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हाईवे जाम कर किसानों ने फूंकी कृषि कानून की प्रतियां
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रजबपुर(अमरोहा)। नए कृषि कानूनों के संसद में पास होने का एक साल पूरा होने पर किसानों ने कृषि कानून की प्रतियां फूंककर विरोध जताया। आंदोलनकारी किसानों ने जोया टोल प्लाजा और पूर्व सांसद के फार्म हाउस पर तीनों नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। सरकार पर उद्योगपतियों के पक्ष में कानून बनाने का आरोप लगाया। साथ ही किसानों पर लगे मुकदमे वापस लेने की मांग की। किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। किसानों की उग्रता देख प्रशासन ने कलक्ट्रेट, भाजपा कार्यालय और टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात किया। इस दौरान करीब आधा घंटा हाईवे पर किसानों को कब्जा रहा। हालांकि इस दौरान वाहनों की आवाजाही में रुकावट नहीं आई।
शनिवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष चौधरी रामपाल सिंह के नेतृत्व में किसानों का धरना दसवें दिन भी जारी रहा। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत तमाम किसान हाईवे पर एकत्र हुए। यहां तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि कुछ किसानों ने पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर के फार्म हाउस के सामने प्रतियां जलाईं। किसानों ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों से पूरा देश कोरोना महामारी झेल रहा है। कोरोना काल में केंद्र सरकार ने उद्योगपतियों के पक्ष में तीन कृषि कानून लागू कर दिए, जो किसान हित में नहीं है। कानूनों के विरोध में पिछले छह महीने से किसान दिल्ली के अलग-अलग सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें करीब 500 से अधिक किसान शहीद हो गए हैं। बावजूद इसके सरकार सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए तीनों के कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। किसानों के सुझावों से नए कानून लाए जाएं, जो किसान हितों में लाभकारी सिद्ध हों। मांग करते हुए कहा कि आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस किए जाएं। साठ साल उम्र पार कर चुके किसानों को 5000 रुपये वृद्धा पेंशन दी जाए। सभी फसलों की खरीद एमएसपी पर सुनिश्चित की जाए। भारत सरकार एमएसपी से कम खरीद पर सजा का प्रावधान करें। किसान क्रेडिट कार्ड का एकमुश्त संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए आदि मांगे मुख्य रहीं। किसानों ने धरनास्थल पर मौजूद अमरोहा सदर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान योगेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, सचिन कुमार, नरेश सिंह, मुकेश कुमार, सत्यदेव सिंह, ध्यान सिंह, समर पाल सिंह, मोहम्मद उमर, राकेश गिल, मनोज कुमार, पूरन सिंह, योगेंद्र चौधरी, सर्वेश चौधरी आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष चौधरी रामपाल सिंह के नेतृत्व में किसानों का धरना दसवें दिन भी जारी रहा। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत तमाम किसान हाईवे पर एकत्र हुए। यहां तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि कुछ किसानों ने पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर के फार्म हाउस के सामने प्रतियां जलाईं। किसानों ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों से पूरा देश कोरोना महामारी झेल रहा है। कोरोना काल में केंद्र सरकार ने उद्योगपतियों के पक्ष में तीन कृषि कानून लागू कर दिए, जो किसान हित में नहीं है। कानूनों के विरोध में पिछले छह महीने से किसान दिल्ली के अलग-अलग सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें करीब 500 से अधिक किसान शहीद हो गए हैं। बावजूद इसके सरकार सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए तीनों के कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। किसानों के सुझावों से नए कानून लाए जाएं, जो किसान हितों में लाभकारी सिद्ध हों। मांग करते हुए कहा कि आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस किए जाएं। साठ साल उम्र पार कर चुके किसानों को 5000 रुपये वृद्धा पेंशन दी जाए। सभी फसलों की खरीद एमएसपी पर सुनिश्चित की जाए। भारत सरकार एमएसपी से कम खरीद पर सजा का प्रावधान करें। किसान क्रेडिट कार्ड का एकमुश्त संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए आदि मांगे मुख्य रहीं। किसानों ने धरनास्थल पर मौजूद अमरोहा सदर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान योगेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, सचिन कुमार, नरेश सिंह, मुकेश कुमार, सत्यदेव सिंह, ध्यान सिंह, समर पाल सिंह, मोहम्मद उमर, राकेश गिल, मनोज कुमार, पूरन सिंह, योगेंद्र चौधरी, सर्वेश चौधरी आदि मौजूद रहे।
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