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बड़ा खेल: अफसरों ने 38 बीघा भूमि को पालिका की मानने से ही किया था इन्कार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:44 AM IST
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Major Racket: Officials Had Refused to Acknowledge 38 Bighas of Land as Municipal Property
संभल। 101 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीन नगर पालिका की सीमा से बाहर होने का हवाला देकर तत्कालीन ईओ ने हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने का निर्णय लिया था। पुलिस रिमांड पर रविवार को पूछताछ के दौरान तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने विवेचक सीओ कुलदीप सिंह को बताया कि याचिका वापस लेने का यही प्रमुख आधार था। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया था कि जब जमीन नगर पालिका की सीमा से बाहर है तो हाईकोर्ट में लंबित याचिका वापस ले ली जाए। इस बयान के बाद मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है।
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मुरादाबाद मार्ग स्थित गैरआबाद गांव तख्तगोसाई में ग्राम समाज की करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की 38 बीघा जमीन का मामला वर्ष 2008 से हाईकोर्ट में लंबित था। तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने वर्ष 2013 में यह याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद पट्टे की रसीद के आधार पर दावा कर रहे मियां सराय निवासी सईदुल रहमान के पक्ष में तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी, मुरादाबाद खेम सिंह खड़क ने नामांतरण का आदेश पारित कर दिया था।
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नगर पालिका वर्ष 2008 में ही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंची थी, लेकिन करीब पांच वर्ष तक याचिका पर पालिका के पक्ष में निर्णय नहीं आया। इसी दौरान याचिका वापस ले ली गई। हाईकोर्ट से याचिका वापस होने के बाद कानूनी रूप से जमीन पर सईदुल रहमान के वारिसों का कब्जा हो गया। सईदुल रहमान की वर्ष 2011 में मृत्यु हो चुकी थी। उनके दो बेटे और पत्नी इस मामले की पैरवी कर रहे थे। आरोप है कि अगले दो वर्षों के भीतर इस जमीन का बंदरबांट पूरी तरह कर दिया गया।
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जो आरोपी बनाए गए, उनको नोटिस जारी
सरकारी कर्मचारियों के अलावा 25 वह लोग आरोपी बनाए गए हैं जिनका जमीन पर कब्जा था। इन सभी आरोपियों को पुलिस ने नोटिस जारी किया है। जिससे वह अपने तथ्य सामने रख सकें। सीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि नोटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस के आधार पर जवाब मांगा गया है। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। वहीं, दूसरी ओर सात आरोपी हाईकोर्ट भी पहुंच गए हैं।
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आजम के करीबी पूर्व चेयरमैन को भी बनाया जा सकता है आरोपी
पूर्व चेयरमैन कौसर अहमद सपा के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी माने जाते हैं। जिस समय यह याचिका वापस ली गई थी उस समय आजम खां सपा शासन में नगर विकास मंत्री हुआ करते थे। माना जाता है कि उनके प्रभाव के चलते यह खेल आगे बढ़ा। हालांकि अभी तक की पुलिस की जांच पड़ताल और पूछताछ में इसके सबूत नहीं मिल सके हैं। चर्चा है कि गहनता से पूछताछ में तस्वीर साफ हो जाएगी। पूर्व चेयरमैन से दो बार पुलिस पूछताछ कर चुकी है। इसके बाद ही रिमांड पर लेकर ईओ से दूसरी बार पुलिस ने पूछताछ की है।
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चकबंदी विभाग ने किया बड़ा गोलमाल
चकबंदी विभाग की मनमानी कहो या तथ्याें की अनदेखी कहा जाए। जिस समय सईदुल रहमान ने 12 जुलाई 1967 की पट्टा रसीद दिखाकर जमीन अपनी होने का दावा किया था। उस समय गैरआबाद गांव तख्तगोसाई में चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। इसलिए 1999 में यह मामला पालिका लेकर सीओ चकबंदी न्यायालय पहुंची थी। इस न्यायालय में भी राहत नहीं मिली तो एसओसी न्यायालय में सुनवाई हुई और वहां पक्ष मजबूत हुआ लेकिन सईदुल रहमान ने डीडीसी न्यायालय में अपील कर दी। यहां उप संचालक चकबंदी ने पालिका के खिलाफ निर्णय दिया और सईदुल रहमान के पक्ष में नामांतरण का आदेश पारित कर दिया था।

इनको बनाया गया है आरोपी

तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क, तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता, पालिका के तत्कालीन मानचित्रक शाहबुद्दीन और तत्कालीन पैरोकार माजिद खान, सईदुल रहमान, इबादुर्रहमान खान, एहसानुर्रहमान खां और शाहजहां बेगम, इफतआरा, तारिक अली, फारीक अली, शाकिर अली, शारिक अली, साजिद अली, शारिक शबूर, मोहम्मद मुजाहिद, रफीक, शाहजहां, अख्तरी, मोहम्मद उमर, मुनाजिर, अजीम, धर्मेंद्र, मधु खुराना, विजय गुप्ता, रूपाली गुप्ता, फुरकान, इमरान, आजम खां, प्रदीप कुमार अग्रवाल, ममदूद आलम वारसी, हरजीत सिंह।


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पालिका के तत्कालीन ईओ को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई है। इसमें उसने बताया है कि पालिका की सीमा के बाहर जमीन थी और इस हवाले से ही याचिका वापस ली थी। जिन आरोपियों का कब्जा जमीन पर था उनको नोटिस जारी कर दिए हैं। इसमें जांच आगे बढ़ रही है।
कुलदीप सिंह, सीओ, संभल
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