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छात्रवृत्ति से वंचित होंगे ओबीसी के आठ हजार विद्यार्थी
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अमरोहा। जिले में ओबीसी के आठ हजार विद्यार्थी सरकार की छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। अंतिम तिथि तक करीब 8277 विद्यार्थी अपना फार्म नहीं भर सके। विभाग ने पर्याप्त रूप से उन्हें जागरूक नहीं किया है। वहीं विद्यालय प्रबंधन ने भी अपनी ओर से जिम्मेदारी नहीं दिखाई है। इसका नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्री-मैट्रिक से लेकर पोस्ट मैट्रिक के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति देने का एलान किया है। कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक 3000 रुपये, स्नातक में 3300 रुपये और पोस्ट मैट्रिक के लिए 5000 रुपये पाठ्यक्रम पूरा होते तक प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 10 अक्तूबर तय की थी। जिले में प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक के लिए 49,478 छात्रों ने पंजीयन कराया है। फॉर्म भरने में 100-100 रुपये का खर्च भी कर चुके हैं। फार्म दाखिल करने वाले छात्रों की संख्या 43303 है। अंतिम तिथि तक विभाग के साफ्टवेयर पर ओबीसी के छात्रों की प्राप्त फार्म संख्या 35026 है। करीब 8277 फार्मों का अंतर है। शासन स्तर पर छात्रवृत्ति के फॉर्म की कई बार समीक्षा भी हुई। बावजूद इसके अफसरों की कार्यशैली में सुधार नहीं आ सका है। इसके चलते छात्रवृत्ति के मामले में उपलब्धि बेहद निराशाजनक है। पंजीकरण और भरे गए फार्मों में अंतर पर विभाग का तर्क है कि विद्यार्थी कई बार दो दफा पंजीकरण करा लेते हैं। ऐसे में साफ्टवेयर डुप्लीकेट पंजीकरण को नहीं लेता। लेकिन आवेदित फार्म और अंतिम दाखिल फार्मों मेें अंतर पर कोई जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि जिले के इन आठ हजार ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल सकेगा। विभाग और विद्यालय प्रबंधन दोनों ही स्तर पर जागरूक नहीं किया। जिस कारण समय रहते विद्यार्थी या तो फार्म नहीं भर पाए या किसी कारणवश उनके फार्म स्वीकार नहीं किए गए।
यह हैं तथ्य
पंजीकरण हुए 49478
फॉर्म भरे गए 43303
अंतिम दाखिल 35026
दो बार का खर्च वसूलते हैं साइबर कैफे संचालक
अमरोहा। छात्रवृत्ति का फॉर्म भरने के लिए साइबर कैफे संचालकों ने 100-100 रुपये वसूले हैं। दरअसल पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद छात्रों की आईडी के बाद ही फॉर्म भरा जा सकता है। इसके साथ ही फॉर्म इन्टर्ड और टेम्परेरी लॉक कराना पड़ता है। इसके चलते साइबर कैफे संचालकों के पास दो बार जाना पड़ता है। इसमें मार्कशीट, आय, जाति, निवास, आधार कार्ड, बैंक पास बुक आदि की फोटोकॉपी अपलोड करनी पड़ती है। ऐसे में फॉर्म भरने के लिए दो बार का खर्च लगभग 100 रुपये लेते हैं।
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छात्रवृत्ति के लिए फॉर्म भरते हैं लेकिन कुछ गलतियों से संख्या में डुप्लीकेसी हो जाती है। इसके अलावा अंक की अनिवार्यता भी है। इसके लिए निर्धारित अंक भी जरूरी है। मुमकिन है कि अंकों के कारण आवेदित फार्म और अंतिम दाखिल फार्मों की संख्या में अंतर आया हो।
- शक्ति सरन श्रीवास्तव, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्री-मैट्रिक से लेकर पोस्ट मैट्रिक के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति देने का एलान किया है। कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक 3000 रुपये, स्नातक में 3300 रुपये और पोस्ट मैट्रिक के लिए 5000 रुपये पाठ्यक्रम पूरा होते तक प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 10 अक्तूबर तय की थी। जिले में प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक के लिए 49,478 छात्रों ने पंजीयन कराया है। फॉर्म भरने में 100-100 रुपये का खर्च भी कर चुके हैं। फार्म दाखिल करने वाले छात्रों की संख्या 43303 है। अंतिम तिथि तक विभाग के साफ्टवेयर पर ओबीसी के छात्रों की प्राप्त फार्म संख्या 35026 है। करीब 8277 फार्मों का अंतर है। शासन स्तर पर छात्रवृत्ति के फॉर्म की कई बार समीक्षा भी हुई। बावजूद इसके अफसरों की कार्यशैली में सुधार नहीं आ सका है। इसके चलते छात्रवृत्ति के मामले में उपलब्धि बेहद निराशाजनक है। पंजीकरण और भरे गए फार्मों में अंतर पर विभाग का तर्क है कि विद्यार्थी कई बार दो दफा पंजीकरण करा लेते हैं। ऐसे में साफ्टवेयर डुप्लीकेट पंजीकरण को नहीं लेता। लेकिन आवेदित फार्म और अंतिम दाखिल फार्मों मेें अंतर पर कोई जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि जिले के इन आठ हजार ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल सकेगा। विभाग और विद्यालय प्रबंधन दोनों ही स्तर पर जागरूक नहीं किया। जिस कारण समय रहते विद्यार्थी या तो फार्म नहीं भर पाए या किसी कारणवश उनके फार्म स्वीकार नहीं किए गए।
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यह हैं तथ्य
पंजीकरण हुए 49478
फॉर्म भरे गए 43303
अंतिम दाखिल 35026
दो बार का खर्च वसूलते हैं साइबर कैफे संचालक
अमरोहा। छात्रवृत्ति का फॉर्म भरने के लिए साइबर कैफे संचालकों ने 100-100 रुपये वसूले हैं। दरअसल पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद छात्रों की आईडी के बाद ही फॉर्म भरा जा सकता है। इसके साथ ही फॉर्म इन्टर्ड और टेम्परेरी लॉक कराना पड़ता है। इसके चलते साइबर कैफे संचालकों के पास दो बार जाना पड़ता है। इसमें मार्कशीट, आय, जाति, निवास, आधार कार्ड, बैंक पास बुक आदि की फोटोकॉपी अपलोड करनी पड़ती है। ऐसे में फॉर्म भरने के लिए दो बार का खर्च लगभग 100 रुपये लेते हैं।
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छात्रवृत्ति के लिए फॉर्म भरते हैं लेकिन कुछ गलतियों से संख्या में डुप्लीकेसी हो जाती है। इसके अलावा अंक की अनिवार्यता भी है। इसके लिए निर्धारित अंक भी जरूरी है। मुमकिन है कि अंकों के कारण आवेदित फार्म और अंतिम दाखिल फार्मों की संख्या में अंतर आया हो।
- शक्ति सरन श्रीवास्तव, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी।