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ब्रजघाट में शाम तक खाली खड़ी रहीं बसें
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गजरौला। पूर्वांचल, बिहार और मध्यप्रदेश की ओर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों की संख्या दिन प्रतिदिन कम हो रही है। ब्रजघाट में पार्किंग स्टैंड से शाम तक डेढ़ सौ प्रवासी श्रमिकों को भिजवाया गया। वहीं श्रमिकों की इंतजार में शाम तक रोजवेज बसें खाली खड़ी रहीं और पार्किंग स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा।
मंगलवार को सुबह ब्रजघाट में पार्किंग स्टैंड पर कुल 105 प्रवासी श्रमिक एकत्र थे। इनमें अधिकांश सोमवार की रात को वहां पहुंचे थे। इन श्रमिकों को पूर्वाह्न दस बजे तक तीन बसों में बैठाकर बलिया, गोरखपुर और प्रयागराज की ओर रवाना करा दिया था। इसके बाद ब्रजघाट में रोडवेज की चार बसें और आ गईं लेकिन वहां मात्र 15-20 श्रमिक ही मौजूद थे। इसलिए बसों को शाम तक रोककर रखना पड़ा। हालांकि शाम तक 20-25 श्रमिक और आ गए थे। वहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि अब दिल्ली और अन्य प्रांतों के श्रमिक यहां नहीं आ रहे हैं। बल्कि जनपद हापुड़, बुलंदशहर और मेरठ में ईंट-भट्ठों और खेतों में काम करने वाले ही अपने घरों को लौट रहे हैं। इन्हें उनके ठेकेदार और अन्य लोग ट्रैक्टर-ट्राली तथा अन्य वाहनों में बैठाकर यहां लाकर छोड़ रहे हैं। यहीं से इन्हें बसों में बैठाकर इनके गृह जनपदों में भेजा रहा है। वहीं दोपहर तक सभी श्रमिकों के चले जाने के कारण वहां सन्नाटा पसरा रहा और रोडवेज की खाली बसें वापस लौट गईं।
सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा अनुपालन
गजरौला। हालांकि हापुड़ जिला प्रशासन प्रवासी श्रमिकों को भिजवाने के लिए ब्रजघाट में काफी अच्छी व्यवस्था कर रहा है लेकिन वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। बसों में श्रमिक बगैर दूरी बनाए ही बैठाए जा रहे हैं। उन्हें सैनिटाइज भी नहीं किया जा रहा है। हां, थर्मल स्क्रीनिंग कर औपचारिकता अवश्य निभाई जा रही है। बता दें कि कुछ दिन पूर्व ब्रजघाट से महाराजगंज भेजे गए एक श्रमिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद बस के दो चालकों और परिचालक को होम क्वारंटीन कर दिया गया था। इसके बावजूद वहां घोर लापरवाही बरती जा रही है।
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मंगलवार को सुबह ब्रजघाट में पार्किंग स्टैंड पर कुल 105 प्रवासी श्रमिक एकत्र थे। इनमें अधिकांश सोमवार की रात को वहां पहुंचे थे। इन श्रमिकों को पूर्वाह्न दस बजे तक तीन बसों में बैठाकर बलिया, गोरखपुर और प्रयागराज की ओर रवाना करा दिया था। इसके बाद ब्रजघाट में रोडवेज की चार बसें और आ गईं लेकिन वहां मात्र 15-20 श्रमिक ही मौजूद थे। इसलिए बसों को शाम तक रोककर रखना पड़ा। हालांकि शाम तक 20-25 श्रमिक और आ गए थे। वहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि अब दिल्ली और अन्य प्रांतों के श्रमिक यहां नहीं आ रहे हैं। बल्कि जनपद हापुड़, बुलंदशहर और मेरठ में ईंट-भट्ठों और खेतों में काम करने वाले ही अपने घरों को लौट रहे हैं। इन्हें उनके ठेकेदार और अन्य लोग ट्रैक्टर-ट्राली तथा अन्य वाहनों में बैठाकर यहां लाकर छोड़ रहे हैं। यहीं से इन्हें बसों में बैठाकर इनके गृह जनपदों में भेजा रहा है। वहीं दोपहर तक सभी श्रमिकों के चले जाने के कारण वहां सन्नाटा पसरा रहा और रोडवेज की खाली बसें वापस लौट गईं।
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सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा अनुपालन
गजरौला। हालांकि हापुड़ जिला प्रशासन प्रवासी श्रमिकों को भिजवाने के लिए ब्रजघाट में काफी अच्छी व्यवस्था कर रहा है लेकिन वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। बसों में श्रमिक बगैर दूरी बनाए ही बैठाए जा रहे हैं। उन्हें सैनिटाइज भी नहीं किया जा रहा है। हां, थर्मल स्क्रीनिंग कर औपचारिकता अवश्य निभाई जा रही है। बता दें कि कुछ दिन पूर्व ब्रजघाट से महाराजगंज भेजे गए एक श्रमिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद बस के दो चालकों और परिचालक को होम क्वारंटीन कर दिया गया था। इसके बावजूद वहां घोर लापरवाही बरती जा रही है।
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