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डाक्टर और स्टाफ ने अस्पताल में भर्ती मरीजों को भगाया
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 21 Sep 2016 01:22 AM IST
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अमरोह के शहर सीएचसी में हड़ताल के चलते खाली पड़ा डाकटर कक्ष
- फोटो : amar ujala
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अनिश्चितकालीन हड़ताल के बहाने डाक्टर व स्टाफ ने मंगलवार को जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों को तीन-तीन दिन की दवाई देकर भगा दिया। जिन मरीजों के पर्चे बनाए, उनको दवाई नहीं दी। जांचों से लेकर इंजेक्शन लगाने तक का काम ठप कर दिया। इस पर मरीजों व तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा।
अस्पताल कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी व प्रदर्शन किया, लेकिन मजबूर हुए मरीज अफसरों के दर पर जाने की बजाय अपना सामान लेकर घरों को चले गए। इधर कर्मचारियों ने पूरी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित कर दीं। तालाबंदी कर फार्मासिस्टों ने प्रदर्शन किया। जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सेवाएं अस्त व्यस्त रहीं। दिन भर मरीज भटकते रहे।
मंगलवार को जिला अस्पताल का अलग ही नजारा देखने को मिला। करीब नौ बजे कर्मचारियों ने प्रांतीय आह्वान पर कार्य करना बंद कर दिया। दस बजे तक पर्चे बनाए, लेकिन हड़ताल की वजह से डाक्टरों ने मरीजों को देखना मुनासिब नहीं समझा। औषधि वितरण केंद्र पर भी ताला लटका दिया।
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इसके बाद डाक्टरों ने भी काम बंद कर वार्डों में भर्ती मरीजों को वहां से घर भेजने की कार्रवाई छेड़ दी। स्टाफ नर्स व चिकित्सकों ने वार्ड में दाखिल प्रत्येक मरीज को तीन-तीन दिन की दवा देकर घर जाने को कहा। बताया कि कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। अब उनकी देखरेख कोई नहीं करेगा। इसलिए घर चले जाएं।
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवा भी कर्मियों ने ठप कर दी। खून की जांच, टीबी की जांच, मलेरिया, टायफाइड की जांच बंद कर दी। इंजेक्शन लगाना भी बाधित कर दिया। यही स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रही। जहां दवाई वितरण केंद्र की खिड़की बंद रही। मरीज बैठकर खुलने का इंतजार करते रहे।
अन्य कार्य भी संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण नहीं हो पाए। मानों जनपद एकदम ठप सा हो गया। जिला अस्पताल में स्टाफ की हरकत से मरीज व तीमारदार भड़क गए। उन्होंने कर्मचारियों व सरकार के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन करने वालों में अनवर, राजाराम, मुजफ्फर, साकिब, अफसाना, चंद्रवती, फाजिल, अनस, पप्पू, शरीफन, सुभाष, अली हसन, अशोक, सतीश, रजनी, कावेंद्री, गुलाम, कामिनी, राजो, इंद्रा, नाजो आदि शामिल थी।
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अस्पताल कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी व प्रदर्शन किया, लेकिन मजबूर हुए मरीज अफसरों के दर पर जाने की बजाय अपना सामान लेकर घरों को चले गए। इधर कर्मचारियों ने पूरी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित कर दीं। तालाबंदी कर फार्मासिस्टों ने प्रदर्शन किया। जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सेवाएं अस्त व्यस्त रहीं। दिन भर मरीज भटकते रहे।
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मंगलवार को जिला अस्पताल का अलग ही नजारा देखने को मिला। करीब नौ बजे कर्मचारियों ने प्रांतीय आह्वान पर कार्य करना बंद कर दिया। दस बजे तक पर्चे बनाए, लेकिन हड़ताल की वजह से डाक्टरों ने मरीजों को देखना मुनासिब नहीं समझा। औषधि वितरण केंद्र पर भी ताला लटका दिया।
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इसके बाद डाक्टरों ने भी काम बंद कर वार्डों में भर्ती मरीजों को वहां से घर भेजने की कार्रवाई छेड़ दी। स्टाफ नर्स व चिकित्सकों ने वार्ड में दाखिल प्रत्येक मरीज को तीन-तीन दिन की दवा देकर घर जाने को कहा। बताया कि कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। अब उनकी देखरेख कोई नहीं करेगा। इसलिए घर चले जाएं।
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवा भी कर्मियों ने ठप कर दी। खून की जांच, टीबी की जांच, मलेरिया, टायफाइड की जांच बंद कर दी। इंजेक्शन लगाना भी बाधित कर दिया। यही स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रही। जहां दवाई वितरण केंद्र की खिड़की बंद रही। मरीज बैठकर खुलने का इंतजार करते रहे।
अन्य कार्य भी संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण नहीं हो पाए। मानों जनपद एकदम ठप सा हो गया। जिला अस्पताल में स्टाफ की हरकत से मरीज व तीमारदार भड़क गए। उन्होंने कर्मचारियों व सरकार के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन करने वालों में अनवर, राजाराम, मुजफ्फर, साकिब, अफसाना, चंद्रवती, फाजिल, अनस, पप्पू, शरीफन, सुभाष, अली हसन, अशोक, सतीश, रजनी, कावेंद्री, गुलाम, कामिनी, राजो, इंद्रा, नाजो आदि शामिल थी।