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कब्रिस्तान में कब्जा, दफन के लिए नहीं मिली दो गज जमीन

Mon, 12 Sep 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा Updated Mon, 12 Sep 2016 01:39 AM IST
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मसवासी के बिजारखाता में सूखा पड़ा जंगिया वाला तालाब।
गांव बीवड़ा कलां 14 बीघे के कब्रिस्तान पर कब्जा होने से यहां के एक बुजुर्ग को दफन करने के लिए दो गज जमीन भी नहीं मिल सकी। मजबूरी में परिजन वृद्घ के शव को बिजनौर के शिवाला ले गए। यहां पर उन्हें सुपुुुर्द ए खाक किया गया।
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तहसील क्षेत्र के बीवड़ा कलां गांव की आबादी चार हजार के करीब है, हालांकि यहां मुस्लिम समुदाय का एक ही परिवार है। मुस्लिम समुदाय के मृत लोगों के दफन के लिए गांव में कब्रिस्तान के नाम पर 14 बीघे जमीन है, मगर अवैध कब्जे के कारण ये गांव की आबादी की जद में आ गया है। चाहरदीवारी नहीं होने से कब्रिस्तान की जमीन पर ग्रामीणों ने बोंगे, बिटौरे रख दिए हैं। पशु बांधे जा रहे हैं। 
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अब हालात यह हो गए हैं कि इस पर एक भी कब्र खोदने के लिए जमीन नहीं बची है।  शनिवार रात इंतकाल हुए गांव के 70 वर्षीय असगर को दफन करने के लिए यहां दो गज जमीन नसीब नहीं हो सकी। नतीजतन उसके शव को भाई और परिजन बिजनौर जिले के शिवाला गांव में ले गए।
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जहां पर बुजुर्ग को दफन किया गया। मृतक के बेटे खुर्शीद अली का कहना था कि उनके पुरखे शिवाला कलां में रहते थे। इसलिए उनके पिता को शिवाला कलां ले जाया गया। दूसरी तरफ उसका ये भी कहना था कि कब्रिस्तान में इस कदर कब्जा है कि शव दफन करना संभव नहीं था। 

डर की वजह से तो चुप नहीं हैं परिजन
बीवड़ा कलां गांव में 14 बीघे कब्रिस्तान होने के बाद भी असगर के शव को परिजन दफन करने के लिए शिवाला कलां ले जाना पड़ा। इसके बाद भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। दबी जुबां में कुछ ग्रामीणों का कहना था कि गांव के ही नन्हे पुत्र न्यादर की आठ साल पूर्व मौत हो गई थी। बताते हैं कि नन्हे की औलाद को गांव के ही दबंगों ने खदेड़ दिया था और उसके मकान पर कब्जा कर लिया। 


पूर्व प्रधान जिले सिंह का कहना है कि कब्रिस्तान पर ग्रामीणों का अवैैध कब्जा है। कब्जा हटवाने के लिए न तो उनसे किसी ने कहा और न ही कोई शासन से कोई आदेश आया। 

जब ग्राम प्रधान राजुकमार से कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध कब्जे के बारे में पूछा गया तो तो उनकी पत्नी ने रिसीव किया। बाद में फोन स्विच ऑफ कर दिया गया। इसके कारण पक्ष नहीं मिला है। हां उनके भाई ने ये जरूर कहा कि दफन करने में कोई परेशानी नहीं है। 


मंगल सिंह का कहना है कि कब्रिस्तान की जमीन पर पूर्णतया कब्जा है। इस पर बोंगे, बिटौरे के साथ ही कूड़ियां पड़ी हैं तथा पशु बांधे जा रहे हैं। प्रशासन ने कब्जा हटवाने की सुध नहीं ली। गांव के ही काले सिंह भी अवैध कब्जे से इंकार नहीं कर रहे हैं।
 
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