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Amroha News: आधुनिकता के दौर में होली की पुरानी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं पाल गांव के ग्रामीण

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:41 AM IST
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People of Pal village are keeping alive the old tradition of Holi.
होली की पुरानी परंपरा को जिंदा रखे हैं पाल गांव के लोग
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गजरौला। क्षेत्र का गांव पाल के ग्रामीण अपनी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं। गांव में होली आज भी परंपरागत तरीके से मनाई जाती है। होली पर बम (बड़ा नगाड़ा) की थाप के साथ गाए जाने वाले गीतों और फाग की गूंज आस पास के गांवाें तक जाती है। बम की थाप की आवाज कानों में आते ही पुराने दिनों की याद ताजा हो जाती है। गांव में शोक एकादशी से बम बजाना शुरू हो जाता है।
आधुनिकता के दौर में जहां त्योहार मनाने का तरीका बदल गया है। लोग औपचारिकता ही निभा रहे हैं, वहीं नगर से करीब चार किमी उत्तर-पश्चिम में बसे पाल गांव के ग्रामीणों ने अपनी परंपरा को सहेज कर रखा है। गांव में होली बजाने के लिए एक सार्वजनिक बम है। जिसे दशकों पूर्व ग्रामीणों ने चंदा एकत्र करके खरीदा था। गांव के छोटे सिंह, मंगल सिंह, कूड़े सिंह, भरत सिंह, हेतराम सिंह, अमीचंद सिंह बड़ी लय के साथ बम बजाते हैं।
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बम बजाने वाले ग्रामीणों का कहना है कि शोक एकादशी से इस यंत्र को बजाने का क्रम शुरू हो जाता है। बम को ट्रैक्टर ट्राली या बुग्गी में रखकर पूरे गांव में घुमाया जाता है। उसके साथ होली गाने वाली टोली चारों तरफ घूम कर होली के गीत व फाग गाती है।
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ग्रामीण बताते हैं कि बीती होली के बाद जिस घर में किसी की मौत हो जाती है, उसके घर या बैठक पर जाकर बम बजाते हुए होली के शोक गीत गाते हैं। जिसके बाद उस शोक संतृप्त परिवार के सदस्य अन्य खुशी के कार्यों में शामिल होते हैं। ग्राम प्रधान पति वीर सिंह भगत कहते हैं कि अपनी परंपरा को जिंदा रखने के लिए ही गांव में मिलकर बम बजाई जाती है। गांव की युवा पीढ़ी को भी होली पर बम बजाने का बेसब्री से इंतजार रहता है। बुधवार को शोक एकादशी पर पूरे दिन बम बजाई जाएगी। इसके बाद से शाम को रोजाना ग्रामीण बम पर होली की तैयारी करेंगे।






अपने पूर्वजों की याद को समेटे हुए हैं होली के गीत
होलिका दहन से अगले दिन रंग खेला जाता है। सुबह को एक दूसरे के माथे पर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी जाती हैं। इसके बाद होली का गाने का कार्यक्रम शुरू हो जाता है। होली गाने वाली टीम के कलाकार दो भागों में होते हैं। जिस लाइन को पहली टोली के कलाकार गायन शैली में बोलते हैं, उसे ही पीछे गाने वाले टोली के सदस्य ऊंची आवाज में गाते हैं। होली गाने की आवाज दूर-दूर तक जाती है। चंदनपुर निवासी हरपाल सिंह प्रधान, फूलपुर के मुंशी सिंह, चकनवाला के जयचंद सिंह, मुरादपुर के जगपाल सिंह, दौलतपुर के लोकेश विधूड़ी, रामचरन सैनी, मंगरौला के सुरेंद्र लोहिया, जेबड़ा के महाश्य खेम सिंह, बलराम सिंह, सोमपाल सिंह आदि का कहना है कि नल-मनसुख, राजा कारक, सत्यवादी राजा हरिश्चंद, नरवर गढ़ की लड़ाई, कंपिलगढ़ की लड़ाई, मारू का गौना आदि पौराणिक किस्सों की होली अमरोहा जिले में प्रमुखता से गाई जाती है। इन किस्सों से हम अपनी इतिहास व पूर्वजों को याद भी करते हैं।
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