{"_id":"659fc7caa72e63e5ce0818e5","slug":"ram-mandir-ram-devotees-were-full-enthusiasm-karsevaks-everywhere-there-was-strict-police-guard-ayodhya-2024-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ram Mandir: उत्साह और उमंग से लबरेज थे रामभक्त, हर तरफ दिख रहे थे कारसेवक, अयोध्या में था पुलिस का कड़ा पहरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ram Mandir: उत्साह और उमंग से लबरेज थे रामभक्त, हर तरफ दिख रहे थे कारसेवक, अयोध्या में था पुलिस का कड़ा पहरा
Thu, 11 Jan 2024 04:20 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 11 Jan 2024 04:20 PM IST
सार
राम मंदिर आंदोलन का अमरोहा से गहरा नाता रहा है। स्थानीय कारसेवकों ने अयोध्या जाकर आंदोलन को मजबूती दी थी। उन्होंने बताया कि इसकी नींव 1984 में मुरादाबाद में हुए हिंदू सम्मेलन के दौरान रखी गई थी। इसके बाद जगह-जगह तैयारियों के लिए सम्मेलन आयोजित किए गए थे।
विज्ञापन
अमरोहा के कार सेवक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्री राम मंदिर के संघर्ष में शामिल रहे राम भक्तों का लंबे अरसे बाद सपना साकार हो रहा है। जिसको लेकर लोगों में अलग ही उत्साह और उमंग दिखाई दे रही है। उस समय मुरादाबाद का हिस्सा रहे अमरोहा का भी राम मंदिर आंदोलन से गहरा नाता रहा है। बड़ी संख्या में यहां के लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में भाग लेकर कार सेवा में सहयोग किया था।
विज्ञापन
अब मंदिर में श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का समय समय जैसे नजदीक आ रहा है, कार सेवा में सहयोग करने वाले राम भक्तों का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। अमरोहा निवासी रोहिताश विद्यार्थी बताते हैं कि वह उस समय बजरंग दल के संयोजक के रूप में कार्य कर रहे थे। राम मंदिर आंदोलन को लेकर लोगों में एक अलग ही उत्साह था।
विज्ञापन
वह भी कार सेवा के लिए अयोध्या पहुंचे थे। क्रिकेटर एवं भाजपा नेता रहे चेतन चौहान के नेतृत्व में करीब 700 से 800 लोगों का जत्था ट्रेन की तीन बोगियों में सवार होकर अयोध्या पहुंचा था। अयोध्या में हर तरफ कारसेवकों का हुजूम दिखाई दे रहा था। लाखों लोगों की भीड़ अयोध्या पहुंच चुकी थी।
विज्ञापन
सुबह साढ़े 11 बजे कार सेवक अपने अभियान में सफल हो गए। अयोध्या में चारों तरफ पुलिस का सख्त पहरा था। वह बताते हैं कि अयोध्या जाने से पहले उनको परिजनों एवं गुरुजनों ने काफी रोकने का प्रयास किया, लेकिन उनका मन नहीं माना और वह अपने अन्य साथियों के साथ अयोध्या के लिए रवाना हो गए।
उनके अनुसार अयोध्या के आंदोलन की नींव 1984 में मुरादाबाद में हुए हिंदू सम्मेलन के दौरान रखी गई थी। जिसके बाद जगह जगह तैयारियों के लिए सम्मेलन आयोजित किए गए। मोहल्ला लकड़ा चौराहा निवासी सुशील अग्रवाल बताते हैं कि उस समय राम मंदिर आंदोलन को लेकर युवा उत्साह से लबरेज थे।
वह अपने दूसरे साथियों के साथ पांच दिसंबर को अयोध्या के लिए रवाना हुए। वहां करीब पांच से छह लाख लोगों की भीड़ जमा थी। यहां से भी करीब 300 लोगों का जत्था अयोध्या पहुंचा था। वह भी अपने साथियों के साथ श्रीराम मंदिर स्थान पर पहुंच गए थे। होली और दिवाली एक साथ मनाई जा रही थी। इस दौरान वह वहां चोटिल भी हो गए थे।