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धारा बदलते ही नक्शे से गायब

Fri, 03 Jun 2016 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा Updated Fri, 03 Jun 2016 01:13 AM IST
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banas village, where narad muni do meditation - फोटो : amar ujala
 बान नदी को ब्रिटिश हुकूमत ने वर्ष 1942 में राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया था। 1952 में नदी की धारा बदलने के बाद कई किसानों की जमीन भी नदी की जद में आ गए और लगातार नदी रास्ते बदलती रही और धीरे-धीरे यह अभिलेखों के मकड़जाल में खोने लगी। 
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इसके बाद नदी में कितनी बार बाढ़ आई और कितनी बार नदी की तेज धार से खेत कटे, इसका रिकार्ड 1959 के बाद से दर्ज नहीं किया जा सका। नदी कब सूखी इसका रिकार्ड भी तहसील प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। नक्शे तक में से बान नदी को लुप्त दर्शा दिया गया है। यहां तक नक्शे में बान नदी की लाइन भी नहीं है। जबकि मौके पर बान नदी की हदबंदी साफ नजर आ रही है। मौके पर मौजूद नदी के धरती से निशाना मिटाना राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी की ओर इशारा कर रही है। 
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बान नदी की आन को बचाने के लिए अमर उजाला द्वारा अभियान चलाया गया है। इस अभियान से नदी के अस्तित्व से जुड़ी परतें खुलती जा रहीं हैं। ब्रिटिश हुकूमत के शासन काल में 1942 में बान नदी अभिलेखों में दर्ज थी।
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ग्लेशियर आंकड़ों में नदी दर्ज थी, लेकिन जमीदारी प्रथा खत्म होते ही अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी गई। कई गांवों के अभिलेखों से नदी को गायब कर दिया गया। यहां तक की नक्शे से नदी की रेखा को ही मिटा दिया गया है। 1952 से अब तक कितनी बार नदी में बाढ़ आई, तेज धारा से खेत कटे, लेकिन इसका कोई रिकार्ड तक दर्ज नहीं है। कहीं नदी की जमीन भूमिधर में दर्ज है तो कहीं नदी की जमीन पर फसलें खड़ी हुई हैं, जो राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी की ओर इशारा कर रही हैं।
 
राजस्व विभाग कारिंदों ने नदी के अस्तित्व मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब हाल यह है कि, जहां तक कागजों में नदी दर्ज हैं, वहां तक ही खुदाई संभव हो पाएगी। प्रशासन ने राजस्व विभाग को शुक्रवार से पैमाइश करने के निर्देश दिए हैं। 


हर हाल में बान नदी को कब्जामुक्त कराते हुए पुनजीर्वित कराया जाएगा। नदी की खुदाई को अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। शुक्रवार से पैमाइश का कार्य शुरू हो जाएगा। एस्टीमेट तैयार कराकर जल्द से जल्द बान नदी की खुदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। -वेद प्रकाश, जिलाधिकारी
 
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