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मैजिक, जीप, ई-रिक्शा-टेंपो में मानक से अधिक ढोए जा रहे नौनिहाल
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अमरोहा। परिवहन विभाग की लापरवाही के चलते स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जान जोखिम में हैं। विभाग चैन की नींद सो रहा है। स्कूल संचालक मनमानी कर रहे हैं। अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। ऐसे तमाम स्कूली वाहन हैं, जिनकी न फिटनेस है, और न उनमें कैमरे लगे हैं। आग बुझाने के यंत्र भी नहीं है। जबकि फर्स्ट एड बॉक्स वाहनों से गायब हैं।
गाजियाबाद के मोदीनगर में कक्षा चार के छात्र की अकाल मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन गंभीर नहीं हैं। विभागीय कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है। आलम ये है कि स्कूली बच्चों को ई-रिक्शा-टेंपो में मानक से अधिक भरकर ढोया जा रहा है और जिम्मेदार अंजान बने हैं।
स्कूली बसों की देखरेख के नियमों में लापरवाही के चलते गाजियाबाद के मोदीनगर में कक्षा चार के दस वर्षीय छात्र अनुराग भारद्वाज की अकाल मौत हो थी। अमरोहा में भी स्कूलों वाहनों के नियमों का उल्लंघन ही उल्लंघन देखने को मिल रह है। अधिकांश स्कूली बसों के पास परमिट नहीं है। जिनके पास परमिट है, उनमें अधिकतर की फिटनेस नहीं कराई जाती है। बसों में कैमरे नहीं है तो फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। परिजन भी डग्गामार वाहनों में बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। हादसों से सबक लेकर उन्हें भी नौनिहालों की चिंता करनी चाहिए। कई स्कूलों ने अपनी बसें चलाने की जगह बाहरी लोगों को ठेका दिया हुआ है। इन ठेकेदारों ने डग्गामार वाहनों को स्कूलों में लगाया हुआ है। इनमें टाटा मैजिक, जीप, ई-रिक्शा-टेंपो आदि शामिल है। किसी ने बस लगाई हुई है, जिनमें नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। शीशे के साथ पाइप और जाली तक नहीं लगी हुई है। जिससे बच्चा बाहर सिर नहीं निकाल सके। कई अन्य सुरक्षा उपकरण भी नहीं लगाए गए है, जिससे बच्चों की जान का जोखिम रहता है। बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि स्कूल के अनफिट वाहन ही नहीं, टाटा मैजिक, जीप, ई-रिक्शा और टेंपो में मानक से अधिक बच्चों को भरकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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स्कूली अनफिट वाहन और डग्गामार के खिलाफ सड़कों पर उतरे जिम्मेदार
अमरोहा। जिले में भी स्कूलों के 300 से अधिक वाहन अनफिट है। उनकी फिटनेस समाप्त हो चुकी है। ग्रामीण अंचलों में स्थित स्कूलों में लगे वाहन 15 साल पुराने हैं। ऐसे कंडम वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है। 25 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने विभागीय लापरवाही की पोल खोलती खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद परिवहन विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। अधिकारियों ने स्कूली अनफिट वाहनों और डग्गामार के खिलाफ कार्रवाई की। विभाग ने दो दिन में 51 स्कूल बसों के चालान काटे गए। जबकि 16 अनाधिकृत वाहनों का चालान और दो को सीज किया गया।
स्कूल बसों के लिए यह नियम
ट्रांसपोर्ट परिमट होना चाहिए
चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो
स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए
बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो
शीशों के साथ ही लोहे के पाइप और जाली लगी होनी चाहिए
बस के अंदर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए
स्कूल वाहन की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो
बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए
बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
बस पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए
इन बातों का ध्यान रखें अभिभावक
बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं
चालक के बारे में पूरी जानकारी रखे और उसका चरित्र प्रमाण पत्र भी देखें
बस में एक हेल्पर है या नहीं
बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें
बस के अंदर बच्चों को बैठने के लिए जगह मिल रही हैं या नहीं
बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं
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गाजियाबाद के मोदीनगर में कक्षा चार के छात्र की अकाल मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन गंभीर नहीं हैं। विभागीय कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है। आलम ये है कि स्कूली बच्चों को ई-रिक्शा-टेंपो में मानक से अधिक भरकर ढोया जा रहा है और जिम्मेदार अंजान बने हैं।
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स्कूली बसों की देखरेख के नियमों में लापरवाही के चलते गाजियाबाद के मोदीनगर में कक्षा चार के दस वर्षीय छात्र अनुराग भारद्वाज की अकाल मौत हो थी। अमरोहा में भी स्कूलों वाहनों के नियमों का उल्लंघन ही उल्लंघन देखने को मिल रह है। अधिकांश स्कूली बसों के पास परमिट नहीं है। जिनके पास परमिट है, उनमें अधिकतर की फिटनेस नहीं कराई जाती है। बसों में कैमरे नहीं है तो फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। परिजन भी डग्गामार वाहनों में बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। हादसों से सबक लेकर उन्हें भी नौनिहालों की चिंता करनी चाहिए। कई स्कूलों ने अपनी बसें चलाने की जगह बाहरी लोगों को ठेका दिया हुआ है। इन ठेकेदारों ने डग्गामार वाहनों को स्कूलों में लगाया हुआ है। इनमें टाटा मैजिक, जीप, ई-रिक्शा-टेंपो आदि शामिल है। किसी ने बस लगाई हुई है, जिनमें नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। शीशे के साथ पाइप और जाली तक नहीं लगी हुई है। जिससे बच्चा बाहर सिर नहीं निकाल सके। कई अन्य सुरक्षा उपकरण भी नहीं लगाए गए है, जिससे बच्चों की जान का जोखिम रहता है। बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि स्कूल के अनफिट वाहन ही नहीं, टाटा मैजिक, जीप, ई-रिक्शा और टेंपो में मानक से अधिक बच्चों को भरकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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स्कूली अनफिट वाहन और डग्गामार के खिलाफ सड़कों पर उतरे जिम्मेदार
अमरोहा। जिले में भी स्कूलों के 300 से अधिक वाहन अनफिट है। उनकी फिटनेस समाप्त हो चुकी है। ग्रामीण अंचलों में स्थित स्कूलों में लगे वाहन 15 साल पुराने हैं। ऐसे कंडम वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है। 25 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने विभागीय लापरवाही की पोल खोलती खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद परिवहन विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। अधिकारियों ने स्कूली अनफिट वाहनों और डग्गामार के खिलाफ कार्रवाई की। विभाग ने दो दिन में 51 स्कूल बसों के चालान काटे गए। जबकि 16 अनाधिकृत वाहनों का चालान और दो को सीज किया गया।
स्कूल बसों के लिए यह नियम
ट्रांसपोर्ट परिमट होना चाहिए
चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो
स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए
बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो
शीशों के साथ ही लोहे के पाइप और जाली लगी होनी चाहिए
बस के अंदर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए
स्कूल वाहन की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो
बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए
बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
बस पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए
इन बातों का ध्यान रखें अभिभावक
बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं
चालक के बारे में पूरी जानकारी रखे और उसका चरित्र प्रमाण पत्र भी देखें
बस में एक हेल्पर है या नहीं
बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें
बस के अंदर बच्चों को बैठने के लिए जगह मिल रही हैं या नहीं
बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं