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Amroha News: कामिनी ने गन्ने की नर्सरी से बनाई खुद की पहचान
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अमरोहा। बचपन से ही खेत और खलियान से दूर रहीं कामिनी को आज खेती बाड़ी ने ही एक ऐसी पहचान दी कि वह समाज के लिए किसी नजीर से कम नहीं हैं। उन्होंने जहां स्वयं सहायता समूह के जरिए कई उन्नत किस्म के गन्ने की किस्मों की नर्सरी तैयार की, वहीं अब वह अन्य महिलाओं को भी भारत की कृषि प्रधानता की सीख देने के साथ ही खेती से सोना उगाने में जुट गई हैं।
अमरोहा ब्लॉक के गांव धनोरी मीर की कामिनी के पति प्रदीप किसानी करते हैं। कामिनी के अनुसार शादी के बाद ससुराल में अक्सर समय पर गन्ने की बुआई न होना व उन्नत किस्मों के बीजों की कमी की चर्चा होती थी। जो गन्ने का बीज था, उसमें बीमारी आनी शुरू हो गई थी। बताया कि हालांकि, मायके में उन्होंने कृषि की तरफ ध्यान नहीं दिया। लेकिन, ससुराल में गन्ने की खेती को लेकर होने वाली बातों ने उनकी जिंदगी पर प्रभाव डाला। दो साल पहले उनके मन में गन्ने की नर्सरी तैयार करने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने गुलड़िया में संचालित गन्ने के पौध की नर्सरी के संचालक से मुलाकात की। यहां उन्हाेंने गन्ने के बीजों की नर्सरी तैयार करने की बारीकियों को सीखा। इसमें पति प्रदीप ने भी उनका साथ दिया। पहले कामिनी ने घर पर ही नर्सरी में गन्ने की पौध तैयार करने की योजना बनाई। धीरे-धीरे कामिनी के प्रयास में और महिलाओं का साथ भी जुड़ता गया। जिसके बाद वह स्वयं सहायता समूह के जरिए कई उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार कर रही हैं।
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दूसरी महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
कामिनी ने गन्ने की नर्सरी तैयार की तो आसपास की महिलाओं ने भी उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया। उनके प्रयास को गति देने के लिए आस पास की महिलाएं संगीता, ममता, निर्देश, सुदेश, दीपिका भी उनके साथ जुड़ गई। महिलाओं के साथ आने पर कामिनी ने देविका महिला स्वयं सहायता समूह का संचालन शुरू कर दिया। जिसके जरिये बीजों की बिक्री करती हैं।
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शुरुआती दौर में संसाधन जुटाने में आई परेशानी
कामिनी बताती हैं कि शुरुआती दौर में संसाधन में जुटाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन पति ने उनका काफी सहयोग किया। मेरठ से कटर, पौध तैयार करने वाली ट्रे, कोकोपीट आदि एकत्र किए। एक अन्य नर्सरी का संचालन करने वालों से कुछ जानकारी लेकर इसका काम शुरू कर दिया। बाद में गन्ना समिति की और से भी सहयोग के रूप में उनको ट्रे दी गई।
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तैयार की कई उन्नत गन्ने की प्रजाति
समूह द्वारा तैयार नर्सरी में कामिनी ने धामपुर शुगर मिल से सीओजे 11015, धनौरा शुगर मिल से सीओजे 0118 के अलावा सीओजे 13235 गन्ने का बीज लेकर सिंगल बड तकनीक से नर्सरी तैयार करना शुरू किया। नर्सरी में ही उन्होंने सीओजे 0118 की कुछ पौधों को मार्च में बोया था, जोकि आज 12 फीट से भी ऊंचाई का गन्ना तैयार खड़ा है। कामिनी के अनुसार इस बार उन्होंने हरियाणा के करनाल से गन्ने की किस्म सीओजे 17231 की बुकिंग कराई है। जिसकी वह नर्सरी तैयार करेंगी। कामिनी कहती हैं कि उन्हें उम्मीद के अनुसार इस काम में सफलता मिली है, उम्मीद है कि आगे और अधिक मुनाफा भी कमा सकेंगी।
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अमरोहा ब्लॉक के गांव धनोरी मीर की कामिनी के पति प्रदीप किसानी करते हैं। कामिनी के अनुसार शादी के बाद ससुराल में अक्सर समय पर गन्ने की बुआई न होना व उन्नत किस्मों के बीजों की कमी की चर्चा होती थी। जो गन्ने का बीज था, उसमें बीमारी आनी शुरू हो गई थी। बताया कि हालांकि, मायके में उन्होंने कृषि की तरफ ध्यान नहीं दिया। लेकिन, ससुराल में गन्ने की खेती को लेकर होने वाली बातों ने उनकी जिंदगी पर प्रभाव डाला। दो साल पहले उनके मन में गन्ने की नर्सरी तैयार करने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने गुलड़िया में संचालित गन्ने के पौध की नर्सरी के संचालक से मुलाकात की। यहां उन्हाेंने गन्ने के बीजों की नर्सरी तैयार करने की बारीकियों को सीखा। इसमें पति प्रदीप ने भी उनका साथ दिया। पहले कामिनी ने घर पर ही नर्सरी में गन्ने की पौध तैयार करने की योजना बनाई। धीरे-धीरे कामिनी के प्रयास में और महिलाओं का साथ भी जुड़ता गया। जिसके बाद वह स्वयं सहायता समूह के जरिए कई उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार कर रही हैं।
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दूसरी महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
कामिनी ने गन्ने की नर्सरी तैयार की तो आसपास की महिलाओं ने भी उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया। उनके प्रयास को गति देने के लिए आस पास की महिलाएं संगीता, ममता, निर्देश, सुदेश, दीपिका भी उनके साथ जुड़ गई। महिलाओं के साथ आने पर कामिनी ने देविका महिला स्वयं सहायता समूह का संचालन शुरू कर दिया। जिसके जरिये बीजों की बिक्री करती हैं।
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शुरुआती दौर में संसाधन जुटाने में आई परेशानी
कामिनी बताती हैं कि शुरुआती दौर में संसाधन में जुटाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन पति ने उनका काफी सहयोग किया। मेरठ से कटर, पौध तैयार करने वाली ट्रे, कोकोपीट आदि एकत्र किए। एक अन्य नर्सरी का संचालन करने वालों से कुछ जानकारी लेकर इसका काम शुरू कर दिया। बाद में गन्ना समिति की और से भी सहयोग के रूप में उनको ट्रे दी गई।
तैयार की कई उन्नत गन्ने की प्रजाति
समूह द्वारा तैयार नर्सरी में कामिनी ने धामपुर शुगर मिल से सीओजे 11015, धनौरा शुगर मिल से सीओजे 0118 के अलावा सीओजे 13235 गन्ने का बीज लेकर सिंगल बड तकनीक से नर्सरी तैयार करना शुरू किया। नर्सरी में ही उन्होंने सीओजे 0118 की कुछ पौधों को मार्च में बोया था, जोकि आज 12 फीट से भी ऊंचाई का गन्ना तैयार खड़ा है। कामिनी के अनुसार इस बार उन्होंने हरियाणा के करनाल से गन्ने की किस्म सीओजे 17231 की बुकिंग कराई है। जिसकी वह नर्सरी तैयार करेंगी। कामिनी कहती हैं कि उन्हें उम्मीद के अनुसार इस काम में सफलता मिली है, उम्मीद है कि आगे और अधिक मुनाफा भी कमा सकेंगी।