{"_id":"578bdedb4f1c1b9032c4bad8","slug":"mushayra-in-amroha","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल के बहलाने की सूरत...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल के बहलाने की सूरत...
अमर उजाला/ ब्यूरोअमरोहा
Updated Mon, 18 Jul 2016 01:09 AM IST
विज्ञापन
अमरोहा के मोहल्ला दानिशमंदान में अदबी संगम की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में कलाम पेश करते शायर।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अदबी संगम की ओर से अमरोहा के शायर मतीन अमरोहवी के सम्मान में काव्य गोष्ठी का आयोजन मोहल्ला दानिशमंदान में किया गया। कार्यक्रम की सदारत संस्था के सदर हसन मुजतबा वाहिद ने की, जबकि संचालन महासचिव कैसर नकवी ने किया।
पंडित भुवनेश कुमार शर्मा ने मतीन अमरोहवी की शख्सियत के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद कवि व शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। हसन मुजतबा वाहिद ने कहा कि, किसी के जहन में है फलसफा तज्जरूद का, कोई हुआ है ख्याले विशाल में गुम। निगार अमरोहवी ने यूं कहा कि दिल के बहलाने की सूरत अब यहां होती नहीं, एक जमाने से मुशर्रत मेजबां होती नहीं।
मतीन अमरोहवी ने यूं कहा कि आंखों से कहे कोई आंखों से सुने कोई, इस तर्जे तकल्लुम को कहते हैं गजल गोई। डा. जमशेद कमाल ने कुछ इस तरह कहा कि उनकी बातें शहद से मीठी होती हैं, सारे मुनाफिक बड़े रसीले होते हैं। मुबारक अमरोहवी ने पढ़ा कि यूं हैं दस्तारे बुजुर्गों की अजायब घर में, उनकी दस्तार के काबिल ही नहीं सर अपना। सैयद शीबान कादरी ने इस तरह पढ़ा कि क्या दमक है आरिजों पर पहले-पहले प्यार की, आईने में देखकर खुद को शर्माई बहुत। अशरफ फराज ने यूं पढ़ा कि मुझे वफा का भरोसा दिला रहा है कोई, हुजूमे गम में भी नजदीक आ रहा है कोई। इस अवसर पर आलिम रजा तकवी, सिब्ते हैदर, काजिम रजा, अली नवाज, रहे।
पंडित भुवनेश कुमार शर्मा ने मतीन अमरोहवी की शख्सियत के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद कवि व शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। हसन मुजतबा वाहिद ने कहा कि, किसी के जहन में है फलसफा तज्जरूद का, कोई हुआ है ख्याले विशाल में गुम। निगार अमरोहवी ने यूं कहा कि दिल के बहलाने की सूरत अब यहां होती नहीं, एक जमाने से मुशर्रत मेजबां होती नहीं।
विज्ञापन
मतीन अमरोहवी ने यूं कहा कि आंखों से कहे कोई आंखों से सुने कोई, इस तर्जे तकल्लुम को कहते हैं गजल गोई। डा. जमशेद कमाल ने कुछ इस तरह कहा कि उनकी बातें शहद से मीठी होती हैं, सारे मुनाफिक बड़े रसीले होते हैं। मुबारक अमरोहवी ने पढ़ा कि यूं हैं दस्तारे बुजुर्गों की अजायब घर में, उनकी दस्तार के काबिल ही नहीं सर अपना। सैयद शीबान कादरी ने इस तरह पढ़ा कि क्या दमक है आरिजों पर पहले-पहले प्यार की, आईने में देखकर खुद को शर्माई बहुत। अशरफ फराज ने यूं पढ़ा कि मुझे वफा का भरोसा दिला रहा है कोई, हुजूमे गम में भी नजदीक आ रहा है कोई। इस अवसर पर आलिम रजा तकवी, सिब्ते हैदर, काजिम रजा, अली नवाज, रहे।
विज्ञापन