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कार्तिक पूर्णिमा : अब गंगा मेले की तैयारी होगी तेज
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गजरौला। प्रशासनिक अधिकारियों ने गंगा का जलस्तर कम होने के बाद अब कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले की तैयारियां तेज कर दी है। मेले के आयोजकों ने कहा कि भक्तों की सुविधा के लिए व्यवस्था की जाएगी। गंगा मेले में आने वालों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।
गंगा द्वारा कटान कर उसकी धार तिगरी के निकट आने का असर मेले के आकार पर पड़ रहा है। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार तिगरी मेले की चौड़ाई कम रहेगी, जबकि लंबाई बढ़ानी पड़ रही है। मेले की लंबाई बढ़ने के कारण आधा मेला दियावली मुंजब्ता और कांकाठेरके रकबे में पहुंच रहा है। दियावली मुंजब्ता गांव धनौरा तहसील का गैर आबाद गांव है, जबकि कांकाठेर हसनपुर तहसील में पड़ता है। तिगरी निवासी सेवानिवृत्त लेखपाल घासी सिंह, पूर्व प्रधान कमल सिंह नागर, नवीन त्यागी, रक्षपाल यादव, मनोज शर्मा, गंगासरन प्रजापति, महेश, गफ्फार आदि ग्रामीणों ने बताया कि बीते सालों में गंगा की धार तिगरी से दूर रहती थी, जिसके चलते मेले की चौड़ाई कम करने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
भक्तों के तंबू लगवाने, विभिन्न समाजों की महासभाओं के शिविर लगाने को काफी क्षेत्र मिलता था। अधिकांश मेला तिगरी के रकबे में ही पड़ता था, लेकिन इस बार गंगा के कटान की वजह से मेले की लंबाई अधिक रहेगी। आधे से अधिक मेला दियावली मुंजब्ता और कांकाठेर के रकबे में पड़ेगा।
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गंगा द्वारा कटान कर उसकी धार तिगरी के निकट आने का असर मेले के आकार पर पड़ रहा है। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार तिगरी मेले की चौड़ाई कम रहेगी, जबकि लंबाई बढ़ानी पड़ रही है। मेले की लंबाई बढ़ने के कारण आधा मेला दियावली मुंजब्ता और कांकाठेरके रकबे में पहुंच रहा है। दियावली मुंजब्ता गांव धनौरा तहसील का गैर आबाद गांव है, जबकि कांकाठेर हसनपुर तहसील में पड़ता है। तिगरी निवासी सेवानिवृत्त लेखपाल घासी सिंह, पूर्व प्रधान कमल सिंह नागर, नवीन त्यागी, रक्षपाल यादव, मनोज शर्मा, गंगासरन प्रजापति, महेश, गफ्फार आदि ग्रामीणों ने बताया कि बीते सालों में गंगा की धार तिगरी से दूर रहती थी, जिसके चलते मेले की चौड़ाई कम करने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
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भक्तों के तंबू लगवाने, विभिन्न समाजों की महासभाओं के शिविर लगाने को काफी क्षेत्र मिलता था। अधिकांश मेला तिगरी के रकबे में ही पड़ता था, लेकिन इस बार गंगा के कटान की वजह से मेले की लंबाई अधिक रहेगी। आधे से अधिक मेला दियावली मुंजब्ता और कांकाठेर के रकबे में पड़ेगा।
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