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Amroha News: चौकी बनाकर गंगा पार के अपराधियों और भूमाफिया पर शिकंजा कसेगी पुलिस
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गजरौला। साल दर साल हत्याओं से दहल रहे गंगा पार के गांवों में अपराध पर लगाम लगाने व भू माफिया पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अफसर चौकी स्थापित करने पर मंथन कर रहे हैं। गंगा पार बसे अमरोहा जिले के गांवों में पहुंचने के लिए सीधा रास्ता नहीं होना भी पुलिस को टेंशन देता है। समय भी अधिक लगता है। पुलिस पहुंचने तक अपराधी वारदात को अंजाम देकर साफ निकल जाते हैं।
लठीरा, लठीरा की मढ़ैयों, गोपाल के घेर, फरीदपुर एहतमाली, बसंतपुर और गुलालपुर गांव अमरोहा जिले के हैं। जिनका थाना गजरौला और तहसील मंडी धनौरा है। गजरौला से इन गांवों की दूरी 30 से 40 किमी तक है, जबकि गढ़मुक्तेश्वर तहसील व थाना आठ से दस किमी पड़ता है। इसके अलावा कोई सीधा रास्ता भी नहीं है। जिससे पुलिस को पहुंचने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। पुलिस की पहुंच नहीं होने के कारण अपराधी वारदात को अंजाम देकर बच निकलते हैं। वन विभाग की ग्राम पंचायत की हजारों बीघे जमीन है। जिस पर माफिया की नजर रहती है।
भूमि पर कब्जे को लेकर हर साल गंगा का खादर हत्याओं से दहल उठता है। भू माफिया की कमर तोड़ने व अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस गंगा पार किसी गांव में पुलिस चौकी स्थापित करने पर विचार कर रही है। लठीरा के प्रधान पपेश कुमार राणा का कहना है कि चौकी बन जाने पर अपराध नियंत्रण के साथ ही भू माफिया पर भी अंकुश लगेगा।
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सीओ श्वेताभ भास्कर का कहना है कि पहले गंगा पार की वह जमीन चिह्नित हो जाए, जिस पर कब्जे को लेकर खून खराबा होता है। इसके बाद चौकी बनाई जाएगी। अफसरों से मंथन चल रहा है।
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ऐसे गांव, जहां जाने के लिए पार करना पड़ता है हापुड़ जिला
गजरौला। गंगा पार बसे लठीरा, लठीरा की मढ़ैयों, गोपाल के घेर, फरीदपुर एहतमाली, बसंतपुर और गुलालपुर गांव। जहां पहुंचने लिए हापुड़ की सीमा में दाखिल होना पड़ता है। सबसे पहले ब्रजघाट पार करेंगे। इसके बाद अल्लाबख्शपुर के सामने से रेलवे फाटक को पार कर गढ़मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर, नक्का कुआं के सामने से गुजरना पड़ता है। गुलालपुर के जंगल तक पहुंचने के लिए वन विभाग के बीच से गुजरना पड़ता है। जंगल में एक जैसे कई रास्ते आते हैं। जिनके कारण भटक जाने का डर बना रहता है। थाने के पुलिसकर्मी गांवों में जाने से कतराते हैं।
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लठीरा, लठीरा की मढ़ैयों, गोपाल के घेर, फरीदपुर एहतमाली, बसंतपुर और गुलालपुर गांव अमरोहा जिले के हैं। जिनका थाना गजरौला और तहसील मंडी धनौरा है। गजरौला से इन गांवों की दूरी 30 से 40 किमी तक है, जबकि गढ़मुक्तेश्वर तहसील व थाना आठ से दस किमी पड़ता है। इसके अलावा कोई सीधा रास्ता भी नहीं है। जिससे पुलिस को पहुंचने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। पुलिस की पहुंच नहीं होने के कारण अपराधी वारदात को अंजाम देकर बच निकलते हैं। वन विभाग की ग्राम पंचायत की हजारों बीघे जमीन है। जिस पर माफिया की नजर रहती है।
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भूमि पर कब्जे को लेकर हर साल गंगा का खादर हत्याओं से दहल उठता है। भू माफिया की कमर तोड़ने व अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस गंगा पार किसी गांव में पुलिस चौकी स्थापित करने पर विचार कर रही है। लठीरा के प्रधान पपेश कुमार राणा का कहना है कि चौकी बन जाने पर अपराध नियंत्रण के साथ ही भू माफिया पर भी अंकुश लगेगा।
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सीओ श्वेताभ भास्कर का कहना है कि पहले गंगा पार की वह जमीन चिह्नित हो जाए, जिस पर कब्जे को लेकर खून खराबा होता है। इसके बाद चौकी बनाई जाएगी। अफसरों से मंथन चल रहा है।
ऐसे गांव, जहां जाने के लिए पार करना पड़ता है हापुड़ जिला
गजरौला। गंगा पार बसे लठीरा, लठीरा की मढ़ैयों, गोपाल के घेर, फरीदपुर एहतमाली, बसंतपुर और गुलालपुर गांव। जहां पहुंचने लिए हापुड़ की सीमा में दाखिल होना पड़ता है। सबसे पहले ब्रजघाट पार करेंगे। इसके बाद अल्लाबख्शपुर के सामने से रेलवे फाटक को पार कर गढ़मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर, नक्का कुआं के सामने से गुजरना पड़ता है। गुलालपुर के जंगल तक पहुंचने के लिए वन विभाग के बीच से गुजरना पड़ता है। जंगल में एक जैसे कई रास्ते आते हैं। जिनके कारण भटक जाने का डर बना रहता है। थाने के पुलिसकर्मी गांवों में जाने से कतराते हैं।