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Amroha News: पालिका बोर्ड बैठक में सभासद पतियों को रोका, हंगामा, ईओ से हुई नोकझोंक
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गजरौला। पालिका बोर्ड की बैठक में आए सभासद पतियों को ईओ के रोकने पर हंगामा हो गया। ईओ से सभासद पतियों की नोकझोंक हुई। वह हंगामा करते हुए बैठक से बाहर चले गए। ईओ ने समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। सभासद पतियों के बैठक से नाराज होकर जाने के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हो सकी। जिस कारण नगर क्षेत्र में होने वाले विकास के एजेंडे पर चर्चा भी नहीं हुई।
शुक्रवार दोपहर ढाई बजे से नगर पालिका सभागार में पालिका बोर्ड की बैठक प्रस्तावित थी। पालिकाध्यक्ष राजेंद्री उर्फ उमा देवी, ईओ दीपिका शुक्ला बैठक में शामिल होने के लिए सभागार में उपस्थित हो गईं। दो महिला सभासद उर्मिला व कविता देवी भी बैठक में शामिल होने आईं। महिला सभासदों के पति भी बैठक में शामिल हाेने के लिए सभागार में आ गए। तीन बजे बैठक शुरू होने से पहले ईओ ने बाकी सात महिला सभासदों को न पाकर उनके पतियों को बैठक में उपस्थित होने से रोक दिया।
कहा कि जनप्रतिनिधियों को ही बैठक में अवश्य आना चाहिए। महिला सभासदों के पति चाहें तो अपनी सभासद पत्नी की मदद के लिए बैठक में आ सकते हैं। मगर ऐसे नहीं चलेगा कि महिला सभासद बैठक में बिल्कुल न आएं। ईओ के रोकने पर सभासद पति खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान ईओ और सभासद पतियों के बीच तीखी नाेकझोंक हुई। नाराज सभासद पति नहीं माने और उनके चले जाने के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हो सकी। अब शनिवार यानी कल सुबह 11 बजे से पालिका बोर्ड की बैठक की जाएगी।
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कैसे होगी नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना पूरी
पत्नियों के स्थान पर खुद शामिल होने गए उनके पतियों को ईओ ने यह कह कर रोका कि जनप्रतिनिधियों को ही बैठक में आना चाहिए। ऐसा नहीं होगा तो नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना कैसे होगी। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के साथ अन्याय होगा। जबकि, सरकार महिलाओं को सशक्त करने पर जोर दे रही है। उनके पति महिला सभासदों को सशक्त करने में रोड़ा बन रहे हैं, मगर अब ऐसा नहीं होगा।
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बैठक में पालिकाध्यक्ष पति भी नहीं बैठ सकते
ईओ ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि उनके रहते पालिका बोर्ड की बैठक महिला सभासदों के बगैर नहीं होगी। बैठक में महिला सभासदों के स्थान पर उनके पति नहीं बैठ सकते। ईओ ने यहां तक कहा कि उनके रहते बोर्ड की बैठक में पालिकाध्यक्ष पति भी नहीं बैठ सकते। पालिकाध्यक्ष पति और पूर्व विधायक हरपाल सिंह का कहना है कि वह बोर्ड की बैठक में न तो आज गए और न आगे जाएंगे। क्योंकि चेयरमैन वह नहीं उनकी पत्नी राजेंद्री उर्फ उमा देवी हैं।
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नौ महिला सभासदों में दो ही बैठक में पहुंचीं
25 वार्डों वाली नगर पालिका में नौ महिला सभासद हैं। मगर हैरत की बात यह है कि उनके पति ही नगर पालिका का सब काम देखते हैं। महिला सभासद न तो बैठक में शामिल होतीं हैं न ही अन्य कार्यों के लिए नगर पालिका में जाती हैं। यह पहली बार हुआ है, जब महिला सभासदों के स्थान पर बैठक में शामिल होने आए उनके पतियों को रोक दिया गया। उनको ईओ ने अहसास करा दिया कि निर्वाचित हुईं महिला सभासदों का अधिकार क्या है।
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शुक्रवार दोपहर ढाई बजे से नगर पालिका सभागार में पालिका बोर्ड की बैठक प्रस्तावित थी। पालिकाध्यक्ष राजेंद्री उर्फ उमा देवी, ईओ दीपिका शुक्ला बैठक में शामिल होने के लिए सभागार में उपस्थित हो गईं। दो महिला सभासद उर्मिला व कविता देवी भी बैठक में शामिल होने आईं। महिला सभासदों के पति भी बैठक में शामिल हाेने के लिए सभागार में आ गए। तीन बजे बैठक शुरू होने से पहले ईओ ने बाकी सात महिला सभासदों को न पाकर उनके पतियों को बैठक में उपस्थित होने से रोक दिया।
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कहा कि जनप्रतिनिधियों को ही बैठक में अवश्य आना चाहिए। महिला सभासदों के पति चाहें तो अपनी सभासद पत्नी की मदद के लिए बैठक में आ सकते हैं। मगर ऐसे नहीं चलेगा कि महिला सभासद बैठक में बिल्कुल न आएं। ईओ के रोकने पर सभासद पति खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान ईओ और सभासद पतियों के बीच तीखी नाेकझोंक हुई। नाराज सभासद पति नहीं माने और उनके चले जाने के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हो सकी। अब शनिवार यानी कल सुबह 11 बजे से पालिका बोर्ड की बैठक की जाएगी।
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कैसे होगी नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना पूरी
पत्नियों के स्थान पर खुद शामिल होने गए उनके पतियों को ईओ ने यह कह कर रोका कि जनप्रतिनिधियों को ही बैठक में आना चाहिए। ऐसा नहीं होगा तो नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना कैसे होगी। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के साथ अन्याय होगा। जबकि, सरकार महिलाओं को सशक्त करने पर जोर दे रही है। उनके पति महिला सभासदों को सशक्त करने में रोड़ा बन रहे हैं, मगर अब ऐसा नहीं होगा।
बैठक में पालिकाध्यक्ष पति भी नहीं बैठ सकते
ईओ ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि उनके रहते पालिका बोर्ड की बैठक महिला सभासदों के बगैर नहीं होगी। बैठक में महिला सभासदों के स्थान पर उनके पति नहीं बैठ सकते। ईओ ने यहां तक कहा कि उनके रहते बोर्ड की बैठक में पालिकाध्यक्ष पति भी नहीं बैठ सकते। पालिकाध्यक्ष पति और पूर्व विधायक हरपाल सिंह का कहना है कि वह बोर्ड की बैठक में न तो आज गए और न आगे जाएंगे। क्योंकि चेयरमैन वह नहीं उनकी पत्नी राजेंद्री उर्फ उमा देवी हैं।
नौ महिला सभासदों में दो ही बैठक में पहुंचीं
25 वार्डों वाली नगर पालिका में नौ महिला सभासद हैं। मगर हैरत की बात यह है कि उनके पति ही नगर पालिका का सब काम देखते हैं। महिला सभासद न तो बैठक में शामिल होतीं हैं न ही अन्य कार्यों के लिए नगर पालिका में जाती हैं। यह पहली बार हुआ है, जब महिला सभासदों के स्थान पर बैठक में शामिल होने आए उनके पतियों को रोक दिया गया। उनको ईओ ने अहसास करा दिया कि निर्वाचित हुईं महिला सभासदों का अधिकार क्या है।