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खाने के लिए राष्ट्रीय पक्षी को मार डाला, आरोपी गिरफ्तार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 01:39 AM IST
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Killed the national bird to eat, the accused arrested
अमरोहा। ग्रामीण ने खाने के लिए राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार कर लिया। मांस को पकाने की कोशिश की। मोर के अवशेषों को इधर-उधर फेंक दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने आरोपी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। पशु चिकित्सक को मौके पर बुलाकर मोर के अवशेषों का परीक्षण कराया। वन दरोगा की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज उसे न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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यह घटना अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के उमरी सादात गांव की है। यहां पर पूसाराम का परिवार रहता है। उनका 43 वर्षीय बेटा हरकिशन अविवाहित है। बुधवार की सुबह करीब 8 बजे हरकिशन जंगल से एक मोर को पकड़ लाया और घर में पकाकर खाने के उद्देश्य से उसकी हत्या कर दी। बाद में मोर के पंजे, सिर और पंखों को इधर-उधर फेंक दिया। जबकि कटोरे में रखे मांस के टुकड़े को पकाने की तैयारी करने लगा। राष्ट्रीय पक्षी मोर की हत्या की खबर पूरे गांव में फैल गई। सूचना मिलते ही एसओ सुनील मलिक फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। वहीं वन क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार, वन दरोगा राजीव वर्मा भी टीक के साथ मौके पर आ गए। पुलिस ने आरोपी हरकिशन को करीब एक किलो मोर के मांस के साथ मौके पर गिरफ्तार कर लिया। वन विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए नन्हेड़ा अल्यारपुर पशु अस्पताल से चिकित्सक को मौके पर बुलाकर अवशेषों का परीक्षण कराया। जिसमें मोर के नर होने की पुष्टि हुई।
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पुलिस और वन विभाग की टीमों ने ग्रामीणों से पूछताछ की। इस दौरान सामने आया कि आरोपी हरकिशन खुद के पालन-पोषण के लिए मेहनत मजदूरी भी नहीं करता है। वह पशु-पक्षियों का शिकार करता रहता है। इससे पहले उसने कई कुत्तों, कौवा की हत्या कर चुका है। सीओ सिटी विजय राना ने बताया कि वन दरोगा राजीव वर्मा की तहरीर पर आरोपी हरकिशान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उसके जेल भेज दिया गया है।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
सीओ सिटी विजय राना ने बताया कि आरोपी हरकिशन के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39 और 51 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
मोर के शिकार में सात साल तक की सजा का प्रावधान
जनपद न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता इफ्तेखार सैफी ने बताया कि भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत राष्ट्रीय पक्षी मोर को सुरक्षा प्रदान की गई है। मोर को मारने पर दोषी को सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
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