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बस भोजन करने ही कमरे पर जाता है कैलाश
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एमबीबीएस अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा गजरौला का युवक यूक्रेन में बदले हालात के बीच बीते कई दिन से बस भोजन करने ही कमरे पर जाता है। दहशत के मारे अधिकांश समय बेसमेंट में ही छिपकर रहता है। परिजनों से उसने बताया कि कमरे पर आते जाते भी डर लगता है।
गजरौला के सुल्तानपुर का 28 वर्षीय युवक कैलाश यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसका अंतिम वर्ष है। बीते कई दिन से रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद बदले हालात के कारण वह फंस गया है। उसके पिता नरोत्तम सिंह, माता राजो देवी, भाई सुरेंद्र व राकेश का कहना है कि वह चाहते हैं कि किसी भी तरह कैलाश अपने घर लौट आए। लेकिन तमाम अड़चन सामने आ रही हैं। हम यहां चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कारण यहां से कुछ नहीं होना है। जो भी होगा यूक्रेन से ही होगा। परिजनों ने कैलाश के हवाले से बताया कि वह बेहद डरा हुआ है। बताया कि कैलाश और उसके आस पास रहने वाले सभी छात्र खासे दहशत में हैं। भोजन करने ही कमरे पर जाते हैं। इसके बाद बेसमेंट में आकर छिप जाते हैं। कमरे तक आते जाते भी डर लगता है। जिससे चिंतित परिजन दिन में उसे कई-कई बार कॉल कर कुशल क्षेम लेते हैं। बात नहीं होती तो परिजन किसी अनहोनी की आशंका के चलते दहशत में डूब जाते हैं। यूक्रेन के खारकीव शहर पर हमले के परिणाम पर ही उनकी निगाह रहती है।
बेटा सकुशल अपने घर लौटा खुदा का लाख लाख शुक्र
गजरौला। इलाके के गांव कटाई निवासी शब्बू खां का 19 वर्षीय बेटा सुहैल खां एमबीबीएस करने यूक्रेन गया था, लेकिन दस दिन बाद ही हालात बिगड़ गए। रूस के हमले के बाद जहां सुरक्षित होने के बावजूद सुहैल खासा डर गया था। उसके परिजन भी घबरा गए थे। रविवार की सुबह नौ बजे फ्लाइट से वह दिल्ली पहुंचा। यहां से कार द्वारा अपने घर आया। अब यूक्रेन में और बिगड़े हालातों और लगातार आ रहीं डरावनी वीडियो को देख सुहैल खां के पिता शब्बू खां का कहना है कि खुदा का लाख लाख शुक्र है। उनका बेटा सकुशल घर लौट आया। अब रोजाना बिगड़ रहे हालातों के बीच वहां से लौटना मुश्किल था। यूक्रेन में फंसे छात्रों की पिटाई की टीवी पर वीडियो देख और परेशानी सुन उनका कलेजा पसीज रहा है। पढ़ाई करने गए छात्र बड़े मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।
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गजरौला के सुल्तानपुर का 28 वर्षीय युवक कैलाश यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसका अंतिम वर्ष है। बीते कई दिन से रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद बदले हालात के कारण वह फंस गया है। उसके पिता नरोत्तम सिंह, माता राजो देवी, भाई सुरेंद्र व राकेश का कहना है कि वह चाहते हैं कि किसी भी तरह कैलाश अपने घर लौट आए। लेकिन तमाम अड़चन सामने आ रही हैं। हम यहां चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कारण यहां से कुछ नहीं होना है। जो भी होगा यूक्रेन से ही होगा। परिजनों ने कैलाश के हवाले से बताया कि वह बेहद डरा हुआ है। बताया कि कैलाश और उसके आस पास रहने वाले सभी छात्र खासे दहशत में हैं। भोजन करने ही कमरे पर जाते हैं। इसके बाद बेसमेंट में आकर छिप जाते हैं। कमरे तक आते जाते भी डर लगता है। जिससे चिंतित परिजन दिन में उसे कई-कई बार कॉल कर कुशल क्षेम लेते हैं। बात नहीं होती तो परिजन किसी अनहोनी की आशंका के चलते दहशत में डूब जाते हैं। यूक्रेन के खारकीव शहर पर हमले के परिणाम पर ही उनकी निगाह रहती है।
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बेटा सकुशल अपने घर लौटा खुदा का लाख लाख शुक्र
गजरौला। इलाके के गांव कटाई निवासी शब्बू खां का 19 वर्षीय बेटा सुहैल खां एमबीबीएस करने यूक्रेन गया था, लेकिन दस दिन बाद ही हालात बिगड़ गए। रूस के हमले के बाद जहां सुरक्षित होने के बावजूद सुहैल खासा डर गया था। उसके परिजन भी घबरा गए थे। रविवार की सुबह नौ बजे फ्लाइट से वह दिल्ली पहुंचा। यहां से कार द्वारा अपने घर आया। अब यूक्रेन में और बिगड़े हालातों और लगातार आ रहीं डरावनी वीडियो को देख सुहैल खां के पिता शब्बू खां का कहना है कि खुदा का लाख लाख शुक्र है। उनका बेटा सकुशल घर लौट आया। अब रोजाना बिगड़ रहे हालातों के बीच वहां से लौटना मुश्किल था। यूक्रेन में फंसे छात्रों की पिटाई की टीवी पर वीडियो देख और परेशानी सुन उनका कलेजा पसीज रहा है। पढ़ाई करने गए छात्र बड़े मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।
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