे कि डेढ़ साल बाद उसको क्यों नोटिस दिया गया, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। बहरहाल अधिकारियों ने महिला कर्मी की पेंशन, पीएफ व अन्य देयों के भुगतान पर रोक लगा दी है।
वरिष्ठ नागरिक से कैसे कराई नौकरी
अमरोहा। मान लिया जाए कि बिजली विभाग में तैनात किशवरी बेगम 30 जून 2016 को रिटायर्ड हो गईं। उनकी उम्र साठ साल हो गई, लेकिन सवाल है कि विभागीय अफसर उनसे काम क्यों कराते रहे। वह तो सीनियर सिटीजन हो चुकी थीं। नियम है कि किसी भी वरिष्ठ नागरिक से सरकार काम नहीं ले सकती, मगर विभाग ने तो उनसे साल भर कार्य कराया और वेतन भी दिया, कैसे।
एक्सईएन ने तो कोई बात ही नहीं सुनी
अमरोहा। किश्वरी बेगम के बेटे जनाबे आलम की बात पर यकीन करें तो उसने एक्सईएन दीपक अग्रवाल से शिकायत की थी, लेकिन वे तो सुनने को ही तैयार नहीं हुए। अपनी बात ही कहते रहे, किन्तु मेरे एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया। आरटीआई के जरिए सवालों का जवाब मांगा तो भी गोलमोल ही उत्तर दिया। मेरे पास उपस्थिति पंजिका है, जिसमें मां की ड्यूटी करने का पूरा ब्यौरा है।
अफसरों ने अगर मां किश्वरी बेगम की पेंशन या अन्य किसी फंड से रुपये की वसूली की तो वह इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, क्योंकि पूरी गलती अफसरों की है। ठीकरा अगर वह दूसरे पर फोड़ेंगे तो न्याय के लिए कोर्ट की शरण में जाना ही बेहतर विकल्प है। जनाबे आलम, महिला कर्मी का बेटा
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हैरानी की बात ये है कि जो नोटिस सेवानिवृत्ति से छह माह पहले मिलना था, वह डेढ़ साल बाद उसके घर अधिकारियों ने भिजवाया। वहीं एक माह का वेतन अधिकारियों ने रोक दिया है, जबकि जून तक का वेतन देने के साथ ही उसका पीएफ भी काटा गया है।
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बिजली विभाग में कूली पद पर तैनात किश्वरी बेगम पत्नी छोटे खां की सेवानिवृत्ति की तारीख 30 जून 2015 थी, लेकिन अफसरों ने उससे 4 अगस्त 2016 तक नौकरी कराई। इसके बाद मौखिक तौर पर बता दिया गया कि उसका रिटायरमेंट 30 जून 2015 में हो चुका है।
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अचानक ये बात सुनकर वह सन्न रह गई, बगैर किसी नोटिस के अधिकारियों ने उसको यह खबर दी। 60 की बजाय 61 साल तक विभाग में नौकरी कराई। अब जब उसने जुलाई का वेतन दिलाने के लिए 16 अगस्त को विभाग में प्रार्थना पत्र दिया तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
वेतन दिलाने की बजाय अफसरों ने गर्दन को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया, लेकिन भूल गए कि गलती दर गलती हो रही है। अपने ही कारनामे में उलझते जा रहे हैं। जी हां, अधिकारियों ने 17 अगस्त को रजिस्टर्ड डाक से उसके घर पर सेवानिवृत्ति का नोटिस भेज दिया, जो उसको 19 अगस्त को प्राप्त हुआ, जिसमें महिला कर्मी को लिखित सूचना प्राप्त हुई कि वह 30 जून 2015 को सेवानिवृत्त हो गई है।
अब अफसरों से कोई पूछे कि डेढ़ साल बाद उसको क्यों नोटिस दिया गया, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। बहरहाल अधिकारियों ने महिला कर्मी की पेंशन, पीएफ व अन्य देयों के भुगतान पर रोक लगा दी है।
वरिष्ठ नागरिक से कैसे कराई नौकरी
अमरोहा। मान लिया जाए कि बिजली विभाग में तैनात किशवरी बेगम 30 जून 2016 को रिटायर्ड हो गईं। उनकी उम्र साठ साल हो गई, लेकिन सवाल है कि विभागीय अफसर उनसे काम क्यों कराते रहे। वह तो सीनियर सिटीजन हो चुकी थीं। नियम है कि किसी भी वरिष्ठ नागरिक से सरकार काम नहीं ले सकती, मगर विभाग ने तो उनसे साल भर कार्य कराया और वेतन भी दिया, कैसे।
एक्सईएन ने तो कोई बात ही नहीं सुनी
अमरोहा। किश्वरी बेगम के बेटे जनाबे आलम की बात पर यकीन करें तो उसने एक्सईएन दीपक अग्रवाल से शिकायत की थी, लेकिन वे तो सुनने को ही तैयार नहीं हुए। अपनी बात ही कहते रहे, किन्तु मेरे एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया। आरटीआई के जरिए सवालों का जवाब मांगा तो भी गोलमोल ही उत्तर दिया। मेरे पास उपस्थिति पंजिका है, जिसमें मां की ड्यूटी करने का पूरा ब्यौरा है।
अफसरों ने अगर मां किश्वरी बेगम की पेंशन या अन्य किसी फंड से रुपये की वसूली की तो वह इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, क्योंकि पूरी गलती अफसरों की है। ठीकरा अगर वह दूसरे पर फोड़ेंगे तो न्याय के लिए कोर्ट की शरण में जाना ही बेहतर विकल्प है। जनाबे आलम, महिला कर्मी का बेटा