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Amroha News: 1.14 करोड़ रुपये से सहेजा जाएगा बारिश का पानी, योजना तैयार
Tue, 27 May 2025 01:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 27 May 2025 01:53 AM IST
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अमरोहा। जनपद के गिरते भूजल स्तर को कम करने के लिए बारिश का जल सहेजने की कवायद शुरू की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत जिले में 35 सार्वजनिक भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने की योजना है।
इसके लिए 1.14 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा। इसके निर्माण से हर साल बड़ी तादाद में पानी को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा। बेंइतहा पानी का दोहन होने से हर साल भूजल स्तर पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जल संचयन न होने के कारण भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। आलम यह है कि बरसात के बाद भी भूजल के स्तर में अपेक्षा के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए लघु सिंचाई विभाग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले को मिले लक्ष्य के तहत 35 सार्वजनिक भवनों पर बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत इनका निर्माण शुरू कराया जाएगा। जिससे बारिश के मौसम में बड़ी तादाद में पानी बेकार बहने के बजाय फिर से जमीन के अंदर पहुंचाया जा सकेगा।
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एक सिस्टम पर खर्च होंगे 3.26 लाख
योजना के तहत सरकार की ओर से 1.14 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। एक सिस्टम को तैयार करने में 3.26 लाख रुपये का खर्च आएगा। सार्वजनिक जगहों जैसे कलक्ट्रेट परिसर, डीसीओ कार्यालय परिसर, सीएमओ कार्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय बसेड़ा तगा, ऑफिसर्स हॉस्टल समेत कई राजकीय इंटर कॉलेजों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत काम किया जाएगा।
क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
बरसात के मौसम में बारिश का पानी सड़कों व नालों में बहकर बर्बाद होता है। इसी पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए सहेज कर फिर से भूमि के अंदर पहुंचाया जाता है। जिससे जल निकासी की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही भूजल के स्तर को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
जोया और हसनपुर ब्लॉक में भूजल स्तर सबसे नीचे
जिले में भूजल स्तर की स्थिति ठीक नहीं है। भूगर्भ जल विभाग के अनुसार मानसून से पहले साल 2024 में हसनपुर का भूजल स्तर जहां 17.98 एमबीजीएल था। वहीं, मानसून के बाद जलस्तर 16.11 एमबीजीएल हो गया। जोया ब्लॉक में 2024 में मानसून से पहले भूजल स्तर जहां 17.23 एमबीजीएल था। वहीं मानसून के बाद 16.87 एमबीजीएल दर्ज किया गया। जोया और हसनपुर ब्लॉक अतिदोहित क्षेत्र में आते हैं। पिछले पांच सालों में इन दोनों ब्लॉक की स्थिति लगातार बदतर हो रही है। 2019 में जोया ब्लॉक में जहां मानसून से पहले भूजल स्तर 15.39 एमबीजीएल था, 2024 आते-आते वह 17.23 तक पहुंच गया। जबकि, मानसून के बाद इसमें थोड़ा बढ़ोतरी होकर 16.87 दर्ज हुआ। हसनपुर में 2019 में मानसून से पहले भूजल स्तर 13.51 था, वहीं 2024 में मानसून से पहले भूजल स्तर और नीचे पहुंच गया। 2024 में यहां भूजल का स्तर 17.98 दर्ज हुआ था। जबकि मानसून के बाद 16.11 दर्ज हुआ था। अब फिलहाल फिर से इसके सर्वे का काम चल रहा है। सर्वे के बाद भूजल की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
- मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत जिले में 35 सार्वजनिक भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार कराया जाना है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। जल्द ही इसका काम शुरू करा दिया जाएगा।
- विपिन त्यागी, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
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इसके लिए 1.14 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा। इसके निर्माण से हर साल बड़ी तादाद में पानी को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा। बेंइतहा पानी का दोहन होने से हर साल भूजल स्तर पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जल संचयन न होने के कारण भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। आलम यह है कि बरसात के बाद भी भूजल के स्तर में अपेक्षा के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए लघु सिंचाई विभाग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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जिले को मिले लक्ष्य के तहत 35 सार्वजनिक भवनों पर बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत इनका निर्माण शुरू कराया जाएगा। जिससे बारिश के मौसम में बड़ी तादाद में पानी बेकार बहने के बजाय फिर से जमीन के अंदर पहुंचाया जा सकेगा।
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एक सिस्टम पर खर्च होंगे 3.26 लाख
योजना के तहत सरकार की ओर से 1.14 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। एक सिस्टम को तैयार करने में 3.26 लाख रुपये का खर्च आएगा। सार्वजनिक जगहों जैसे कलक्ट्रेट परिसर, डीसीओ कार्यालय परिसर, सीएमओ कार्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय बसेड़ा तगा, ऑफिसर्स हॉस्टल समेत कई राजकीय इंटर कॉलेजों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत काम किया जाएगा।
क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
बरसात के मौसम में बारिश का पानी सड़कों व नालों में बहकर बर्बाद होता है। इसी पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए सहेज कर फिर से भूमि के अंदर पहुंचाया जाता है। जिससे जल निकासी की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही भूजल के स्तर को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
जोया और हसनपुर ब्लॉक में भूजल स्तर सबसे नीचे
जिले में भूजल स्तर की स्थिति ठीक नहीं है। भूगर्भ जल विभाग के अनुसार मानसून से पहले साल 2024 में हसनपुर का भूजल स्तर जहां 17.98 एमबीजीएल था। वहीं, मानसून के बाद जलस्तर 16.11 एमबीजीएल हो गया। जोया ब्लॉक में 2024 में मानसून से पहले भूजल स्तर जहां 17.23 एमबीजीएल था। वहीं मानसून के बाद 16.87 एमबीजीएल दर्ज किया गया। जोया और हसनपुर ब्लॉक अतिदोहित क्षेत्र में आते हैं। पिछले पांच सालों में इन दोनों ब्लॉक की स्थिति लगातार बदतर हो रही है। 2019 में जोया ब्लॉक में जहां मानसून से पहले भूजल स्तर 15.39 एमबीजीएल था, 2024 आते-आते वह 17.23 तक पहुंच गया। जबकि, मानसून के बाद इसमें थोड़ा बढ़ोतरी होकर 16.87 दर्ज हुआ। हसनपुर में 2019 में मानसून से पहले भूजल स्तर 13.51 था, वहीं 2024 में मानसून से पहले भूजल स्तर और नीचे पहुंच गया। 2024 में यहां भूजल का स्तर 17.98 दर्ज हुआ था। जबकि मानसून के बाद 16.11 दर्ज हुआ था। अब फिलहाल फिर से इसके सर्वे का काम चल रहा है। सर्वे के बाद भूजल की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
- मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत जिले में 35 सार्वजनिक भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार कराया जाना है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। जल्द ही इसका काम शुरू करा दिया जाएगा।
- विपिन त्यागी, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग