Danish Ali: अमरोहा की बदलने लगी राजनीति, बसपा में अन्य दलों के नेता तलाश रहे भविष्य, दानिश के निलंबन से हलचल
अमरोहा की लोकसभा सीट मशहूर क्रिकेटर चेतन चौहान के चुनाव जीतने के बाद चर्चा में आई थी। इसके बाद अब दानिश अली को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। इस सीट से बसपा का जीतना बेहद मुश्किल रहा लेकिन 2019 में पुरानी रवायत को तोड़ते हुए दानिश अली ने बसपा को जीत दिलाई थी।
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सांसद दानिश अली के बसपा से निलंबन के बाद अमरोहा की राजनीति बदली-बदली सी नजर आने लगी है। जहां दानिश अली के कांग्रेस से जुड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरे दलों के नेताओं ने भी बसपा में ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया है। हो भी क्यों न, उन्हें चुनाव में मुस्लिम और दलित के समीकरण जो नजर आने लगे हैं। हालांकि, अभी चुनावी बिसात किस तरह बिछेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
एक समय में मशहूर क्रिकेटर चेतन चौहान के चुनाव लड़ने और जीत हासिल करने को लेकर चर्चा में रही यह सीट अब दानिश अली को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। यह जग जाहिर है कि अमरोहा सीट से बसपा का जीतना बेहद मुश्किल रहा है। लेकिन, 2019 में गठबंधन के सहारे पुरानी रवायत को तोड़ते हुए दानिश अली ने बसपा को जीत दिलाई थी। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर को 63248 वोटों से हराया था। दानिश को 601082 और कंवर सिंह तंवर 537834 मत हासिल हुए थे। उन्होंने 2009, 2014 में बसपा को मिली हार का मिथक तोड़ा था।
इसके साथ ही बसपा में उनका कद भी बढ़ाया था। उन्हें लोकसभा में पार्टी का नेता सदन भी बनाया गया था। भाजपाइयों से विवाद को लेकर लगातार चर्चाओं में रहना और उसके बाद कांग्रेस से नजदीकी बढ़ने के बाद से उनकी राजनीतिक मंशा को लेकर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में शनिवार को पार्टी हाईकमान में अचानक से दानिश अली के निलंबन का फरमान जारी कर दिया। जिसके बाद जिले की राजनीति में भी हलचल मच गई है। शहर में चर्चाओं बाजार गर्म है कि दूसरे दलों के नेता बसपा में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने को आतुर हो गए हैं।
स्थानीय के साथ-साथ बाहरी जिलों के नेताओं की नजरें अब बसपा की ओर हैं। उधर, बसपा जिला अध्यक्ष सोमपाल सिंह का कहना है कि आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी पूरी तैयारी कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने अभी किसी नए चेहरे का नाम बताने से इंकार कर दिया है। कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा वैसे-वैसे दावेदारों के नाम भी सामने आने लगेंगे।
20 साल बाद बसपा ने तोड़ा था हार का तिलिस्म
अमरोहा लोकसभा से बसपा की बात करें तो 1999 में बसपा से राशिद अल्वी ने भाजपा के चेतन चौहान काे हराकर जीत दिलाई थी। राशिद अल्वी (अब कांग्रेस नेता) पड़ोसी जनपद बिजनौर के चांदपुर निवासी हैं। इस चुनाव के बाद बसपा को जीत के लिए तरस रही थी। 2019 के चुनाव में बसपा के दानिश अली ने सपा, रालोद, कांग्रेस गठबंधन के सहारे हार तिलिस्म तोड़ा था। गठबंधन प्रत्याशी के रूप के में उन्होंने भाजपा को मात दी थी।
2009 और 2014 के लोस चुनाव में बसपा को मिले वोट
2009 लोक सभा चुनाव की बात करें तो बसपा से प्रत्याशी रहे महमूद मदनी को 170396 वोट मिले थे। जबकि 2014 में बसपा प्रत्याशी फरहत हसन को 162983 वोट हासिल हुए थे। दोनों ही चुनावों में बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। वहीं, 2009 में भाजपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल ने 283182 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। जबकि, सपा से महबूब अली 191099 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। 2014 की बात करें तो भाजपा के कंवर सिंह तंवर 528880 वोट हासिल कर सांसद बने थे। उधर, सपा की हुमैरा अख्तर 370666 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
नोट- ये आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिए गए हैं।
ये हैं सपा से दावेदार
सपा की बात करें तो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कद्दावर नेता चुनावी ताल ठोकने काे आतुर हैं। सपा से विधायक महबूब अली के पुत्र परवेज अली, नौगांवा विधायक समरपाल सिंह के पुत्र प्रतीक चौधरी के अलावा चौधरी सरजीत सिंह, चंद्रपाल सैनी, अजय मलिक दावेदारी जता रहे हैं। जिलाध्यक्ष मस्तराम यादव का कहना है कि इनके अलावा अन्य लोग भी मैदान में आ सकते हैं।
भाजपा की है लंबी फेहरिस्त
लोकसभा चुनाव में दावेदारी जताने वालों में भाजपा की फेहरिस्त काफी लंबी है। इनमें पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर, सुरेश नागर, गढ़मुक्तेश्वर के पूर्व विधायक कमल मलिक, राजेश कुमार चुन्नू, कांठ के पूर्व विधायक संगीता चौहान, जिला पंचायत सदस्य डॉ. सोरन सिंह, विजय पांडेय पूर्व प्रदेश मंत्री युवा मोर्चा, अनिला सिंह प्रदेश प्रवक्ता, तरुण राठी, राजेंद्र सिंह खड़कवंशी ब्लाक प्रमुख गंगेश्वरी, ममता गुर्जर, ब्लाक प्रमुख हसनपुर समेत अन्य नेता दावेदारी जता रहे हैं। जिलाध्यक्ष उदय गिरी गोस्वामी ने बताया कि यह लोकतंत्र है, सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। अभी और लोग भी अपने दावेदारी जता सकते हैं।