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Amroha News: सरकारी दफ्तरों में निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध
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अमरोहा। सरकारी दफ्तरों में निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग के शिकायत के बाद परिवहन आयुक्त ने इस तरह के वाहनों का संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही अधिकारियों को निरीक्षण कर कार्रवाई करने के लिए कहा है। ये निर्देश अमरोहा के रहने वाले सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य अनिल कुमार जग्गा की शिकायत के बाद दिए गए हैं। अब जिन विभागों में निजी वाहनों को व्यावसायिक के तौर पर लगा रखा था उन में खलबली मची हुई है। आयुक्त ने भी स्पष्ट कर दिया है कि निजी उपयोग में पंजीकृत है और उसे व्यावसायिक में उपयोग किया जा रहा है तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई करें।
प्राइवेट वाहनों को किराए पर चलाने के लिए उसका टैक्सी परमिट लेना होता है, लेकिन जिले में बिना टैक्सी परमिट लिए कई गाड़ियां चल रही है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी अधिकारी भी इन प्राइवेट गाड़ियों का टैक्सी की तरह प्रयोग कर रहे हैं। कई ऐसे विभाग हैं, जहां पर प्राइवेट वाहन का उपयोग किया जा रहा है। इन वाहनों का टैक्सी के हिसाब से किराया दर्शाया जाता है, लेकिन एक भी वाहन टैक्सी परमिट में वैध नहीं है। दरअसल, सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के प्रयोग के लिए टैक्सी गाड़ियों को ठेके पर लेकर चलाया जाता है। कई विभागों में नई गाड़ियां चल रही है। इन वाहनों के मालिकों को प्रति किमी या मासिक किराया का भुगतान किया जाता है। नियमानुसार इस काम के लिए केवल टैक्सी परमिट गाड़ियों का ही इस्तेमाल की जानी है, लेकिन कुछ दफ्तरों में इस नियम की अनदेखी की जा रही है। सरकारी कार्यालयों में टैक्सी के रूप में प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल से परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान होता है। लेकिन अधिकारियों की उपेक्षा के चलते इन गाड़ी संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। कार्रवाई से बचने के लिए काट भी निकाल रखा है। कुछ जगहों पर इन गाड़ियों का निजी कार्य में प्रयोग दिखाकर बिल पास करा लिया जाता है तो कुछ जगहों पर टैक्सी परमिट वाहन मालिकों से बिल लेकर जमा कर दिया जाता है।
ये है निजी और टैक्सी वाहनों की पहचान
टैक्सी और निजी वाहनों की पहचान के लिए परिवहन विभाग ने दोनों के नंबर प्लेट के रंग को अलग-अलग किया है। निजी वाहनों पर सफेद प्लेट पर काले रंग से नंबर लिखे होते हैं जबकि टैक्सी वाहनों क नंबर प्लेट पीली रंगी होती है।
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सरकारी कार्यालयों में प्राइवेट नंबर की गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इस तरह की शिकायत सामने आई हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो इससे विभाग को राजस्व की क्षति हो रही है। इस संबंध में परिवहन आयुक्त के दिशा निर्देश मिले हैं उन्होंने निजी वाहन को कामर्शियल के प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। मामला सामने आने के बाद इस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
महेश कुमार शर्मा, एआरटीओ
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प्राइवेट वाहनों को किराए पर चलाने के लिए उसका टैक्सी परमिट लेना होता है, लेकिन जिले में बिना टैक्सी परमिट लिए कई गाड़ियां चल रही है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी अधिकारी भी इन प्राइवेट गाड़ियों का टैक्सी की तरह प्रयोग कर रहे हैं। कई ऐसे विभाग हैं, जहां पर प्राइवेट वाहन का उपयोग किया जा रहा है। इन वाहनों का टैक्सी के हिसाब से किराया दर्शाया जाता है, लेकिन एक भी वाहन टैक्सी परमिट में वैध नहीं है। दरअसल, सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के प्रयोग के लिए टैक्सी गाड़ियों को ठेके पर लेकर चलाया जाता है। कई विभागों में नई गाड़ियां चल रही है। इन वाहनों के मालिकों को प्रति किमी या मासिक किराया का भुगतान किया जाता है। नियमानुसार इस काम के लिए केवल टैक्सी परमिट गाड़ियों का ही इस्तेमाल की जानी है, लेकिन कुछ दफ्तरों में इस नियम की अनदेखी की जा रही है। सरकारी कार्यालयों में टैक्सी के रूप में प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल से परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान होता है। लेकिन अधिकारियों की उपेक्षा के चलते इन गाड़ी संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। कार्रवाई से बचने के लिए काट भी निकाल रखा है। कुछ जगहों पर इन गाड़ियों का निजी कार्य में प्रयोग दिखाकर बिल पास करा लिया जाता है तो कुछ जगहों पर टैक्सी परमिट वाहन मालिकों से बिल लेकर जमा कर दिया जाता है।
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ये है निजी और टैक्सी वाहनों की पहचान
टैक्सी और निजी वाहनों की पहचान के लिए परिवहन विभाग ने दोनों के नंबर प्लेट के रंग को अलग-अलग किया है। निजी वाहनों पर सफेद प्लेट पर काले रंग से नंबर लिखे होते हैं जबकि टैक्सी वाहनों क नंबर प्लेट पीली रंगी होती है।
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सरकारी कार्यालयों में प्राइवेट नंबर की गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इस तरह की शिकायत सामने आई हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो इससे विभाग को राजस्व की क्षति हो रही है। इस संबंध में परिवहन आयुक्त के दिशा निर्देश मिले हैं उन्होंने निजी वाहन को कामर्शियल के प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। मामला सामने आने के बाद इस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
महेश कुमार शर्मा, एआरटीओ